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कोरोना काल में जिंदा हुआ हर्षद मेहता!

अश्विनी कुमार श्रीवास्तव

रिस्क है तो इश्क है… 1992 में भारत के शेयर बाजार का सबसे बड़ा घोटाला करने वाले हर्षद मेहता के किरदार पर बनी एक वेब सीरीज ने 2020-21 में एक बार फिर उस दौर में हुए शेयर बाजार घोटाले की याद ताजा कर दी है…. लेकिन उसी दौर की एक और अहम कड़ी है, जिसने फिर से न सिर्फ उसी दौर की याद दिलानी शुरू कर दी है…बल्कि यह आशंका भी पैदा कर दी है कि कहीं शेयर बाजार में फिर कोई बड़ा घोटाला तो नहीं चल रहा !!!

अप्रैल 1992 में जब शेयर बाजार ऐतिहासिक ऊंचाइयों की उड़ान भर रहा था तो उस वक्त BSE का प्राइस टू अर्निंग रेश्यो यानी पी ई रेश्यो 30 के ऊपर ऐतिहासिक ऊंचाई पर पहुंच गया था …. फिर घोटाला उजागर होने के बाद 1994 तक यह गिरने लगा.

जिन्हें नहीं पता कि पी ई रेश्यो क्या है, उन्हें सरल भाषा में समझा देता हूं कि किसी शेयर की वास्तविक कीमत से कितना पैसा ज्यादा देने के लिए लोग तैयार हैं. मसलन किसी कम्पनी के 100 रुपए के शेयर का पी ई रेश्यो अगर 25 है तो इसका अर्थ है कि उसके एक शेयर के लिए लोग 125 रुपए देने को तैयार हैं. इसी तरह शेयर बाजार का पी ई रेश्यो यह बताता है कि उसमें लिस्टेड स्टॉक के एक शेयर के लिए लोग कितना प्रीमियम यानी ज्यादा पैसा देने को तैयार हैं.
आमतौर पर पी ई रेश्यो 20-22 या उससे थोड़ा ज्यादा या फिर इससे भी कम हुआ करता है….

मगर कुछ ही अरसे में यह इतनी ऊंचाई पर कैसे पहुंच गया , इसका राज तब खुला , जब हर्षद मेहता का घोटाला अप्रैल 1992 में उजागर हो गया. यह तो सभी को पता है कि मेहता ने बड़े पैमाने पर बैंकों का पैसा शेयर मार्केट में पम्प करके शेयर बाजार में लगातार तेजी का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बना दिया था. जाहिर है, पी ई रेश्यो तो बढ़ना ही था.

अब 1992-94 के बाद सीधे 2020 के कोरोना काल में आइए. मार्च में जब स्टॉक मार्केट कोरोना के डर से धूल चाटने लगा तो निफ्टी का पी ई रेश्यो जनवरी के 27-28 से गिरकर 20 और उसके आसपास मंडराने लगा. ऐसा होना लाजिमी भी था क्योंकि लॉक डाउन ने पहले से ही ध्वस्त अर्थव्यवस्था को कोमा में पहुंचा दिया था.

ऐसे में पी ई रेश्यो और शेयर बाजार और गिरता तो किसी को आश्चर्य नहीं होता लेकिन चौंकाने वाली बात तो यह हुई कि लॉक डाउन खत्म होने से पहले ही मई-जून में पी ई रेश्यो और शेयर बाजार ने ऐसी रफ्तार पकड़ ली कि दोनों अब रुकने का नाम ही नहीं ले रहे हैं.

पांच जनवरी को जब शेयर बाजार बंद हुआ तो 14200 के करीब बंद हुए निफ्टी का पी ई रेश्यो 40 के करीब पहुंच गया है और 48 हजार लांघ कर सेंसेक्स का पी ई रेश्यो फिर हर्षद मेहता के दौर की तरह 30 का आंकड़ा लांघ कर 33-34 पहुंच गया है.

ये आंकड़े कुछ कुछ वैसे ही हैं, जैसे हर्षद मेहता के दौर में शेयर बाजार पेश कर रहा था. आज ही की तरह उस वक्त भी लोग इसी तरह हैरान थे कि आखिर कम्पनियों के शेयर उन कंपनियों की आर्थिक हालात से कई गुना बेहतर कीमत पर कैसे पहुंच गए हैं?

हालांकि पी ई रेश्यो ने मेहता के दौर के बाद एक बार और 30 तक पहुंचने की नाकाम कोशिश की 2007 में भी की थी लेकिन तब 2008 में मंदी ने उसे 25-26 से सीधे पटककर 10 तक के आंकड़े पर गिरा दिया था.

बहरहाल, कुछ दिनों से भारत के शेयर बाजार में आ रही रिकॉर्ड तोड़ तेजी, जिसे कई विशेषज्ञ बुलबुला बता भी रहे हैं, उसी पर लिखने के क्रम में मैंने यह अहम आंकड़ा देकर यह समझाने की कोशिश की है कि आखिर शेयर बाजार पर शंका करने की तार्किक और वैज्ञानिक वजहें क्या है…. इस पोस्ट के साथ मैं एक चार्ट भी शेयर कर रहा हूं, जिसको देखकर आप समझ जाएंगे कि मेहता के दौर जैसी ऊंचाइयों पर आ रहा पी ई बता रहा है कि दाल में कुछ तो काला है….

आसमान छूता शेयर बाजार होगा बजट से पहले धड़ाम !!!

फ़रवरी के पहले दिन देश का बजट पेश किया जाना है. बजट पर अपनी खुशी या गम जाहिर करने के लिए शेयर बाजार भी उसी दिन या उसी दिन से कुछ दिनों तक एक ही दिशा में छलांग मारने लगता है. अगर शेयर बाजार को बजट पसंद नहीं आया तो जाहिर है, कोई बड़ी या ठीक ठाक गिरावट से वह अपनी नाराज़गी जाहिर कर देगा. यदि उसे बजट भा गया तो खुशी से उछलते हुए ऊपर बड़ी दूरी तय कर सकता है….

लिहाजा यक्ष प्रश्न अब यह है कि शेयर बाजार, जो इस वक्त रिकॉर्ड तोड़ ऊंचाई और बुलबुले की तरह रिकॉर्ड तोड़ पी ई स्तर पर पहले ही बैठा है, वह क्या गिरने के लिए बजट का ही इंतजार कर रहा है? क्या उसे पहले से पता है कि बजट इस बार उद्योग जगत के लिए बढ़िया नहीं होगा इसलिए करेक्शन के लिए वह बजट का ही इंतजार कर रहा है?

क्योंकि यदि ऐसा नहीं हुआ और कहीं उसे बजट भा गया तो यह जिस ऊंचाई पर पहुंच जाएगा और जिस पी ई रेश्यो पर यह तब होगा, वह भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर के शेयर बाजारों के लिए चौंकाने वाली बात हो जाएगी.

यानी यह अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है कि इसी जनवरी में किसी भी दिन शेयर बाजार में हजार प्वाइंट से ऊपर की गिरावट की पूरी संभावना बन रही है. बाजार की भाषा में इसे करेक्शन कहा जाता है. जब भी बाजार तेजी की दौड़ लगाते हुए अपनी वास्तविक क्षमता से कहीं आगे अर्थात overbought जोन में आकर सामान्य पी ई रेश्यो से डेढ़-दो गुना आगे बढ़ जाता है तो बाजार बड़ी गिरावट या कुछ दिन नीचे की चाल चलकर सहज स्थिति में पहुंच जाता है.

यदि फरवरी के पहले दिन बजट पेश होने से पहले यानी जनवरी में ही इसने बड़ी गिरावट नहीं दिखाई और इसी तरह भागता रहा तो बजट वाले दिन फिर बजट चाहे जैसा हो, यह गिरकर ही खुद को सामान्य स्थिति में लाने को विवश हो सकता है.

जाहिर है, ऐसा प्रैक्टिकली संभव नहीं लग रहा इसलिए इस बात की आशंका काफी ज्यादा है कि बाजार में गिरावट इस महीने के आखिर से पहले यानी जनवरी के दूसरे अथवा तीसरे हफ्ते में हो सकती है …

बहरहाल, अब बजट आने तक या उसके बाद ही यह साफ हो पाएगा कि बाजार में कोई बड़ी गिरावट होती भी है या नहीं… वैसे भी बाजार की चाल की सटीक भविष्यवाणी कर पाना किसी के बूते की बात नहीं होती. इसलिए मेरी इस पोस्ट को भविष्यवाणी न मानकर आंकड़ों पर आधारित एक अनुमान ही माना जाए…

लेखक अश्विनी कुमार आर्थिक पत्रकार रहे हैं. इन दिनों लखनऊ में उद्यमी के बतौर सक्रिय हैं.

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