प्रदीप-
सुनो यार वेब कंटेंट क्रिएट करने वाले भाई लोगों… सनसनी नहीं, अब सिर्फ़ भरोसा चलेगा। Google बाबा वज्रपात करने वाले हैं… वेबसाइट तो आपकी बैठा ही चुके थे, अब नंबर Youtube का है। फ़ंडा वही पुराना, वीडियो कंटेंट ओरिजिनल, WOW और एक्सक्लूसिव वाला होगा तभी जेब भरेगा।
अब तक लोग यूट्यूब पर वीडियो खोजते थे, लेकिन जल्द ही सीधे सवाल पूछेंगे और AI उन्हें जवाब देगा। यानी यूट्यूब सिर्फ वीडियो दिखाने वाला प्लेटफॉर्म नहीं रहेगा, बल्कि जवाब देने वाला प्लेटफॉर्म बन जाएगा।
जैसे, अगर मोबाइल पानी में गिर जाए तो सबसे पहले क्या करें? या स्कूल प्रोजेक्ट के लिए आसान साइंस एक्सपेरिमेंट बताओ? इसके बाद AI हजारों वीडियो को समझकर सबसे काम की जानकारी निकालकर यूजर के सामने रख देगा।
यानी यूजर को पूरा वीडियो देखने की जरूरत हर बार नहीं पड़ेगी। AI सीधे वीडियो का जरूरी हिस्सा दिखा देगा। यहीं से इंटरनेट के सबसे अहम बदलाव की कहानी शुरू होती है।
अब तक यूट्यूब की पूरी दुनिया व्यूज पर चलती थी। क्रिएटर्स कोशिश करते थे कि लोग ज्यादा देर तक वीडियो देखें, ताकि ज्यादा विज्ञापन चलें और कमाई बढ़े। लेकिन अगर AI खुद ही छोटा जवाब देने लगे, तो लोग पूरा वीडियो देखने में अपना वक़्त क्यों बर्बाद करेंगे?
मान लीजिए किसी ने पूछा, दिल्ली में गर्मी सबसे ज्यादा कब पड़ती है? पहले यूजर मौसम से जुड़े वीडियो खोलता, एक्सपर्ट की बातें सुनता और फिर 10-15 बिताने के बाद जवाब तक पहुंचता। लेकिन अब Ask YouTube फीचर सीधे बता देगा- मई और जून में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ती है और साथ में वीडियो का सबसे अहम जवाब वाला छोटा हिस्सा दिखा देगा। इससे पूरा वीडियो देखने की जरूरत ही नहीं होगी।
किसे होगा नुकसान?
- जानकारी देने कि जगह जो सनसनी फैलाते हैं।
- 5 सेकंड के फैक्ट पर जो 50 मिनट तक फ़ालतू का ज्ञान झाड़ते हैं।
- और सबसे बड़ा असर न्यूज चैनलों और छोटे यूट्यूबर्स पर पड़ सकता है।
आज कई न्यूज चैनल यूट्यूब पर छोटे-छोटे एक्सप्लेनर वीडियो बनाते हैं। लोग वीडियो खोलते हैं, विज्ञापन देखते हैं और वहीं से कमाई होती है। लेकिन अगर AI पहले ही खबर का सार बता देगा, तो इनके क्लिक कम हो सकते हैं।
यह बदलाव कुछ वैसा ही है जैसा वेबसाइट्स पहले झेल चुकी हैं। पहले लोग गूगल सर्च करके वेबसाइट खोलते थे। अब Google AI Overview खुद छोटा जवाब दिखा देता है। इससे कई वेबसाइट्स का ट्रैफिक कम हुआ है। अब वही चीज वीडियो की दुनिया में भी शुरू हो सकती है।
छोटे क्रिएटर्स के लिए यह चुनौती और बड़ी है। बड़े यूट्यूबर्स के पास पहले से लाखों फॉलोअर्स और मजबूत पहचान होती है। लेकिन छोटे चैनल सर्च रिजल्ट और रिकमेंडेशन पर निर्भर रहते हैं। अगर AI खुद ही जवाब देने लगेगा, तो नए चैनलों तक लोगों की पहुंच कम हो सकती है।
हालांकि इसका दूसरा पहलू भी है, क्रेडिबिलिटी…
यानी बकवास नहीं चलने वाली। मेलोडी खाते हुए डिप्लोमेसी का ज्ञान नहीं झाड़ पाएंगे। अब भरोसा सबसे बड़ी ताकत बनने जा रहा है।
मान लीजिए कोई वीडियो कहता है कि दो दिन में अंग्रेजी सीखो और दूसरा वीडियो किसी अनुभवी शिक्षक का है जो सही तरीके से पढ़ा रहा है। गूगल का नया फ़ीचर यह आसानी से पहचान लेगा कि कौन असली ज्ञान दे रहा और कहां whatsapp यूनिवर्सिटी की क्लास चल रही है।
यानी आने वाले समय में सिर्फ वायरल होना काफी नहीं होगा। भरोसेमंद होना ज्यादा जरूरी होगा।
अगर कोई न्यूज चैनल लगातार सही और जांची हुई खबरें देगा, अगर कोई यूट्यूबर रिसर्च करके वीडियो बनाएगा, सही स्रोत बताएगा और लोगों का भरोसा जीतेगा, तो AI ऐसे कंटेंट को ज्यादा महत्व दे सकता है।
इसका असर फेसलेस AI चैनलों पर भी पड़ सकता है।
अभी हजारों चैनल इंटरनेट से जानकारी उठाकर AI आवाज में वीडियो बनाते हैं। इनमें कई बार गलत या अधूरी जानकारी होती है। गूगल का सिस्टम ओरिजिनल और भरोसेमंद स्रोत पहचान लेगा फिर ऐसे चैनल डंप हो जाएंगे।
पत्रकारिता के लिए भी यह बड़ा मोड़ साबित होगा।
अभी कई प्लेटफॉर्म तेज और सनसनीखेज खबरों के पीछे भागते हैं। लेकिन AI को ऐसे स्रोत चाहिए होंगे जिनकी जानकारी सही और प्रमाणित हो। यानी जल्द ही सबसे पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण, सबसे सही होना होगा।
इंटरनेट की लड़ाई सिर्फ व्यूज और क्लिक की नहीं रहेगी। असली लड़ाई भरोसे की होगी। जो प्लेटफॉर्म, पत्रकार या यूट्यूबर लोगों का भरोसा जीत पाएगा, वही AI के दौर में सबसे ज्यादा मजबूत रहेंगे।
Ask YouTube सिर्फ एक फीचर नहीं है। यह इंटरनेट की अगली दुनिया की शुरुआत है, जहां लोग सर्च बॉक्स में शब्द नहीं लिखेंगे, बल्कि सीधे AI से बात करेंगे। लेकिन उस दुनिया में सबसे कीमती चीज टेक्नोलॉजी नहीं, बल्कि भरोसा होगा।


