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उत्तर प्रदेश

विधानसभा सचिव प्रदीप दुबे की सतीश महाना के साथ फोटो इतनी चर्चा में क्यों है?

Two men sit in the front row of an airplane cabin: one wearing an orange vest, the other a pale green vest, with passengers behind them.

अभिषेक उपाध्याय-

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा के सचिव प्रदीप दुबे एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार वजह विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के साथ उनकी यात्रा की सामने आई तस्वीर बनी है। तस्वीर सामने आने के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में कई पुराने सवाल फिर से उठने लगे हैं।

प्रदीप दुबे की नियुक्ति से लेकर सेवा विस्तार तक का मामला लंबे समय से विवादों में रहा है। बताया जाता है कि उनके कार्यकाल से जुड़े कुछ मामले इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी विचाराधीन हैं। आलोचकों का कहना है कि 65 वर्ष की आयु पूरी कर सेवानिवृत्त होने के बावजूद वह पिछले करीब तीन वर्षों से विधानसभा के सचिव पद पर बने हुए हैं, जिस पर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

उन पर यह आरोप भी लगते रहे हैं कि विधानसभा में नियुक्तियों के दौरान नातेदारों और करीबी लोगों को लाभ पहुंचाया गया। हालांकि इन आरोपों को लेकर कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है और न ही संबंधित मामलों में कोई दोष सिद्ध हुआ है।

विधानसभा अध्यक्ष के साथ प्रदीप दुबे की हालिया तस्वीर सामने आने के बाद एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि आखिर रिटायरमेंट के बाद भी उनका पद पर बने रहना किन परिस्थितियों में संभव हुआ। सवाल यह भी उठाए जा रहे हैं कि क्या विधानसभा प्रशासन से जुड़े पुराने विवादों और नियुक्तियों से संबंधित आरोपों की कभी निष्पक्ष समीक्षा होगी।

आलोचकों का कहना है कि विधानसभा अध्यक्ष को भी इस पूरे प्रकरण पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि सेवा निवृत्ति के बाद प्रदीप दुबे को लगातार जिम्मेदारी सौंपे जाने का आधार क्या है। साथ ही, पूर्व विधानसभा सचिव जेपी सिंह से लेकर प्रदीप दुबे तक समय-समय पर उठे रिश्तेदारों को नौकरी दिलाने संबंधी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जरूरत है।

हालांकि, यह भी सच है कि विधानसभा सचिव के रूप में प्रदीप दुबे का विधानसभा अध्यक्ष के साथ आधिकारिक कार्यक्रमों और यात्राओं में शामिल होना अपने आप में कोई असामान्य बात नहीं है। लेकिन उनके कार्यकाल को लेकर पहले से मौजूद विवादों के कारण हर सार्वजनिक उपस्थिति नए सवालों को जन्म दे रही है।

फिलहाल, प्रदीप दुबे के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों पर उनकी ओर से कोई ताजा सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित मामलों और प्रशासनिक निर्णयों पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वर्षों से उठ रहे इन सवालों का जवाब आखिर कब और कैसे सामने आता है।

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