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उत्तर प्रदेश

बिना चंपत राय बंसल को ट्रस्ट से बाहर किए और उनकी गिरफ्तारी किये निष्पक्ष जांच संभव नहीं!

Portrait of a man with a mustache wearing sunglasses and a white shirt, outdoors with a blurred background.

ब्रजेश सिंह-

बिना चंपत राय बंसल को ट्रस्ट से बाहर किए और उनकी गिरफ्तारी किये निष्पक्ष जांच संभव नहीं

चंपत राय द्वारा तथ्य छुपाना, घटना से इंकार करना आंतरिक जांच की बात करना काफी कुछ स्पष्ट करता है।

(बात सीधी सी है जब ट्रस्ट का महासचिव दान चोरी की घटना से इंकार कर रहा है तो या तो वह चोरी में शामिल है या तो वह चोरों को बचाना चाहता है)

जब चंपत राय ने मीडिया से आकर सारी घटनाओं को निराधार बताया उसके बाद उनकी चापलूसी में डेढ़ रोटी और शाम को रामदाने की खिचड़ी खाने वाले लेख लिखे जाने लगे चापलूसी भरा सबसे पहला लेख विश्व हिंदू परिषद के अंबरीश जी ने लिखा, अध्यक्ष जिला पंचायत अयोध्या के पति ने भी लिखा तभी मैं जान गया कि यह भाई साहब लोग किन चीजों पर पर्दा डालना चाहते हैं।

राम मंदिर चंदा चोरी प्रकरण में सबसे ज्यादा संदिग्ध भूमिका श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय की है जिस दिन घटना का खुलासा हुआ उस दिन सबसे पहले चंपत राय मीडिया के सामने आए और उन्होंने दान राशि में हेर फेर की बात को सिरे से खारिज किया। लेकिन चंपत राय के बयान के बाद भी लगातार जिस तरह से परते दर परते खुलती रही। उस शाम तक दो चीज पूरी तरह से स्पष्ट हो गई

Elder Indian man in an orange kurta and beige vest points while speaking, holding a document.
चंपत राय बंसल
  1. चंदा चोरी में स्पष्ट रूप से सीधी भूमिका चंपत राय की है क्योंकि सारे लोग जो भी इस मामले में प्रथम दृष्टया आरोपी दिख रहे हैं सभी सीधे तौर पर चंपत राय से जुड़े हुए हैं कोई ड्राइवर है तो कोई कुछ और है।
  2. ट्रस्ट के महासचिव के तौर पर चंपत राय करोड़ों राम भक्तों के आस्था से जुड़े हुए इस बड़े भ्रष्टाचार पर पर्दा डालना चाहते हैं।

दोनों ही परिस्थितियों में चंपत राय को ट्रस्ट से विदा किया जाना चाहिए और उनके और उनके ड्राइवर रह वह अन्य साथियों के ऊपर मुकदमा दर्ज करने निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

आज तक किसी के ऊपर ट्रस्ट के द्वारा मुकदमा दर्ज नहीं करवाया गया।

क्या चंपत राय के पास इस प्रश्न का कोई उत्तर है कि उनके और अनिल मिश्रा का ड्राइवर चंद्र दिनों में करोड़पति कैसे बन गया।

ट्रस्ट के किस पदाधिकारी ने कैमरा लगवाने से इनकार किया था।

क्या चंपत राय इस बात का जवाब देंगे की राम शंकर यादव टिन्नू जो कभी चंपतराय का ड्राइवर हुआ करता था अब वह उनका सहयोगी बन गया और अरबपति कैसे बन गया उसके यहां भागवत कथा के कार्यक्रम में चंपत राय किस हैसियत से गए थे क्या दिन प्रतिदिन उसकी हैसियत में बढ़ोतरी चंपत राय को नहीं दिख रही थी वह आधा से ज्यादा रेस्टोरेंट में पार्टनर और चार-पांच प्लाट का मालिक कैसे बन गया।

मिल्कीपुर का लवकुश मिश्रा जो कभी कार मिस्त्री हुआ करता था उसके घर के घर में घूर से रुपए मिल रहे हैं और चंपत राय मामले को राजनीतिक बता रहे हैं घटना से इंकार कर रहे हैं।

इतने बड़े मामले में ट्रस्ट की तरफ से कोई प्रतिक्रिया अब नहीं आ रही है चंपत राय अचानक में शुगर ब्लड प्रेशर के मरीज हो गए हैं अनिल मिश्रा अपनी आंख दिखाने के लिए बाहर चले गए हो जिनका वेतन 18 से ₹ बीस हजार था वह करोड़ों रुपए के मालिक बन गए और चंपत राय पूरी तरह से यह स्पष्ट हो गया है कि मामले को उलझाने की कोशिश कर रहे थे और अब जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तीन सदस्यीय एसआईटी टीम का गठन कर दिया है तो उसके अयोध्या पहुंचने के पहले उन दोनों लोगों का स्वास्थ्य खराब हो गया है जिन दोनों लोगों के ड्राइवर करोड़पति बन गए हैं।

राम मंदिर की दान राशि में हुए गबन मामले में अब तक 2.98 करोड़ रुपये की रिकवरी की जा चुकी है। यह रकम पकड़े गए संदिग्धों की निशानदेही पर बरामद की गई है। गुपचुप ढंग से चल रही जांच में आठ करोड़ रुपये से अधिक के हुए हेरफेर के संकेत व साक्ष्य मिले हैं। हालांकि जांच पूरी होने के बाद यह राशि घट या बढ़ भी सकती है।

गबन का खुलासा जब से हुआ है, तब से ट्रस्ट गोपनीयता से जांच में जुटा है। पदाधिकारी चुप्पी साधे हैं। आधिकारिक तौर पर पुलिस को भी शामिल नहीं किया गया है, चूंकि करोड़ों का गबन हुआ है इसलिए रिकवरी की जद्दोजहद में सभी जुटे हैं। यह भी पता किया जा रहा है कि पकड़े गए संदिग्धों के अलावा और कौन-कौन लोग इसमें शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक, अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि गबन की राशि कुल कितनी है। हालांकि, संदिग्धों से पूछताछ में मिली जानकारी व अन्य साक्ष्यों से अंदेशा है कि आठ करोड़ से अधिक का खेल किया गया है।

जो संदिग्ध पकड़े गए हैं, वे मामूली पैसों की नौकरी करते थे। कुछ लोगों ने पार की गई रकम से निवेश भी किया है। इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। चूंकि नकदी अधिक थी, इसलिए उसे सही से ठिकाने नहीं लगाया जा सका। यही वजह है कि करोड़ों की नकदी बरामद हो चुकी है। कुछ ने अपने घर तो कुछ ने अपने रिश्तेदारों व परिचितों के घरों में भी नकदी छिपाई थी।

संदिग्धों के घर व ठिकानों के अलावा बैंक खाते भी खंगाले जा रहे हैं। इनमें अवनीश के खाते से पांच लाख रुपये मिले हैं। यह वही रकम है, जो उसने दान राशि से गायब कर अपने खाते में जमा की थी। इसके अलावा कुछ जेवरात भी मिले हैं। अवनीश के एक रिश्तेदार ने जमीन खरीदी है। आशंका है कि इस जमीन खरीद में अवनीश ने भी रकम लगाई है।

ट्रस्ट की चुप्पी तमाम सवाल पैदा कर रही है। क्या गबन के खेल के पीछे कोई बड़ा नाम सामने आ रहा है। इसलिए मामला दबाया जा रहा है। जब गबन का मामला खुला था, उसी वक्त पुलिस या अन्य किसी जांच एजेंसी या एसआईटी को जांच सौंप देनी चाहिए थे। इतने दिन बीतने के बाद एसआईटी की मांग गई है। ऐसे में सुबूत नष्ट करने का काफी वक्त भी मिला। अगर एसआईटी या अन्य एजेंसी तफ्तीश करती है तो मामले में बड़े खुलासे होने की आशंका है।

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