पीयूष पदमाकर-
अयोध्या कांड: चंपत चैप्टर 1
मई का महीना। ऊपर तक खबर पहुंच चुकी थी, राम मंदिर में सब ठीक नहीं चल रहा है। लखनऊ के पास पुष्ट खबर थी। नागपुर सबूत मांग रहा था। प्रचारक तंत्र अपने खास प्रचारक को बचाने में लगा था। संघ के दो प्रभावशाली नेता सुनने को भी तैयार नहीं थे। मई के महीने में एक व्यक्ति मोटी रकम चढ़ावे में देना चाहते थे। exact रकम पता थी। उन्हें कहा गया चढ़ावे में रकम डालें ।जब मई की गिनती की रिपोर्ट आई तो जितनी रकम उस एक दानकर्ता ने दी थी, उससे भी कम रकम निकली। इसके बाद माथा ठनका। मोबाइल फ़ोन बजने लगे।
चंपत चैप्टर पार्ट 2
राम मंदिर। चार जून की तारीख। सीसीटीवी कैमरे में चोर देखे गए। कोई hidden camera अलग से नहीं लगा था। लगाता भी कौन जब सारे चोर मिले हुए थे। उन्हें एक-एक ख़बर पहले से ही लग जाती थी। ऊपर से अत्यधिक दवाब के बाद चंपत ने सीसीटीवी मोनिटर करने की इजाज़त दी। गिरफ़्तार आठ में से सात लोग चोरी करते साफ दिख रहे थे। इसके बाद चंपत पैनिक में आए। सबूत लखनऊ, दिल्ली और नागपुर तक पहुंचाए गए।
चंपत चैप्टर पार्ट 3
तारीख 6 जून। चंपत राय ने सबसे बड़ी गलती इस दिन ही की। धोती कुर्ता पहनकर चंपत खुद निकल गए चोर के घर। कुछ विश्वासपात्र पुलिसवालों को साथ ले लिया। सीसीटीवी में जो लोग चोरी करते दिख रहे थे, पुलिस के सामने उनसे गुनाह क़बूल करवाने लगे और पैसे की बरामदगी भी होने लगी। एक ने बताया, चढ़ावे का पैसा हर महीने पत्नी के खाते में जमा कराता है। कितना? दो लाख प्रति महीने। एक ने हॉस्टल में बीस लाख छिपा रखे थे। एक ने गोबर/उपलों के बीच दस लाख छिपा दिए थे। ऐसे करते-करते 79 लाख 84 हजार 293 रुपए रिकवर हो गए। पुलिस के सामने सब था तो खबर करंट की तरह पहले लखनऊ, फिर दिल्ली और फिर नागपुर पहुंच गई। लखनऊ की राय उसी दिन FIR और गिरफ़्तारी करने की थी। दिल्ली से सबसे पावरफुल मंत्री ने चंपत से बात की। चंपत शुरू शुरू में ही झंडेवालान और नागपुर के नंबर चार और पांच के शरण में चले गए।
चंपत चैप्टर पार्ट 4
6 जून के बाद सात चोरों को राम मंदिर के ही एक कक्ष में बंद रखा गया। चंपत के खास टिन्नू यादव को ‘खास निर्देश’ पर आज़ाद छोड़ा गया। चंपत से जब भी दिल्ली या नागपुर से संपर्क किया जाता वो दो तीन बात ही रट लगाते रहते। कुल मिलाकर ये कहने की कोशिश- छोटी मोटी घटना थी, सबने माफी मांग ली है। पैसे वापस कर दिए हैं। अगर FIR या गिरफ़्तारी हुई तो बहुत बदनामी होगी। संघ का एक मजबूत ग्रुप चंपत को बचाने में लगा था। लेकिन देश के नंबर वन, यूपी के नंबर वन और RSS के नंबर वन और नंबर टू की राय एकदम साफ थी। ‘दूध का दूध पानी का पानी’ इन्हीं टॉप लेवल की बातचीत की लाइन थी। आखिर में लखनऊ ने पूरे सबूत जुटा लिए। मामला लाखों का नहीं करोड़ों का निकला। बीस हजार की सैलरी वाले तीन साल में करोड़पति बन चुके थे। सबकी प्रॉपर्टी, आय और व्यय का पूरा चिट्ठा तैयार।
चंपत चैप्टर 5
SIT टीम के तीन अफसर राम मंदिर में घुसते हैं। सबसे पहले चंपत ही दनदनाते हुए पेश होते हैं। धमकाने वाले अंदाज़ में कहते हैं, सबसे पहले मुझसे ही पूछताछ कीजिए। अधिकारी पूरा धैर्य रखते हैं। लखनऊ से आदेश था- संपूर्ण सत्य और सारे सबूत एकत्र करके लाइए। किसी को भी छोड़ने की जरूरत नहीं है। पूछताछ के दौरान एक दो बार चंपत अफ़सरों को और धमकाते हैं। ऊपर तक शिकायत कर देंगे। नाम भी ले लेते हैं। लेकिन अफसर डिगते नहीं हैं। राम मंदिर में रहते हुए ही सारे चोर, सिपाही, अकाउंटेंट, बैंक कर्मचारी सबसे पूछताछ होती है। सीसीटीवी फ़ुटेज से मिलान होता है। साफ-साफ दिखता है चढ़ावा का पैसा लेकर चोर निकल रहे हैं, कोई रोक नहीं रहा है। कोई जांच नहीं। और वही पैसा दो तीन दिन बाद बैंक में जमा हो जाता है। नोट गिनने वाले से लेकर गड्डी बनाने वाले, वाउचर बनाने वाले से लेकर गाड़ी में लोड करने वाले सब मिले हुए थे। एक संगठित गिरोह की तरह काम हो रहा था।
चंपत चैप्टर 6
अयोध्या से SIT टीम लखनऊ लौटी। ऊपर से सख्त आदेश एक शब्द भी लीक नहीं होना चाहिए। मेन IAS अफसर ने अपने स्टाफ़ तक पर भरोसा नहीं किया। उन्हें हिंदी टाइपिंग नहीं आती थी। ऐसा Font डाउनलोड किया जिसमें रोमन में टाइप किया जाए तो हिंदी में आ जाए। एक मुलाक़ात हो चुकी थी। मौखिक तौर पर ऑर्डर था, ना किसी को बचाना है, ना कुछ छिपाना है। जो लिखें साक्ष्य जरूर हो। रिपोर्ट का एक एक शब्द दिल्ली पहुँचेगा। लखनऊ और दिल्ली तक रिपोर्ट शेयर हुई। चंपत राय इसी रिपोर्ट में फंसे। जांच में चंपत को लापरवाही बरतने, अव्यवस्था फैलाने, संरक्षण देने, मंदिर में एंट्री करवाने, चोरी पता चल जाने के बाद भी FIR ना लिखवाने की ज़िद करने जैसी बातों का ज़िम्मेदार ठहराया गया। अब प्रेशर चंपत पर था। लेकिन चंपत पहले कॉल पर इस्तीफ़ा देने के लिए तैयार ही नहीं हुए।
चंपत चैप्टर 7
चंपत जी ने किस तरह लापरवाही की, ये किस्सा अब तक नृपेंद्र मिश्रा बता चुके थे। वो लगातार दिल्ली में सबसे पावरफुल दफ़्तर के मिश्रा जी के संपर्क में थे। दिल्ली से कहा गया – इस्तीफ़ा देना होगा। इस्तीफ़ा लेने का काम संघ पर छोड़ा गया। चंपत जी इस वक्त संघ के प्रचारक हैं और उन्हें विश्व हिंदू परिषद में भेजा गया है। तो उनके बॉस आलोक कुमार हुए। नृपेंद्रजी का रोल अब खत्म। उन्हें चुप रहना था। हरिद्वार में विहिप की केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल की दो दिन बैठक हुई। चंपत के पास बचने का आखिरी रास्ता भी खत्म। नागपुर की तरफ से डायरेक्ट ऑर्डर आ चुका था। विहिप ने चंपत को कह दिया इस्तीफ़ा दे दीजिए। इस्तीफ़ा करवाने के लिए विहिप के महासचिव खुद अयोध्या गए। दो और प्रचारक को साथ भेजा गया। एक एक कर मंदिर की पूरी व्यवस्था से चंपत को अलग किया गया। एक फ़ॉर्मूला तैयार हुआ। राम मंदिर परिसर में शेषावतार मंदिर के ध्वजारोहण समारोह में चंपत राय को मंच का संचालन करने दिया गया। 23 जून को ये संपन्न हुआ, उसी शाम चंपत की विदाई तय थी। लेकिन चंपत पूरी जांच तक रुकना चाहते थे। अब बारी विहिप अध्यक्ष आलोक कुमार की तरफ से सख्ती की थी।
चंपत चैप्टर 8
24 जून शाम चार बजकर नौ मिनट। यहां से चंपत राय का खराब वक्त शुरू हुआ। चंपत को दिया अल्टीमेटम खत्म हुआ। इस्तीफ़े की उल्टी गिनती शुरू हुई। पहली बार संघ परिवार के अंदर से किसी ने चंपत को खुलेआम धमकाया। विहिप के हेड को नागपुर से कहा गया – चार प्वाइंट अपनी बात लिखकर सार्वजनिक कर दीजिए। जल्द FIR होगी। किसी को बख़्शा नहीं जाएगा। ये रात चंपत राय के लिए सबसे मुश्किल रात थी। दिल्ली और नागपुर दोनों तरफ से संपर्क कट चुका था। एक सफ़ेद काग़ज़ पर इस्तीफ़े का मसौदा तैयार था। इस पर उन्हें दस्तखत करना था। लेकिन चंपत भी कम नहीं थे। उन्होंने अपना इकोसिस्टम एक्टिव किया। अगले 24 घंटे में चंपत के लोग उन्हें महान बताने की कोशिश करते दिखे। लेकिन ऊपरवालों का मूड नहीं बदला। लखनऊ से संपर्क साधने की आखिरी कोशिश और जवाब मिला ‘महाराज जी अपने फैसले पर अडिग हैं’।
चंपत चैप्टर 9
25 जून सुबह नौ से दस के बीच। चंपत राय को दो टूक बता दिया गया। आज FIR हो रही है। जिनके पास से चढ़ावा बरामद हुआ है उनके नाम FIR में लिखें जाएंगे। राम मंदिर के बंद कमरे का दरवाज़ा खोलकर पुलिस सात आरोपियों को अपने साथ ले गई। चंपत का ‘प्रिय’ टिन्नू बस पकड़ से बाहर था, उसकी लोकेशन भी शाम तक आ चुकी थी। पुलिस ने आठ बजते बजते उसे भी दबोच लिया। अब चंपत राय डर गए। इस्तीफ़ा या जेल? दो में से एक को चुनना था। अयोध्या में मौजूद प्रचारक ने चंपत को बता दिया था, अगर खुद नहीं हटे तो ट्रस्ट एक प्रेस विज्ञप्ति जारी करेगा और उन्हें हटाने की घोषणा करेगा। अगले दिन सुबह दस बजे। चंपत इस्तीफ़ा देने के लिए तैयार हो गए। शर्त SIT की फाइनल रिपोर्ट आने तक उन्हें दोषमुक्त माना जाए। वो ट्रस्ट के अध्यक्ष को इस्तीफ़ा सौंपना चाहते थे। लेकिन केस को अब कोषाध्यक्ष के पास ट्रांसफ़र किया गया। स्वामी गोविंद गिरी जी महाराज की एंट्री हुई।
चंपत चैप्टर 10
27 जून सुबह करीब आठ बजे के बाद। नागपुर के आखिरी प्रयास से चंपत राय टूट गए। गोविंद गिरी जी को प्रेस विज्ञप्ति जारी करने का इशारा दे दिया गया। दिल्ली से चिट्ठी क्लियर हुई और दोपहर एक बजे के करीब पुणे पहुंच गई। चंपत को ट्रस्ट से हटाकर गेस्ट हाउस में शिफ्ट कर दिया गया। अगले कुछ हफ़्ते एकदम चुप रहने की सलाह दी गई है। चंपत फ़िलहाल जांच में सहयोग करेंगे और अपनी अगली पोस्टिंग की प्रतीक्षा करेंगे। अगर गड़बड़ करेंगे तो भरेंगे। मिश्रा जी पर बड़ी खबर का इंतज़ार कीजिए। एक बड़ी गिरफ़्तारी होने वाली है।
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