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(पार्ट-3) अमर उजाला की कोई यूनिट स्‍वतंत्र या अलग नहीं

शशिकांत सिंह-

(पार्ट-3) यहां अमर उजाला प्रबंधन की इस चाल को भी समझना होगा, जिसके तहत अमर उजाला अपनी विभिन्‍न ब्रांचों या सेंटरों को अलग यूनिट बताकर उनका श्रेणी निर्धारण गलत तरीके से करता आ रहा है। जबकि सच्‍चाई यह है कि अमर उजाला की कोई भी यूनिट स्‍वतंत्र या अलग नहीं है। विभिन्‍न जगहों पर मौजूद प्रिटिंग एंड पब्‍लिकेशन सेंटर असल में अमर उजाला लिमिटेड की ब्रांचेज हैं, जो एक दूसरे के साथ जुड़ी हुई हैं। यह बात इस समझौते के पहले पन्‍ने से ही साबित होती है, जिसमें अमर उजाला ने अपनी इन तथाकथित यूनिटों को सेंटर ही लिखा है।

ज्ञात रहे कि इन प्रिंटिंग एवं पब्‍लिशिंग सेंटरों के लिए एक ही पैन नंबर इस्‍तेमाल होता है और सबकी एक ही बैलेंसशीट बनाकर रजिस्‍ट्रार ऑफ कंपनीज में दी जाती है। इतना ही नहीं प्रबंधन में फंक्‍शनल इंटिग्रेटी एंड कॉमन कंट्रोल है। कर्मचारियों को एक ब्रांच/सेंटर/कार्यालय से दूसरी ब्रांच/सेंटर/कार्यालय में ट्रांस्‍फर किया जाता है, पीएफ एक ही जगह यानि आगरा (पहले बरेली) में काटा जाता है। आरएनआई में पंजीकरण के दौरान अमर उजाला लिमिटेड (पहले अमर उजाला पब्‍लिकेशंस लिमिटेड) ही समाचारपत्र के विभिन्‍न प्रकाशन केंद्रों का स्‍वामी है। ऐसे में अमर उजाला अपनी ब्रांचों (जिन्‍हें आम बोलचाल में यूनिट कहा जाता है) को स्‍वतंत्र यूनिट दिखा कर अपनी श्रेणी निर्धारण में घपला करता आ रहा है, जो किसी भी कोर्ट में नहीं टिक पाएगा। साथ ही यह श्रमजीवी पत्रकार अधिनयम, 1955 की धारा 2डी का उल्‍लंघन कर रहा है।

कर्मचारियों की कैटेगरी का निर्धारण:

इस तथाकथित एवं अवैध समझौते में अमर उजाला प्रबंधन ने श्रमजीवी पत्रकारों और गैर पत्रकार कर्मचारियों की श्रेणियां भी मजीठिया वेजबोर्ड के प्रावधानों को दरकिनार करके खुद से ही तय कर दी हैं और अधिकतर पदनाम प्रबंधकीय या सुपरवाइजरी कैपेसिटी में शामिल कर दिए हैं, ताकि वे कर्मचारी के परिभाषा में ना आ पाएं और कोर्ट व श्रम कार्यालयों में विवाद को उलझाया जा सके। इतना ही नहीं इस अवैध वेतनमान में कर्मचारियों का दायरा भी समिति करते हुए अपनी ही परिभाषा गढ़ी गई है, जो मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशों का सीधा-सीधा उल्लंघन है। यह समझौता साफ तौर पर माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय और उच्‍च न्‍यायालयों के उन फैसलों की भी अवमानना करता है, जिनके तहत यह व्‍यवस्‍था दी गई है कि किसी भी कर्मचारी के पदनाम से यह तय नहीं किया जा सकता कि वह प्रबंधकीय या सुपरवाइजरी कैपेसिटी में आता है। इसके लिए संबंधित कर्मचारी का प्रबंधकीय या सुपरवाइजरी कैपेसिटी में काम करना अनिवार्य है। अमर उजाला प्रबंधन द्वारा पहले अधिकतर कर्मचारियों को जारी नियुक्‍ति पत्रों में उनके प्रबंधकीय या सुपरवाइजरी कैपेसिटी में तैनात करने का फर्जी पैराग्राफ डाला और अब यह नई चाल चली गई है।

अमर उजाला प्रबंधन और जेबी मीडियाकर्मी यूनियन के बीच हुए समझौते के सभी कागजात देखें

….जारी….

इसके पहले और बाद के पार्ट पढ़ें-

(पार्ट-1) अमर उजाला ने मजीठिया वेजबोर्ड को खारिज कर पॉकेट यूनियन की मिलीभगत से तैयार किया अपना वेजबोर्ड!

(पार्ट-2) कहां-कहां कर रहा है अमर उजाला सुप्रीम कोर्ट की अवमानना

(पार्ट-4) डीए का फार्मूला दरकिनार, बोनस और ग्रेच्‍युटी में भी खेल

(पार्ट-5) अमर उजाला ने समझौते में अपनी असली नीयत को जाहिर कर दिया है

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