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अजमेर में करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्तियों की खरीद-फरोख्त मामले में दोबारा जांच के आदेश!

30 जून तक जांच रिपोर्ट तलब – नोटरी पब्लिक और स्टांप वेंडर की भूमिका भी होगी जांच के दायरे में

अजमेर में करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्तियों की खरीद-फरोख्त मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने मामले की दोबारा जांच के आदेश देते हुए पुलिस को 30 जून तक जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अब तक की पुलिस और सीआईडी-सीबी जांच से असंतुष्ट परिवादिया प्राची की याचिका पर यह निर्णय लिया गया है।

अदालत ने आदेश में कहा है कि आरोपियों के मोबाइल कॉल डिटेल, चैटिंग, सोशल मीडिया के माध्यम से दस्तावेजों का आदान-प्रदान, और बैंक खातों की विधिसम्मत एवं गहन जांच की जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आए हैं कि कुछ नोटरी पब्लिक और स्टांप वेंडर ने बिना खरीदार की उपस्थिति में दस्तावेजों का नोटराइजेशन एवं विक्रय कर विधि विरुद्ध कार्य किया है। ऐसे में इनकी भूमिका की भी अलग से जांच की जानी चाहिए।

पहले की जांच में कई आरोपी बरी, कुछ के खिलाफ साक्ष्य पाए गए

इस प्रकरण में पहले अलवर गेट थाना, एसपी कार्यालय और सीआईडी सीबी द्वारा जांच की जा चुकी है। 21 नवंबर 2022 को प्रस्तुत पुलिस रिपोर्ट में आरोपियों – प्रकाश रामचंदानी, प्रमोद गुप्ता, जय किशन जादवानी, नीतू टेवानी, मनोज गुरबाणी और मनोज खंडेलवाल – के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं पाया गया और उनकी धारा 169 में रिहाई की अनुशंसा की गई थी।

पिछली जांच रिपोर्टों पर भी सवाल
8 मार्च 2023 को अलवर गेट थाना द्वारा और 30 अप्रैल 2024 को सीआईडी सीबी द्वारा दी गई जांच रिपोर्टों में पहले की जांच के निष्कर्षों को दोहराया गया। इसी आधार पर उच्च न्यायालय ने 31 जुलाई 2024 तक अंतिम जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। अंतिम रिपोर्ट 2 जनवरी 2025 को एसपी भारत राज द्वारा जिला एवं सत्र न्यायालय में प्रस्तुत की गई थी।

चार साल पहले आया था मामला चर्चा में
यह मामला चार साल पहले चर्चा में आया था जब तत्कालीन थाना प्रभारी सुनीता गुर्जर ने पांच भू-कारोबारियों को गिरफ्तार कर इस बड़े नेटवर्क का खुलासा किया था। जांच में नामी-बेनामी संपत्तियों की करीब 150 फाइलें, जमीन, वाहन और दुकानें बरामद की गई थीं। इस मामले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के एक पूर्व वरिष्ठ पदाधिकारी सहित कई प्रभावशाली लोगों के नाम भी सामने आए थे।

परिवादिया प्राची की रिपोर्ट के आधार पर हुई कार्रवाई में पुलिस ने कई अहम सुराग जुटाए थे, लेकिन बाद की जांचों से असंतोष के चलते अब कोर्ट ने इस मामले की तह तक जाकर पुनः जांच करने का निर्देश दिया है। आने वाली 30 जून को अदालत में पेश होने वाली रिपोर्ट पर अब सभी की निगाहें टिकी हैं।

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