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AI के नाम पर घरों में घुसा कैमरा, 250 रुपये में रिकॉर्ड हो रही निजी जिंदगी!

Woman wearing a head-mounted display holds up a large light-gray fabric indoors, near a laundry basket.

नाज़िया खान-

आपने फैक्ट्री मज़दूर, टैलर, शेफ़ आदि को यह डिवाइस लगाकर काम करते देखा होगा। अब हाउसवाइव्ज़ को भी लपेटे में ले लिया गया है।

यहाँ ​फर्स्ट-पर्सन डेटा कलेक्शन हो रहा है। इस महिला ने सिर पर एक हेड-माउंटेड गियर पहना हुआ है, जिसमें एक स्मार्टफोन है, जो बिल्कुल उनकी आँखों के स्तर से वीडियो रिकॉर्ड कर रहा है।

​बड़ी टेक कंपनियाँ और रिसर्च लैब्स आजकल AI और रोबोट्स को हर काम सिखाने के लिए इस तरह का डेटा जुटा रही हैं। अब घर का हर छोटा-बड़ा काम, जैसे कपड़े समेटना, खाना बनाना, सफ़ाई करना, सब रिकॉर्ड हो रहा है। AI मॉडल सीख रहा है कि इंसानी हाथ किसी चीज़ को कैसे पकड़ते हैं, उनके चलने का पैटर्न क्या है और रोज़मर्रा के कामों में किस तरह के फ़ैसले लिए जाते हैं और क्यों।

अब हमारे यहाँ प्रिवेसी की बातों का तो कोई मतलब है नहीं। हर कोई बोल देता है, सबके पास हमारा सब डेटा है। चुरा ले भई, है ही क्या चुरने लायक़।

​प्राइवेसी का इंट्रूज़न भी मानबे नहीं करते हैं।। घर के अंदर की निजी ज़िंदगी, घर का ले-आउट, परिवार के सदस्यों की एक्टिविटीज और पर्सनल सामान सब कुछ कैमरे में रिकॉर्ड हो रहा है। अगर यह डेटा सुरक्षित नहीं रखा गया, तो डेटा लीक होने का बहुत बड़ा ख़तरा है। न ही इसमें किसी को ​सस्ते श्रम का शोषण दिखेगा।

क्योंकि कुछ न मिलने से कुछ मिलना बेहतर है, कम ही क्यों न हो।

इस महिला ने बताया कि उसे बस सुबह उठकर यह डिवाइस पहनना होता है। जितनी देर पहनेगी, हर घण्टे के 250 रु मिलते हैं। 250₹ प्रति घण्टा एक गृहणी के लिये कम तो बिल्कुल नहीं हैं। एक बड़ी आबादी पहनने को तैयार हो जाएगी, ऑफर मिले तो। काम कुछ भी हो।

150 से 300 ₹ देना भी पड़ें तो क्या, घंटों डेटा रिकॉर्ड कराया जा रहा है, जिसका उपयोग करके कंपनियाँ अरबों डॉलर के AI मॉडल तैयार कर रही हैं।

​इस डेटा का इस्तेमाल ऐसे डोमेस्टिक रोबोट्स बनाने के लिए किया जाएगा, जो घर के सारे काम कर सकें।

इसका उद्देश्य एज़ युज़ुअल नोबल ही बताया जा रहा है।

बुज़ुर्गों और फिज़िकली चैलेंज्ड लोगों की मदद होगी, घर का काम संभाल लेंगे तो अकेले रहने वाले बुज़ुर्गों और बीमारों के लिए एक बहुत बड़ा सहारा बन सकते हैं।

इंसानों को बोरिंग, थका देने वाले और बार-बार दोहराए जाने वाले घरेलू कामों से मुक्ति मिल जाएगी, जिससे वे अपना समय दूसरे क्रिएटिव कामों में लगा पाएंगे ब्लाह ब्लाह।

शुरुआत में यह बढ़िया लग सकता है, लेकिन लंबे समय में यह उन लाखों लोगों, डोमेस्टिक हेल्प आदि का रोज़गार खा जाएंगे।

ख़ैर, हम कर भी क्या ही सकते हैं इसमें अब।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
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