नई दिल्ली। एस्सेल समूह के चेयरमैन और ज़ी मीडिया-ज़ी एंटरटेनमेंट साम्राज्य के संस्थापक सुभाष चंद्रा द्वारा लुटियंस दिल्ली स्थित अपना आलीशान बंगला 1,260 करोड़ रुपये में बेचने की खबर ने कारोबारी और मीडिया जगत में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। यह सिर्फ एक रियल एस्टेट सौदा नहीं माना जा रहा, बल्कि इसके पीछे एस्सेल समूह के पिछले कुछ वर्षों के वित्तीय संघर्षों को भी जोड़कर देखा जा रहा है।
दिलचस्प तथ्य यह है कि सुभाष चंद्रा ने यह 2.8 एकड़ की प्रीमियम प्रॉपर्टी वर्ष 2015 में करीब 304 करोड़ रुपये में खरीदी थी। महज 11 वर्षों में इसकी कीमत चार गुना से अधिक बढ़कर 1,260 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। लेकिन सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि उन्होंने इतना बड़ा मुनाफा कमाया, बल्कि यह भी है कि आखिर इस समय इतनी बड़ी संपत्ति बेचने की जरूरत क्यों पड़ी?
कभी कर्ज संकट में फंस गया था एस्सेल समूह
दरअसल, 2019 में एस्सेल समूह देश के सबसे चर्चित कॉरपोरेट कर्ज संकटों में से एक का सामना कर रहा था। समूह की कई कंपनियों के शेयर गिरवी रखे गए थे और बाजार में भारी उथल-पुथल के बाद बैंकों तथा वित्तीय संस्थानों का हजारों करोड़ रुपये फंस गया था। उस समय कर्जदाताओं ने दबाव बनाया और समूह को अपनी कई परिसंपत्तियां बेचनी पड़ीं।
सुभाष चंद्रा ने बाद में सार्वजनिक रूप से कहा था कि उन्होंने कर्ज चुकाने के लिए अपनी व्यक्तिगत और कारोबारी संपत्तियां बेचने का रास्ता चुना। 2021 में उन्होंने दावा किया था कि समूह के 90 प्रतिशत से अधिक कर्ज का निपटारा कर दिया गया है। इसके बावजूद एस्सेल समूह से जुड़े वित्तीय विवाद और कुछ कानूनी-नियामकीय मामले समय-समय पर सुर्खियों में आते रहे हैं।
जी एंटरटेनमेंट और एस्सेल समूह में फर्क
अक्सर लोग ज़ी एंटरटेनमेंट (ZEEL) और एस्सेल समूह को एक ही मान लेते हैं, जबकि दोनों की वित्तीय स्थिति अलग-अलग है। ज़ी एंटरटेनमेंट आज भी देश की प्रमुख मीडिया कंपनियों में शामिल है और उस पर कोई बड़ा कर्ज संकट नहीं माना जाता। लेकिन एस्सेल समूह के पुराने वित्तीय दायित्वों और उनसे जुड़े विवाद पूरी तरह समाप्त हो गए हों, ऐसा भी नहीं कहा जा सकता।
यही वजह है कि लुटियंस दिल्ली जैसी प्रीमियम संपत्ति की रिकॉर्ड बिक्री को कई कारोबारी विश्लेषक सिर्फ निवेश से निकासी नहीं, बल्कि वित्तीय पुनर्गठन की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानकर देख रहे हैं।
देश की सबसे बड़ी प्रॉपर्टी डील्स में शामिल
लुटियंस दिल्ली देश का सबसे प्रतिष्ठित और महंगा इलाका माना जाता है। यहां राष्ट्रपति भवन, केंद्रीय मंत्रियों, वरिष्ठ नौकरशाहों, राजनयिकों और बड़े उद्योगपतियों के आवास स्थित हैं। ऐसे में 1,260 करोड़ रुपये की यह डील भारतीय रियल एस्टेट इतिहास की सबसे बड़ी आवासीय संपत्ति बिक्री में शामिल हो गई है।
राजनीति में भी रहे सक्रिय
हरियाणा के हिसार निवासी सुभाष चंद्रा सिर्फ मीडिया कारोबारी ही नहीं, बल्कि राजनीति में भी सक्रिय रहे हैं। वे हरियाणा से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। वर्ष 2022 में उन्होंने राजस्थान से राज्यसभा चुनाव लड़ने की कोशिश की थी, लेकिन सफलता नहीं मिली।
बिक्री के पीछे क्या है असली वजह?
फिलहाल इस सौदे को लेकर आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया गया है कि प्राप्त धनराशि का उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाएगा। लेकिन जिस तरह एस्सेल समूह पिछले कुछ वर्षों से कर्ज घटाने, परिसंपत्तियों के पुनर्गठन और वित्तीय स्थिरता की दिशा में कदम उठाता रहा है, उसके चलते यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या यह रिकॉर्ड डील भी उसी प्रक्रिया की अगली कड़ी है।
हालांकि एक दूसरा पक्ष यह भी है कि लुटियंस दिल्ली की संपत्तियों के दामों में पिछले दशक में जबरदस्त वृद्धि हुई है और संभव है कि सुभाष चंद्रा ने महज निवेश पर शानदार रिटर्न हासिल करने के लिए यह फैसला लिया हो।
एस्सेल ग्रुप के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने दिल्ली के लुटियंस जोन में स्थित अपना बंगला बेच दिया है। यह बंगला रिकॉर्ड 1,260 करोड़ रुपए में बेचा गया है। सिर्फ 11 साल पहले 2015 में उन्होंने 2.8 एकड़ में फैली यह प्रॉपर्टी 304 करोड़ में खरीदी थी। सिर्फ 11 साल में 4 गुना से भी ज्यादा मूल्य में सुभाष चंद्रा ने यह बंगला बेच दिया।
सुभाष चंद्र हरियाणा में हिसार के रहने वाले हैं। वे हरियाणा से राज्यसभा सांसद भी रह चुके हैं। 2022 में उन्होंने राजस्थान से भी राज्यसभा सांसद बनने के लिए पर्चा भरा था लेकिन यहां से पार नहीं पड़ी।
-अरविंद चोटिया, पत्रकार


