जौनपुर। एक बाल अपचारी किशोर की पहचान सार्वजनिक करने के आरोप में जौनपुर में दैनिक जागरण से जुड़े एक तहसील संवाददाता विवादों में घिर गए हैं। मामले की शिकायत राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुंचने के बाद पुलिस स्तर पर जांच कराई गई। जांच के दौरान संबंधित पत्रकार की ओर से लिखित रूप में खेद प्रकट किए जाने की बात सामने आई है।
मामला केराकत क्षेत्र से जुड़े एक समाचार प्रकाशन का है। आरोप है कि दैनिक जागरण के तहसील संवाददाता दिलीप कुमार ने एक किशोर से संबंधित खबर प्रकाशित करते समय जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) एक्ट, 2015 की धारा 74 का उल्लंघन किया। इस धारा के तहत किसी भी बाल अपचारी की पहचान उजागर करना प्रतिबंधित है।
विधि छात्र ने की मानवाधिकार आयोग में शिकायत
इस मामले को लेकर विधि छात्र विकास ठाकुर ने राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि समाचार प्रकाशित करते समय किशोर की पहचान उजागर की गई, जो कानून का स्पष्ट उल्लंघन है।
सूत्रों के अनुसार, राज्य मानवाधिकार आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए पुलिस अधीक्षक, जौनपुर से विस्तृत रिपोर्ट तलब की। इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने जांच की जिम्मेदारी नगर पुलिस अधीक्षक आयुष श्रीवास्तव को सौंपी।
जांच में माफीनामा भेजे जाने की चर्चा
शिकायतकर्ता का दावा है कि जांच के दौरान दैनिक जागरण प्रबंधन की ओर से खेद व्यक्त किया गया और संबंधित संवाददाता की ओर से लिखित स्पष्टीकरण एवं माफीनामा अधिकारियों को उपलब्ध कराया गया। इसमें कथित तौर पर यह स्वीकार किया गया कि मामले की पूरी जानकारी न होने के कारण त्रुटिवश खबर प्रकाशित हो गई।
हालांकि, इस संबंध में दैनिक जागरण प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।
पुलिस प्रेस नोट के बावजूद प्रकाशित हुई खबर
शिकायतकर्ता विकास ठाकुर का कहना है कि पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट में किशोर की उम्र का उल्लेख तो किया गया था, लेकिन उसकी पहचान उजागर नहीं की गई थी। इसके बावजूद अगले दिन प्रकाशित खबर में कानून के प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।
पत्रकारिता और कानून के बीच संतुलन का सवाल
यह पूरा मामला एक बार फिर पत्रकारिता में कानूनी और नैतिक मानकों के पालन को लेकर बहस छेड़ रहा है। जुवेनाइल जस्टिस कानून का उद्देश्य बच्चों की पहचान और भविष्य की रक्षा करना है। ऐसे में यदि किसी बाल अपचारी की पहचान सार्वजनिक होती है, तो उसका दूरगामी सामाजिक प्रभाव पड़ सकता है।
अब निगाहें राज्य मानवाधिकार आयोग की आगे की कार्रवाई और पुलिस जांच की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं।




