विश्व दीपक-
अब तो भक्त संप्रदाय को भी मान लेना चाहिये कि बिल्डर डोनाल्ड ट्रंप जो अमरीका का राष्ट्रपति है उसी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ रुकवाया था.
ट्रंप नीति पर काम करते हुए अमरीका के 39 वर्षीय राजदूत सर्जियो गोर ने कल भारतीय सेना के वेस्टर्न कमांड का दौरा किया. इसकी जानकारी भी पहले उसी ने दी. भारतीय सेना ने नहीं. बाद में अमरीकी दूतावास ने तस्वीरें ट्वीट की.
सर्जियो गोर क्या भारत का वायसरॉय है? उसे वेस्टर्न कमांड का दौरा क्यों करने दिया गया? वेस्टर्न कमांड भारत के लिये सबसे अहम है. पाकिस्तान को डील करने की जिम्मेदारी इसी कमांड की है. रिपोर्ट्स के मुताबिक गोर को वहां ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में ब्रीफ किया गया.
सवाल है कि गोर की हैसियत क्या है कि उसे सेना ने सीधे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बारे में ब्रीफ किया? आमतौर पर डिप्लोमैटिक चैनल्स के जरिये दिल्ली में ऐसी ब्रीफिंग होती हैं.
मुझे याद नहीं आ रहा कि किसी दूसरे देश का राजदूत भारतीय सेना के किसी कमांड चीफ से मिला हो. दिल्ली में सेनाध्यक्ष या किसी उच्च अधिकारी से किसी कार्यक्रम में या सेना भवन में विदेशी राजदूतों का मिलना जुलना होता रहता है.फील्ड में जाकर कमांड चीफ से मिलना अलग बात है.
गोर जब से आया है तब से वह भारत की संप्रभुता की धज्जियां उड़ा रहा है. भारत पहुंचने के तुरंत बाद उसने राष्ट्रपति को क्रेडेन्शियल्स देने से पहले ही आरबीआई गवर्नर से मुलाकात की थी.
याद कीजिए मुंबई की वह मुलाकात. गोर ऐसे बैठा जैसे वह आरबीआई का सुपर बॉस हो. आरबीआई का गवर्नर मेमना बना है उसके सामने.
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद से ट्रंप पाकिस्तान को खिला-पिला कर मोटा कर रहा है. आसिम मुनीर के साथ व्हाइट हाउस में डिनर करता है.
अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत की बेइज्जती करने का कोई मौका नहीं छोड़ता. लेकिन 56 इंच की छाती वाले महामानव के मुंह से एक शब्द नहीं निकला आज तक.
‘ऑपरेशन सिंदूर’ – अमरीका रुकवाता है. रूस से तेल नहीं लेना है – अमरीका तय करता है. वेनेजुएला से तेल खरीदना है – अमरीका बताता है. ट्रेड डील में क्या होगा – अमरीका निर्धारित करता है. जब सब कुछ अमरीका को ही करना है तो फिर मोदी सरकार की जरूरत क्या है?
इसीलिए मैं कहता हूं कि भारत सरकार दिल्ली से नहीं वॉशिन्गटन डीसी से चल रही है. भारत की संप्रभुता का ऐसा सरेंडर कभी नहीं हुआ.


