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उत्तर प्रदेश

यूपी रेरा का महाभ्रष्ट अधिकारी संजय तिवारी; ये आवेदन की फाइल में कुंडली मारकर बैठ जाने में बड़ा ही माहिर है!

अश्विनी कुमार श्रीवास्तव-

यूपी रेरा का एक महाभ्रष्ट अधिकारी है संजय कुमार तिवारी। जिसको UPRERA ने शायद धन उगाही के लिए आवेदन की पहली ही पायदान पर बैठा रखा है, तकनीकी सलाहकार का पद देकर। यह अधिकारी आवेदन की फाइल पर कुंडली मारकर बैठ जाने के फन में बड़ा ही माहिर है। यही नहीं, मुखिया है यह तकनीकी विभाग का लेकिन आज के डिजिटल युग में यह आदमी एक महीने से कम में फ़ाइल के स्टेटस का जवाब नहीं देता है और अपने हर जवाब में एक नई खामी आवेदन की यह निकाल कर नई ही आपत्ति भेजता है। जाहिर है, चढ़ावा न पहुंचाने वाले या फाइल रोकने का चढ़ावा किसी से मिल जाने पर यह अपना यह हुनर दिखाता है।

जनवरी में मैंने अपने एक lapsed rera रजिस्ट्रेशन के सरेंडर का आवेदन किया। इसने उस फ़ाइल पर ऐसी कुंडली मारी है कि फाइल इसके पास से एक इंच हिली ही नहीं है , साल खत्म हो जाएगा तो भी यह इसे अपने पास से कहीं भेजने के मूड में ही नहीं है।

तब से लेकर इसने मुझे मात्र चार बार ऑब्जेक्शन भेजे और एक आज भेजा। मैंने इसकी हर आपत्ति के जवाब में सैकड़ों पन्ने भेजे लेकिन मजाल है कि कोई मेरे जवाब का इस भ्रष्ट अफसर पर असर पड़ा हो। इसको कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैं इसके ऑब्जेक्शन के जवाब में क्या लिख रहा हूं। एक आब्जेक्शन का रट्टा तो इसने लगाया ही है , हर बार इस ज्ञानी ध्यानी को मेरे उसी जनवरी वाले आवेदन में कोई नई खामी मिल जाती है, जिसका जवाब भी मैं दे देता हूं।

अभी दो महीने पहले तंग आकर मैंने लिखा कि भाई तू एक काम कर मेरा आवेदन वापस कर दे या रद्द कर दे। इसने मौन साध लिया। फोन करके इससे बात की तो ऐंठ दिखाने लगा मानों rera का माई बाप यही है। मैंने कहा कि भाई आवेदन तो रद्द करने का अनुरोध लिखित में भेज दिया। फिर भी यह चुप्पी साध कर फाइल दबाकर बैठ गया। मैंने भी कोशिश छोड़ दी तो अब दो माह बाद फिर इसका एक पत्र मिला है जिसमें इसने उसी जनवरी के आवेदन में एक नई खामी निकाली है।

इससे पहले इसके हर ऑब्जेक्शन के जवाब में मेरे द्वारा भेजे जा चुके सैकड़ों पन्नों के जवाब की एक भी लाइन पढ़े बिना इसने फिर लिखा है कि आपने ऑब्जेक्शन का जवाब नहीं दिया।

अपने पत्र में इसने यह जरूर लिखा है कि आवेदन रद्द करने का आपका पत्र मिला है लेकिन वह कब होगा , यह अभी तय नहीं है। मुझे पता है कि इसने मेरे साथ बिजनेस में धोखाधड़ी करने वाले साझेदार से पैसे खाए हैं और उसकी नमक हलाली और भाई चारा निभाने में इतना गिर गया है कि अपने पद का दुरुपयोग करने में इसे कोई शर्म तक नहीं आ रही।

पता नहीं यूपी का इतना बुरा हाल हो चुका है कि क्या कहें किससे कहें कुछ समझ ही नहीं आता। यहां एक से बढ़कर एक चोर और भ्रष्ट विभाग और एक से बढ़कर एक फाइल दबाने वाले कलाकार बैठे हैं। पता नहीं सरकार है भी या यहां सब अपनी ही मर्जी चला रहे हैं।

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