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उत्तर प्रदेश

पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ दर्ज चौथी FIR में आरोप क्या क्या लगे हैं? पढ़ें

लखनऊ। पत्रकार अभिषेक उपाध्याय के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की कॉपी सामने आई है। इसमें उन पर सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए ऐसी सामग्री प्रसारित करने का आरोप लगाया गया है, जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित होने, समुदायों के बीच वैमनस्य बढ़ने और कानून-व्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है।

एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि अभिषेक उपाध्याय के चैनल ‘टॉप सीक्रेट’ पर कई ऐसी सामग्री प्रसारित की गई, जिन्हें शिकायतकर्ता ने आपत्तिजनक बताया है। दस्तावेज में विभिन्न तारीखों और पोस्ट/वीडियो का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि इनमें एक विशेष समुदाय और जाति को लेकर टिप्पणियां की गईं।

दस्तावेज में 7 अप्रैल 2026, 26 मार्च 2026, 14 मार्च 2026, 10 मार्च 2026, 7 मार्च 2026, 24 फरवरी 2026, 19 फरवरी 2026, 9 फरवरी 2026 और 24 मार्च 2026 समेत अलग-अलग तारीखों पर प्रसारित सामग्री का उल्लेख किया गया है। शिकायत में इन पोस्ट और वीडियो को सामाजिक तनाव तथा समुदायों के बीच विभाजन बढ़ाने वाला बताया गया है।

एफआईआर में यह भी आरोप लगाया गया है कि चेतावनी और कानूनी नोटिस मिलने के बावजूद कथित रूप से आपत्तिजनक सामग्री का प्रसारण जारी रखा गया। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि इससे आरोपी के ‘दुर्भावनापूर्ण इरादे’ (Mens Rea) का संकेत मिलता है।

दर्ज दस्तावेज में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धाराओं 192, 196, 299, 353, 356 और 352 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। एफआईआर में प्रेस काउंसिल एक्ट, 1978 के प्रावधानों तथा पत्रकारिता के मानकों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया गया है।

शिकायत में पुलिस से आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर निष्पक्ष जांच, सोशल मीडिया अकाउंट और चैनल से आपत्तिजनक सामग्री हटाने तथा संबंधित अकाउंट बंद करने की मांग की गई है। साथ ही भविष्य में ऐसे अकाउंट बनाने से रोकने और कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग भी की गई है।

दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत पूर्ण अधिकार नहीं है और अनुच्छेद 19(2) के तहत उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

एफआईआर की कॉपी के अनुसार, शिकायतकर्ता सौरभ सिंह, अधिवक्ता, की ओर से यह शिकायत दी गई है। मामले में पुलिस की जांच के बाद ही आरोपों की पुष्टि और आगे की कानूनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।


NCRB First Information Report (FIR) form page with bilingual Hindi-English headings, FIR No. 0133, date 27/06/2026, district Noted, and table of offences with section numbers 196(1)(a), 299, 352.
Page from an NCRB Inquest Report form showing the header 'N.C.R.B' and 'Inquest Report / U.D. case No., if any' with a blank UIDB Number field, and a Hindi 'First Information contents' section containing dense paragraphs of text (page 4).
Page 5 from an NCRB document in Hindi, dense formal report text under the header, with a long paragraph of content.

ये रही चढ़ावा चोरी से घबराई सरकार की लखनऊ की हजरतगंज कोतवाली में मेरे खिलाफ दर्ज की गई चौथी एफआईआर।
27 जून 2026 को BNS के सेक्शन 196 (1) (a), 299, 352 के तहत दर्ज की गई इस एफआईआर को छुपाकर रखा गया था।
पोर्टल पर अपलोड तक नहीं किया गया। मेरे मांगने पर भी हजरतगंज कोतवाली ने देने से इंकार कर दिया।
योगी जी, अगर एफआईआर करना ही था तो खुलकर चढ़ावा चोरी की ख़बर से आहत हुई भावना के नाम पर कर लेते।
ये लखनऊ पुलिस को अचानक से आप पर लगे ठाकुरवाद के आरोपों का मुद्दा क्यूं चुभ गया?
इस पर तो पहले से ही एक एफआईआर (नंबर 0265/2024) मेरे खिलाफ इसी हजरतगंज कोतवाली में इन्हीं इंस्पेक्टर विक्रम सिंह के दौर में दर्ज है।
सवाल है कि आखिर लखनऊ पुलिस योगी आदित्यनाथ पर चिपक चुके ठाकुरवाद के आरोपों के लिए सारे मुकदमे मेरे ही खिलाफ क्यों दर्ज करेगी?
अगर मुकदमा दर्ज करना ही है तो आप देश भर की मीडिया पर कीजिए, जिसने योगी आदित्यनाथ के 9 साल के कार्यकाल में ठाकुरवाद की इंतिहा को एक नहीं बल्कि बार-बार रिपोर्ट किया है और उनका नाम ले लेकर किया है।
कुछ उदाहरण यहां लिखे देता हूँ ताकि पूर्व कमिश्नर अमरेंद्र सिंह सेंगर जो अब डीजी इंटेलीजेंस हो चुके हैं, और पिछले करीब 3 सालों से लखनऊ की हजरत गंज कोतवाली में जमे इंस्पेक्टर विक्रम सिंह इस एफआईआर में कुछ नाम और जोड़ सकें।
1- यूपी में योगी पर क्यों लग रहे ‘ठाकुरवाद’ के आरोप? (Source- The Print- September 2019)
2- सपा के ‘यादववाद’ से लड़ते-लड़ते ‘ठाकुरवाद’ में फंसकर रह गए योगी! (सोर्स- आजतक मार्च 2018)
3- ठाकुरवाद की राजनीति कर रहे हैं CM योगी आदित्यनाथ। AAP से राज्यसभा सदस्य संजय सिंह का आरोप- (सोर्स- दैनिक जागरण- सितंबर 2020)
4- BJP battles Brahmin outrage – (Frontline article dated 27 July 2026 on growing perception of chief minister Adityanath government dominated by Thakurs)
5- Accusations by Akhilesh of the Yogi government “favouring” Thakurs in police postings. (सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस- अप्रैल 2025)
6- एक योगी का जाति मोह। राजपूतों की पीठ के महंत हैं योगी आदित्यनाथ- (सोर्स दैनिक भास्कर)
7- योगी के हिंदुत्व की अखिलेश ने निकाली काट? यूपी में ठाकुरवाद बनाम PDA की बिछा रहे बिसात (सोर्स टीवी 9 भारतवर्ष- अप्रैल 25)
8- ठाकुरवाद के आरोपों पर योगी की खरी-खरी:केवल राजपूतों की राजनीति के आरोप लगने से मुझे कोई दुख नहीं, भगवान भी इसी जाति के थे। (सोर्स- दैनिक भास्कर )
9-Yogi In Jhansi: ‘क्षत्रिय कुल में पैदा हुआ, गर्व करने में गलत क्या?’ देखें और क्या बोले सीएम योगी (सोर्स-आज तक फरवरी- 2022)
10- ‘यूपी के ब्राह्मण नेतृत्व को योगी सरकार ने चुन-चुनकर मारा’ -रणदीप सुरजेवाला (सोर्स- अमर उजाला- सितंबर 2024)
-अभिषेक उपाध्याय, वरिष्ठ पत्रकार

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