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अमृत विचार पर बड़ा आरोप, पहले पीएफ का पैसा नहीं दिया, अब मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर कानूनी नोटिस भेजा!

लखनऊ। अमृत विचार के पूर्व कर्मचारी मनोज कुमार चतुर्वेदी ने कंपनी प्रबंधन द्वारा भेजे गए कानूनी नोटिस पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि पहले उनके भविष्य निधि (PF) से जुड़े मामलों का समाधान नहीं किया गया और अब कानूनी नोटिस भेजकर उन पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।

मनोज चतुर्वेदी के मुताबिक, कंपनी की ओर से भेजे गए नोटिस में दावा किया गया है कि उनका फुल एंड फाइनल सेटलमेंट किया जा चुका है। हालांकि उनका कहना है कि यदि उनके सभी देयकों का भुगतान वास्तव में कर दिया गया है, तो कंपनी उनके पीएफ खाते से संबंधित यूएएन (UAN) और जमा की गई राशि का पूरा विवरण उपलब्ध क्यों नहीं करा रही है।

उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से अपने पीएफ से जुड़ी जानकारी और बकाया राशि का विवरण मांग रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उनका आरोप है कि इस संबंध में पारदर्शी तरीके से जानकारी देने के बजाय कंपनी प्रबंधन ने उन्हें कानूनी नोटिस भेजना उचित समझा।

कानूनी नोटिस में यह भी आरोप लगाया गया है कि चतुर्वेदी ने रात 10 बजे नशे की हालत में कंपनी के सीओओ पार्थो कुमार को फोन किया था। इस आरोप को खारिज करते हुए मनोज चतुर्वेदी ने कहा कि उनके मोबाइल कॉल रिकॉर्ड के अनुसार संबंधित कॉल रात 9:12 बजे की गई थी।

चतुर्वेदी का दावा है कि उन्होंने फोन पर केवल पीएफ की राशि जमा न होने का कारण पूछा था और इस मुद्दे पर कार्यालय में बैठकर बातचीत करने की बात कही थी। उनके अनुसार, इसी दौरान उन्हें कथित तौर पर कहा गया, “तुम्हारे घर आ जाएं?” उन्होंने सवाल उठाया कि जब चर्चा कार्यालय से जुड़े मामले और पीएफ भुगतान को लेकर हो रही थी, तब बातचीत में उनके घर का जिक्र क्यों किया गया। उनका आरोप है कि उन्हें कानूनी कार्रवाई में फंसाने की धमकी भी दी गई।

उन्होंने कहा कि मीडिया संस्थानों में कार्य की प्रकृति ऐसी होती है कि कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच देर शाम तक भी कामकाजी बातचीत होती रहती है। ऐसे में केवल कॉल के समय को आधार बनाकर किसी कर्मचारी के खिलाफ नशे में होने जैसे गंभीर आरोप लगाना उचित नहीं है।

मनोज चतुर्वेदी का कहना है कि कानूनी नोटिस में लगाए गए आरोप तथ्यहीन और बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो वह अपने पक्ष के समर्थन में उपलब्ध कॉल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज सक्षम मंच पर प्रस्तुत करेंगे।

फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद जारी है। वहीं, कंपनी प्रबंधन की ओर से मनोज चतुर्वेदी द्वारा लगाए गए ताजा आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। ऐसे में अब इस विवाद की अगली दिशा संबंधित कानूनी और वैधानिक प्रक्रियाओं के तहत तय होगी।

Letterhead legal document from advocate C.P. Goswami, with Devanagari text and a stamp at the bottom.
Hindi legal document page with dense paragraphs and a signature stamp at the bottom.
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