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सुख-दुख

हर समस्या के लिए पब्लिक को जिम्मेदार ठहराने वाले इस हरामखोर मिडिल क्लास को पहचानिए!

तारा शंकर

Tara Shanker : 21 दिन का लॉक डाउन सुनते ही लोग राशन की दुकानों पर टूट पड़ें हैं! कौन हैं ये लोग? ग़रीब-मजदूर और लोअर क्लास ही अधिकतर होंगे! क्योंकि बेशर्म-बेगैरत-हरामखोर मिडिल और अपर क्लास अपना राशन अपने उपभोग सीमा से अधिक हफ्ते भर पहले ही घर में ठूंस चुका होगा! इतना कि ऑनलाइन स्टोर खुले तो हैं लेकिन अधिकांश सामान आउट ऑफ़ स्टॉक हो चुके हैं!

अब राशन/किराना दुकानों पर उमड़ी इस भीड़ को यही मिडिल और अपर क्लास अपने घर में आराम से बैठकर टीवी देखते हुए गाली देगा, मूर्ख कहेगा, देश के लिए खतरा कहेगा, पुलिस से पिटवाने तक की हिदायत देगा…! लेकिन मजाल है कि इसके मुँह से बदइन्तज़ामी पर कोई सवाल उठ जाये या संवेदना के दो बोल निकल जाएँ!

एक ऐसा हरामखोर मिडिल क्लास इस देश में तैयार हो गया है जो देश की हर समस्या के लिए सरकार से सवाल पूछने के बजाय पब्लिक को ही दोषी ठहराता है जिसमें वो ख़ुद भी शामिल होता है या दो चार की संख्या में सरकार से सवाल पूछने वाले लोगों को गाली देने लगता है! देश के करोड़ों ग़रीबों के लिए इनकी संवेदना इतनी निर्मम हो चुकी है कि वो उनको पुलिस द्वारा पिटते देख खुश होता है, ख़ुद घर में राशन लाकर भर लिया है लेकिन जिनको रोज़ कमाना, रोज़ ख़रीदना होता है उनके लिए लॉक-डाउन को किसी भी क्रूरता तक जाकर सपोर्ट कर रहा है!

कुछ कह रहे हैं कि जो बाहर दिखे उसे गोली मार दो, कुछ उनकी पुलिस से ढंग से सुताई करवाना चाहते हैं! इनको बीमार, बुजुर्ग, ग़रीब, मजदूर दिखता ही नहीं! इनको बस इनसे ही मतलब है! कोरोना ने इन्हें अन्दर तक इतना डरा दिया है फिर भी इस क्लास का गुस्सा सरकार द्वारा शुरू में की गयी लापरवाही पर उतरने के बजाय या अब की जा रही बदइन्तज़ामी पर सवाल करने के बजाय………😠

सरकार से ज़्यादा क्रूर तो ये मिडिल क्लास हो चला है जो मॉब लिंचिंग तक कर गुजरने की हद तक असंवेदनशील हो चुका है! तमाम कंपनियाँ, फैक्ट्रियाँ तो आज जाकर बंद हुई हैं! देश में लाखों की संख्या में दिहाड़ी मजदूर और निम्न आय वाले लोग फँसे हुए हैं! घर नहीं जा पा रहे हैं! आनंद विहार टर्मिनल के पास कई मजदूरपिछले दो तीन दिनों से घर जाने के लिए भटक रहे हैं, बिलख रहे हैं. कोई गाड़ी नहीं, कोई ठिकाना नहीं….उफ़ :'(

अपर क्लास तो पहले से ही दर हरामखोर है!

लॉक डाउन का पालन करें! आलोचना तो बदइन्तज़ामी की है!

युवा विश्लेषक और शोधार्थी तारा शंकर की एफबी वॉल से.

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6 Comments

6 Comments

  1. Bhavi menaria

    March 25, 2020 at 3:49 pm

    Isse to ye lag raha he ki aap kisi purvagrah se pidit he. Achhi baat he ki aapne socha aapka vishleshan bhi achha he lekin aapki bhasha study kar sab samajh aa gaya

    • Sudhanshu sengar

      March 26, 2020 at 2:43 pm

      Isko modi ji lock down karne se pahle batate to ye rashan , medicine aur jaruri saman bhar leta,
      Aur tb tk korona unhi aadhe gareebo, majdooron, barojgaron ki gaand mar chuka hota,
      Bhai koi ise samjhayega
      Ye virus hai tera rishtedar nahi, ji taiyari krne ka mauka de

  2. ambrish

    March 25, 2020 at 6:02 pm

    मिडिल क्लास को हर ज्यादती झेलने और अपनी जान अपने परिवार की सोच की सीमा में बांधने में यह सरकार सफल रही है, भाई नोट बंदी के बाद से लगातार अभ्यास करा रहे और पुलिसिया जुल्म के मंजर दिखा दिखा के माजूर कर दिया, रीढ़ की हड्डी में लचक पैदा करा दी।

  3. Bharat goyal

    March 25, 2020 at 7:37 pm

    जिस व्यक्ति ने भी यह पोस्ट लिखी है उसकी मानसिकता कितनी खराब होगी यह इसके शीर्षक से ही पता चल रहा है। हर बात के लिए जिस तरह ये हरामखोर मिडिल क्लास को दोष दे रहा है उससे तो लगता है इसे जरूर हराम का खाने की आदत होगी। अबे जब वो ही गरीब आदमी रोज शाम को पव्वे चढ़ा कर घर पहुंचता है और बीवी बच्चों को पीटता है उस समय ये जरूरत पूरी करने की फिक्र कहाँ घुस जाती है उसकी।

  4. Jitender

    March 26, 2020 at 3:21 am

    Bhosdi ke madharchod likhane pahle soch liya hota itli aur china ke bare me bhosdi ke tere jaise hi desh ko barbaad kar rahe hai agar kal in sabko ho jayega to teri maa aayegi bachane tab to apne baap ke bil me chup jayega

  5. U k Khare

    March 26, 2020 at 1:26 pm

    ये मानसिकता ग्रस्त लोग हैं जो खुद हराम की खाते हैं और मिडिल क्लास को हराम बोल रहे हैं। इन्हीं मिडिल क्लास के टैक्स से ये 2 रुपए किलो चावल, गेहूं व अन्य राशन का उपयोग करते हैं। इन्हीं के टैक्स से इन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, घर फ्री मिलता है।

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