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ET में फुल पेज छपा गलगोटिया का यह विज्ञापन विवादों में!

हालिया एआई समिट से जुड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोशल मीडिया पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा — चीन में विकसित रोबोट (रोबोडॉग) को भारतीय नवाचार बताकर प्रस्तुत किया गया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि प्रभावित हुई।

इसी विवाद के बीच एक प्रमुख राष्ट्रीय आर्थिक दैनिक ET में संबंधित विश्वविद्यालय के एआई निवेश और उपलब्धियों पर प्रकाशित पेड सप्लीमेंट ने बहस को और तेज कर दिया है। आलोचकों का कहना है कि यदि तकनीकी दावों पर सवाल खड़े हैं, तो उसी समय अखबारों में बड़े पैमाने पर प्रचारात्मक सामग्री प्रकाशित करना “छवि प्रबंधन” की कोशिश जैसा प्रतीत होता है। पढ़ें कुछ टिप्पणियां…


आवेश तिवारी-

गलगोटिया ने आज सभी बड़े अखबारों को यह विज्ञापन दिया है। अकेले इकोनॉमिक टाइम्स में आल एडिशन इस विज्ञापन का दाम तकरीबन 60 लाख रुपए होगा।

मतलब छवि सुधारने के लिए आज तकरीबन 5 से 7 करोड़ खर्च कर दिए गए। लेकिन इस यूनिवर्सिटी ने गरीबों का चंद पैसों के लिए उत्पीड़न कैसे किया है? अगली पोस्ट में।


And this is today’s PAID half page supplement! What can one say. Zero embarrassment when money is collected!! -सुचेता दलाल, वरिष्ठ पत्रकार


वहीं, वरिष्ठ पत्रकार और यूट्यूबर रवीश कुमार ने गलगोटिया प्रबंधन पर सवाल उठाते हुए लिखा है-

AUDIT होनी चाहिए। क्या वाकई इतना पैसा है इस यूनिवर्सिटी के पास? कोई निवेशक इतना पैसा किस आधार पर लगा रहा है?

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