नई दिल्ली। कर्ज में डूबी कंपनी Jaiprakash Associates की बिक्री प्रक्रिया में Adani Group सबसे आगे निकलता दिख रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अदानी ग्रुप ने करीब ₹14,500 करोड़ के आसपास की बोली लगाकर अन्य कंपनियों को पीछे छोड़ दिया है।
इस प्रक्रिया में Vedanta Group, Jindal Steel & Power, Dalmia Bharat और PNC Infratech भी शामिल थीं। शुरुआती दौर में बोली ₹10,000 करोड़ से ₹11,000 करोड़ के बीच बताई जा रही थी, जबकि फ्लोर प्राइस करीब ₹12,000 करोड़ तय किया गया था।
बताया जा रहा है कि अंतिम दौर में मुकाबला मुख्य रूप से अदानी और वेदांता के बीच रह गया था। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया कि वेदांता की बोली अधिक थी, लेकिन आधिकारिक रूप से ऐसी जानकारी की पुष्टि नहीं हुई है।
प्रक्रिया कैसे तय होती है?
विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह की बिक्री प्रक्रिया आमतौर पर बैंकों और कर्जदाताओं की समिति (CoC) के जरिए तय होती है, जहां सबसे उपयुक्त और व्यवहार्य बोली को प्राथमिकता दी जाती है—सिर्फ अधिक राशि ही अंतिम निर्णय का एकमात्र आधार नहीं होती।
गुजराती से ये बिहारी हार गया मुझे बहुत अच्छा लगा। व्यापार का नियम है, जहाँ फ़ायदा वहाँ निवेश। बिहार ने एक “घाटे का सौदा” को जन्म दिया। अनिल अग्रवाल जब बिहार के नहीं हुए तो किसी के क्या होंगे। बिहार में अड़ानी का निवेश सबसे ज़्यादा हो रहा है और ये अग्रवाल जी राजस्थान और उड़ीसा में निवेश कर रहे है। हाँ ड्राइंग रूम में बिहार को लेकर कहानियाँ खूब बेच लेते हैं। आई हेट दिस टाइप ऑफ़ पीपुल। -कुमुद सिंह

मयूर वघेला-
जब सरकार किसी एक कॉरपोरेट के लिए बैटिंग करने लगे तो नियम कायदे जमीदोज हो जाते हैं जेपी एसोसिएट्स की नीलामी का मामला ध्यान से समझिए…
Vedanta Limited ने ₹16,726 Cr की बोली लगाई वो हार गई लेकिन Adani Group ₹14,535 Cr की बोली लगा कर जीत गया, जीतने का कारण दिया गया कि अडानी ने upfront ज्यादा दिखाया और timeline छोटी दी, लेकिन सवाल है कि क्या बोली जीतने के लिए ये पैमाना था नहीं पैमाना था बड़ी बोली , अगर मान भी लें कि upfront ज्यादा और timeline कम थी तो इसे क्या बोली लगाने वालों के बीच शेयर किया गया? क्या ये बोली लगाने और जीतने के लिए शर्त तय थी।
NPV कैसे निकाला गया? scoring का पैमान क्या था? किसने किस आधार पर vote किया? क्योंकि फैसला एक ऐसी ब्रांच ने किया जिसके पास 86% voting power थी। यह बाजार नहीं है, यह सरकारी power का खेल है, जहाँ विजेता वही बनता है, जिसकी जेब में सत्ता होती है…!!
अशोक दनोदा-

अगर आपका कोई अच्छा दोस्त हो तो वह मोदी जैसा हो। कल अडानी ने जेयपी ग्रुप को 14,535 करोड़ रुपये में खरीदा। अभी रुकिए थोड़ा और पढ़िए फिर पता चलेगा मोदी का नाम क्यों लिया था?
वेदांता ने करीब 17,000 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी, जो अडानी की बोली से 2,000 करोड़ रुपये ज़्यादा थी। लेकिन वेदांता को खाली हाथ लौटना पड़ा क्योंकि जैसे चुनाव में अडानी तिजोरी का दरवाजा खोलने वैसे वेदांता ग्रुप नहीं खोल पाता है ये बड़ा कंजूस है ।
जयपी ग्रुप के लिए 5 कंपनियों ने बोली लगाई थी: अडानी, वेदांता, डालमिया सीमेंट, जिंदल पावर और PNC इंफ्राटेक। फ्लोर प्राइस 12,000 करोड़ रुपये तय किया गया था।
अंतिम राउंड से पहले, अडानी और वेदांता को छोड़कर बाकी सभी कंपनियाँ दौड़ से बाहर हो गईं।
विजय शंकर चतुर्वेदी-
फिर मालिक बदला सीमेंट फैक्टरी का, अडानी के पास गया स्वामित्व
- क्या अभिशप्त है चुर्क की सीमेंट फैक्टरी
- 72 वर्ष पूर्व तत्कालीन प्रधानमंत्री पं नेहरू ने किया था इसका उदघाटन
- उत्तर प्रदेश सरकार, डालमिया ग्रुप, जेपी ग्रुप, आदित्य बिड़ला ग्रुप के बाद अब अडानी ग्रुप के पास स्वामित्व
चुर्क सीमेंट फैक्टरी के उदघाटन के अवसर पर 12 जुलाई 1954 को देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने भाषण देते हुए कहा था – “हमारा देश यात्राओं का देश है, किंतु यात्राओं में परिवर्तन हुआ है। आज की यात्राओं के स्थान भाखड़ा, सिंदरी, चितरंजन, विशाखापत्तनम और चुर्क सीमेंट कारखाना है।

हम यात्री हैं और यात्रा में देश के 35 करोड़ आदमियों को एक साथ आगे बढ़ना है। इस काम में यदि कुछ लोग विरोध करते हैं तो उसका भी मुकाबला करूंगा। जनता ने मुझे नेता बनाया है तो उसके यह माने नहीं कि गलत रास्ते पर चलूँ। यदि जनता गुमराह होती है तो उसे भी सही मार्ग बताना मेरा कर्तव्य है।
जो कार्य मनुष्यों के द्वारा हो सकते हैं उसके लिए मशीनों का उपयोग न किया जाये, हमें ऐसा औद्योगिक विकास चाहिए जिसमें लोगों को रोजगार का अवसर मिले, उनकी गरीबी दूर हो। मशीनें आदमी की मालिक नहीं बल्कि सेवक एवं सहयोगी के रूप में इस्तेमाल में आनी चाहिए जिससे हमारी पुरानी परंपराएं और संस्कृति कायम रहे और हमारा देश आधुनिक वैज्ञानिकता तथा तकनीकी विकास का फायदा उठा सके। इस पिछड़े क्षेत्र के लोगों को चुर्क सीमेंट फैक्टरी में रोजगार के अवसर प्रदान किए जायें ताकि इस क्षेत्र का विकास, इस क्षेत्र के निवासियों के विकास के साथ हो…”
इस अवसर पर पंडित गोविंद वल्लभ पंत, लाल बहादुर शास्त्री और स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक पंडित महादेव चौबे भी मंच पर विराजमान थे।
अभी तक एक के बाद मालिक ही बदल रहे, अस्थिरता ने सोनभद्र का विकास बाधित किया है।



हरि किशन
March 20, 2026 at 6:05 pm
अगर बोली के प्रोसेस में विवाद है तो प्रतिद्वंदी अदालत जा सकते हैं यह रास्ता हमेशा खुला है
S
March 22, 2026 at 10:40 am
Dalali dekhna hai to b. Media dekho dalali aur charan chatan kya hota hai pata chal jayega
Jis competitor ko problem hai wo court jaye order hone tak stay le
Tu kyo sabki dalali kar raha hai
AR
March 22, 2026 at 9:46 pm
Modi krupa se..????? VERY MISLEADING TITLE OF NEWS..Why the fake news spreader not be prosecuted..???