अलविदा UP Tak News Tak स्वर्गीय केदारनाथ सिंह से शब्द उधार लूं तो यह जानते हुए कि जाना हिंदी की सबसे खौफनाक क्रिया है… यहां के सफर पर विराम लगाता हूं. बहुत शुक्रिया Milind Khandekar सर और Neeraj Gupta सर. आपके गाइडेंस में काम करना मेरी खुशनसीबी रही.
Brijesh Upadhyay भाई, Vardhan Harsh Diksha Singh Aayush Agarwal Sandeep Kumar सौरभ, सबका शुक्रिया. मेरे लिए बेहद इमोशनल पल है. आप सभी की मेहनत ने Tak क्लस्टर की डिजिटल वेबसाइट्स को खड़ा किया है. आप सभी शानदार करते रहें, मेहनत से डंटे रहें और खूब पढ़ते रहें. बहुत शुभकामनाएं.
Rajat Abhinay चंपे रहना है. Indramohan Kumar सर बिहार Tak का झंडा बुलंद रहे. Rishi Raj शुक्रिया भाई खूब मजा आया आपके साथ.
Kr Abhishek सर आपका शुक्रिया.
शून्य से शिखर का यह सफर चलता रहे, Tak का कारवां बढ़ता रहे. इसी शुभकामना के साथ.
एक क्षण के विराम के बाद आगे अब नई यात्रा पर.
-अमीश राय

आशीष अभिनव-
गूँजते रहेंगे अल्फ़ाज़ मिरे कानों में
तू तो आराम से कह गया खुदा हाफ़िज़!
Ameesh Rai सर का आज ऑफिस में आखिरी दिन था। आप अपने जीवन में बहुत कम ऐसे लोगों से टकराते हैं जिनसे विचारों के साथ साथ कम बातचीत में भी एक आत्मीय लगाव हो जाता है। एक ऐसे सीनियर जिनके सामने हमेशा मुझे भी अदब से पेश आने का मन किया। जब भी कुछ पूछा इनसे तो कीबोर्ड छोड़कर मुस्कुराते हुए मुखातिब होकर अच्छी सलाह दी।
अमीश सर मेरे लिए उन व्यक्तियों में रहे जिनसे सवाल पूछने का भी खूब मन किया। भावुक इंसान हैं। डेमोक्रेटिक तो गज़ब के हैं। ठेठ पूर्वांचली, आधा बिहारी। हमेशा एक सीनियर्स की तरह शानदार केयरिंग नेचर के भी। लेकिन नौकरी की पेशागत मजबूरी कहिए कि ट्रेन की तरह बेहतर सहयात्री भी सिर्फ ट्रेन में ही साथ होते हैं। उन्हें अपने नीयत स्टेशन पर उतरना ही होता है।
मेरे लिए व्यक्तिगत तौर पर एक अच्छे सीनियर की कमी ऑफिस में जरूर खेलेगी। उम्मीद है उनका स्नेह और प्यार आगे भी मिलता रहेगा। सर को भविष्य की ढेरों शुभकामना।
केदारनाथ जी जो पंक्ति जो इन्होंने जाते वक्त कही वो किसी भी भावुक व्यक्ति के व्यवहारिक जीवन में गहरे प्रभाव डालते हैं।
उसने कहा जाओ–
मैंने उत्तर दिया
यह जानते हुए कि
जाना हिंदी की सबसे खौफनाक क्रिया है.
शुभकामनाएं अमीश सर,
मैं आपको दफ्तर में मिस करूंगा, जीवन में नहीं. अब रोज आपकी सीट के बगल में खड़े होकर यह नहीं पूछूंगा कि “क्या चल रहा है?” आप यह नहीं बताएंगे कि “आजकल कौन-सी सीरीज देख रहा हूं?”
खाने की टेबल पर इस बात की चर्चा नहीं होगी कि आपको बिरयानी क्यों पसंद नहीं है? क्या आज भिंडी में फिर से नमक ज्यादा हो गया? कैसे आपके बाबा (कानूनगो साहब) बिना दांत के चने चबाते थे? कैसे बीएचयू में शशिकांत पांडेय और जयदेव पांडेय के साथ दिन कटते थे? नेहरू से लेकर शाहरुख खान तक, और सचिन से लेकर सिलियन मर्फी तक… ये चर्चाएं अब रोज नहीं होंगी.
लेकिन हम मिलते रहेंगे. जब भी मिलेंगे, मैं आपसे यही कहूंगा कि आप शाहरुख खान को ज्यादा तवज्जो देते हैं. और यह जरूर कहूंगा कि आप अभी जवान हैं.शुक्रिया सर, आपसे बहुत कुछ सीखा है और आगे भी सीखता रहूंगा.
-रजत अभिनय


