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अखबारों और पत्रिकाओं के पंजीकरण की प्रक्रिया ऑनलाइन हुई, प्रेस सेवा पोर्टल से मिलेंगी सभी प्रमुख सुविधाएं

प्रेस सेवा पोर्टल से बदली प्रिंट मीडिया के पंजीकरण की व्यवस्था, आवेदन से लेकर सालाना विवरण तक की प्रक्रिया डिजिटल

Header with Indian emblem on the left, colorful four-petal logo on the right, large 'PRGI' letters, and the titles 'PRESS REGISTRAR GENERAL OF INDIA' with Hindi heading above and below.

नई दिल्ली। अखबारों और पत्रिकाओं के पंजीकरण से जुड़ी प्रक्रिया में बड़ा बदलाव हुआ है। अब नए प्रकाशन का पंजीकरण कराने, पुराने पंजीकरण में संशोधन, मालिकाना हक हस्तांतरित करने और सालाना विवरण जमा करने जैसी प्रमुख प्रक्रियाएं ऑनलाइन हो गई हैं। इसके लिए सरकार ने प्रेस सेवा पोर्टल को एकीकृत डिजिटल मंच के रूप में विकसित किया है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 में प्रेस सेवा पोर्टल के जरिए पंजीकरण व्यवस्था में आए बदलावों और इसकी उपयोगिता का उल्लेख किया गया है। नए सिस्टम के तहत प्रकाशक घर बैठे आवेदन कर सकते हैं, जरूरी दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं और आवेदन की स्थिति भी देख सकते हैं।

पुराने कानून की जगह लागू हुआ नया अधिनियम

प्रेस एवं पत्र-पत्रिका पंजीकरण अधिनियम, 2023 (PRP Act) एक मार्च 2024 से लागू हुआ। इसने 1867 के पुराने प्रेस एवं पुस्तक पंजीकरण अधिनियम की जगह ली। नए कानून के तहत अखबारों और पत्रिकाओं के शीर्षक सत्यापन, पंजीकरण और अन्य संबंधित प्रक्रियाओं को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा गया है।

नए कानून के बाद रजिस्ट्रार ऑफ न्यूजपेपर्स फॉर इंडिया (RNI) का नाम बदलकर प्रेस रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (PRGI) कर दिया गया। अब इसी संस्था के माध्यम से देश में प्रकाशित अखबारों और पत्रिकाओं का पंजीकरण, रिकॉर्ड का रखरखाव और सालाना विवरण की निगरानी की जाती है।

जिला मजिस्ट्रेट भी ऑनलाइन करेंगे सत्यापन

नई व्यवस्था में जिला स्तर पर दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया को भी ऑनलाइन किया गया है। जिला मजिस्ट्रेट दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन कर उन्हें सीधे प्रेस रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया को भेज सकते हैं।

इससे आवेदन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाने और अनावश्यक देरी कम करने का प्रयास किया गया है। आधार आधारित ई-सिग्नेचर की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।

1.60 लाख से अधिक प्रकाशन पंजीकृत

मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, 31 दिसंबर 2025 तक प्रेस रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया के पास कुल 1,60,315 पत्र-पत्रिकाएं पंजीकृत थीं। वर्ष 2025 के दौरान 6,013 नए प्रकाशनों का पंजीकरण किया गया।

वहीं, लगातार दस या उससे अधिक वर्षों तक सालाना विवरण जमा नहीं करने वाले बंद पड़े प्रकाशनों के 88,316 शीर्षकों का पंजीकरण रद्द किया जा चुका था।

हर साल 31 मई तक देना होगा सालाना विवरण

नए कानून के तहत प्रत्येक पंजीकृत अखबार और पत्रिका के प्रकाशक को हर साल अपना सालाना विवरण जमा करना अनिवार्य है। अधिनियम की धारा 12(1) के अनुसार, यह विवरण प्रत्येक वर्ष 31 मई तक प्रेस रजिस्ट्रार जनरल को देना होता है।

विशेष परिस्थितियों में, जब प्रकाशक के नियंत्रण से बाहर की वजहों से समय पर विवरण जमा करना संभव न हो, तो पहले से अनुमति लेकर अतिरिक्त समय मांगा जा सकता है। हालांकि, यह समयसीमा उसी कैलेंडर वर्ष की 31 दिसंबर से आगे नहीं बढ़ सकती।

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 के लिए वर्ष 2025 में कुल 39,345 प्रकाशनों ने अपना सालाना विवरण जमा किया था।

प्रसार संख्या की जांच भी पोर्टल के जरिए

प्रेस सेवा पोर्टल के माध्यम से अखबारों और पत्रिकाओं की प्रसार संख्या यानी सर्कुलेशन वेरिफिकेशन की प्रक्रिया भी संचालित की जा रही है। इसमें प्रकाशकों की ओर से दी गई प्रसार संख्या की जांच की जाती है।

मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 तक वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 से संबंधित प्रसार संख्या सत्यापन के लिए कुल 564 आवेदन मिले थे। इनमें वित्त वर्ष 2023-24 के सभी 278 आवेदनों की प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी। दोनों वित्त वर्षों को मिलाकर कुल 349 सर्कुलेशन सर्टिफिकेट जारी किए गए थे।

न्यूजप्रिंट आयात के लिए भी उपयोग

प्रेस सेवा पोर्टल का इस्तेमाल केवल पंजीकरण और सालाना विवरण तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से पंजीकृत प्रकाशनों के प्रकाशकों की ओर से न्यूजप्रिंट आयात के लिए जमा किए गए स्व-घोषणा पत्रों को भी प्रमाणित किया जाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2025 के दौरान प्रेस रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया ने न्यूजप्रिंट आयात के लिए 763 स्व-घोषणा पत्रों को प्रमाणित किया।

कुल मिलाकर, प्रेस सेवा पोर्टल ने अखबारों और पत्रिकाओं के पंजीकरण की पुरानी कागजी व्यवस्था को डिजिटल प्रक्रिया में बदल दिया है। आवेदन, दस्तावेजों का सत्यापन, सालाना विवरण और प्रसार संख्या की जांच जैसी प्रमुख सेवाओं को एक ही मंच पर लाने से प्रकाशकों के लिए प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक और पारदर्शी बनाने का प्रयास किया गया है।

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