हिंदी अखबारों की दुनिया में अब सर्कुलेशन का संकट साफ दिखाई देने लगा है। मीडिया इंडस्ट्री से जुड़े ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश के बड़े हिंदी अखबारों की प्रसार संख्या पर दबाव बढ़ रहा है और ज्यादातर अखबार गिरावट का सामना कर रहे हैं।
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक, Audit Bureau of Circulations (ABC) के जुलाई-दिसंबर 2025 के आंकड़े बताते हैं कि हिंदी अखबारों में केवल ‘दैनिक भास्कर’ और ‘हिंदुस्तान’ ही मामूली बढ़त दर्ज कर पाए, जबकि ‘दैनिक जागरण’, ‘अमर उजाला’ और ‘राजस्थान पत्रिका’ जैसे बड़े अखबारों की प्रसार संख्या में गिरावट आई है।
रिपोर्ट के अनुसार, ‘दैनिक भास्कर’ अब भी सबसे बड़ा हिंदी अखबार बना हुआ है। इसकी सर्कुलेशन 30.50 लाख कॉपियों के आसपास दर्ज की गई, हालांकि बढ़त बेहद मामूली रही। दूसरी ओर ‘दैनिक जागरण’ की प्रसार संख्या में करीब 4.33 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई। ‘अमर उजाला’ को सबसे ज्यादा झटका लगा, जहां करीब 10 प्रतिशत से अधिक गिरावट सामने आई। वहीं ‘राजस्थान पत्रिका’ की सर्कुलेशन भी नीचे गई।
इसके उलट ‘हिंदुस्तान’ अखबार ने करीब 2.4 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की। रिपोर्ट में कहा गया है कि लोकल एडिशन, हाइपरलोकल कंटेंट और मजबूत डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क ऐसे अखबारों को कुछ हद तक फायदा पहुंचा रहे हैं।
मीडिया विशेषज्ञों का मानना है कि हिंदी प्रिंट मीडिया अब बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। EY M&E Report 2026 के हवाले से कहा गया है कि प्रिंट सेक्टर की सर्कुलेशन से होने वाली कमाई लगातार दूसरे साल घटी है। 2025 में सर्कुलेशन रेवेन्यू में करीब 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि हिंदी अखबार अब राष्ट्रीय विस्तार की बजाय अपने मजबूत क्षेत्रों पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। जैसे ‘दैनिक भास्कर’ राजस्थान और मध्यप्रदेश में, ‘दैनिक जागरण’ यूपी-बिहार में, जबकि ‘हिंदुस्तान’ बिहार और उत्तर भारत के बाजारों में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती लोकप्रियता भी प्रिंट मीडिया के लिए बड़ी चुनौती बन रही है। रिपोर्ट के मुताबिक युवा पाठक तेजी से डिजिटल की ओर शिफ्ट हो रहे हैं, जबकि अखबारों का पाठक वर्ग अब 35 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों तक सीमित होता जा रहा है।
हालांकि विज्ञापन बाजार में हिंदी प्रिंट अब भी मजबूत स्थिति में है। EY रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में कुल अखबारी विज्ञापनों में हिंदी प्रकाशनों की हिस्सेदारी 37 प्रतिशत रही, जो सभी भाषाओं में सबसे ज्यादा है।
इसी बीच मीडिया कंपनियां अब इवेंट्स, ग्राउंड एक्टिवेशन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और लोकल कैंपेन के जरिए नए रेवेन्यू मॉडल तलाश रही हैं। ‘दैनिक जागरण’, ‘दैनिक भास्कर’ और ‘अमर उजाला’ जैसे समूह बड़े स्तर पर इवेंट और रीडर एंगेजमेंट प्रोग्राम चला रहे हैं।


