
संजय कुमार सिंह
अंतिम चरण का मतदान एक जून को है और इस समय अंतिम चरण के चुनाव के लिए प्रचार चल रहा है। आज के अखबारों से लग रहा है कि चुनाव प्रचार का यह अंतिम स्तर ही है। इस स्तर की खबरें कल भी होंगी लेकिन स्तर अब और क्या गिरेगा। मुझे उम्मीद थी कि मीडिया को जब लगेगा कि भाजपा हार रही है तो बेशर्मी थोड़ी कम होगी। पर ऐसा हुआ नहीं है और इसके दोनों मायने हो सकते हैं पर अभी मुद्दा वह नहीं है। यह तो साफ हो गया है कि झूठे प्रचार पर निर्भर अनैतिक और देश के लिए नुकसानेह सरकार का साथ देना मीडिया के बड़े हिस्से ने अभी भी बंद नहीं किया है। जो प्रचारक लगे हैं उनकी सेवा जारी है। आज चुनाव प्रचार से संबंधित दो खबरें महत्वपूर्ण हैं। पहले उनकी चर्चा फिर बाकी खबरें। इन दो खबरों के साथ आज की कुछ और खबरों की चर्चा हो जायेगी। आज इंडियन ए्क्सप्रेस की लीड उड़ीशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के स्वास्थ्य को लेकर प्रधानमंत्री की चिन्ता है। और यह चुनाव प्रचार का प्रधानमंत्री का स्तर है। इससे यह भी लगता है कि प्रधानमंत्री राजनीति में अपने से सीनियर और बहुत ज्यादा अनुभवी को भी अपनी ऐसी चालों से मात दे सकेंगे। यह उनका आत्मविश्वास भी दिखाता है। वे इसकी सफलता की उम्मीद उड़िया या भाषाई मीडिया के समर्थन से कर रहे हों तो अभी मुझे उसका अनुमान नहीं है।
इंडियन एक्सप्रेस की यह खबर आज नवोदय टाइम्स में भी है। इंडियन एक्सप्रेस में इसका फ्लैग शीर्षक है, उड़ीशा में तीन चुनावी रैलियां। मुख्य शीर्षक है, प्रधानमंत्री को नवीन पटनाक के स्वास्थ्य को लेकर साजिश दिखी, मुख्यमंत्री ने कहा कि आप अफवाहों की जांच कराएं। खबर के अनुसार प्रधानमंत्री ने नवीन पटनायक के बिगड़ते स्वास्थ्य को लेकर सवाल उठाये हैं और कहा है कि इसके पीछे पावर लॉबी की साजिश है। उन्होंने कहा है कि राज्य में भाजपा की सरकार बनी तो एक विशेष समिति बनाई जाएगी क्योंकि उड़ीशा की जनता को इस बारे में जानने का अधिकार है। आप जानते हैं कि पटनायक लगातार छठी बार मुख्यमंत्री बनने के लिये दौड़ में हैं और भाजपा की उनकी पार्टी बीजू जनता दल से कड़ी टक्कर है। नवीन पटनायक ने कहा है कि उनका स्वास्थ्य बिल्कुल ठीक है और जांच ही करानी है तो इस बात की कराई जाये कि ऐसी अफवाह के पीछे कौन लोग हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि मौजूदा स्थितियों में और खबरों को पढ़कर लगता है कि अफवाह फैलाने वालों में एक प्रधानमंत्री भी हो सकते हैं। इसे वे चुनाव प्रचार कह सकते हैं।
जहां तक मुख्यमंत्री के स्वास्थ्य की बात है, दिल्ली के मुख्यमंत्री का मामला आप जानते हैं। जेल में उन्हें कई दिनों तक इंसुलिन नहीं दी गई। हंगामा मचा तब जो भ्रम फैलाया गया, झूठ बोला गया उसे छोड़ भी दें तो आप जानते हैं कि चुनाव प्रचार के लिए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें विशेष जमानत दी है। इसपर केंद्रीय गृहमंत्री ने टिप्पणी की और जब उन्होंने इसके विस्तार की अपील की तो फिर राजनीति शुरू हो गयी। उसपर मैं कल लिख चुका हूं। आज खबर है कि उनकी जमानत अवधि नहीं बढ़ेगी। दूसरी ओर, ‘बीमार’ मुख्यमंत्री पर उन्हीं की पार्टी की सांसद ने आरोप लगाये हैं। मामले में भले दम न हो लेकिन सरकार समर्थक मीडिया उसे हाथो हाथ ले रहा है। आज खबर है कि एलजी ने दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज के ओएसडी को सस्पेंड कर दिया है। इससे भड़के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने कहा कि एलजी ने मेरा पूरा ऑफिस खाली कर दिया है। तमाम एडवाइजर, फेलो, कंसलटेंट सभी को एक-एक करके हटा दिया। मेरे जितने भी ओएसडी थे, सेक्रेटरी थे, सबके ऊपर किसी न किसी पुराने मामले में मुकदमा चलाने की कोशिश की जा रही है। मंत्री ने कहा कि कोई भी मामला मेरे कार्यकाल का नहीं है, सभी पुराने मामले में कुछ न कुछ कमी निकाल कर सस्पेंड किया जा रहा है। फिर जांच चलती रहती है।
दूसरी ओर, चुनाव प्रचार के क्रम में प्रधानमंत्री जो सब बोल रहे हैं उससे लग रहा है कि वे भारी मानसिक तनाव में हैं। उनकी स्थिति सामान्य तो नहीं ही लग रही है। प्रधानमंत्री ने कल जो कहा उसपर भी विवाद है और आज यह हिन्दुस्तान टाइम्स में सेकेंड लीड है। शीर्षक के अनुसार, प्रधानमंत्री ने कहा है कि गांधी की विरासत के बारे में लोगों को तब पता चला अब उनपर फिल्म बनी। अखबार की खबर है कि इसपर विवाद हो गया है। अखबारों ने प्रधानमंत्री के इस उच्च विचार को किसी खुलासे या बड़ी खबर की तरह नहीं छापा है। हालांकि यह खबर पहले पन्ने पर है। दूसरी ओर, हिन्दुस्तान टाइम्स में ही आज पहले पन्ने पर चार कॉलम का बॉटम है – छिन्दवाड़ा की चौंकाने वाली घटना में एक व्यक्ति ने परिवार के आठ सदस्यों को मार डाला और फिर आत्महत्या कर ली। मुझे लगता है कि यह खबर पर्याप्त चिन्ता पैदा करने वाली है और उन लोगों पर खास ध्यान रखा जाना चाहिये जो अपने व्यवहार से सामान्य न लगे। और मौका मिलने पर वारदात कर सकते हैं। इस व्यक्ति के बारे में कहा गया है कि इसका मानसिक बीमारी का इतिहास रहा है। कुछ दिनों से यह कुल्हाड़ी लेकर घूम रहा था और उसी कुल्हाड़ी से आठ लोगों को मार डाला।

बनारस में इस फोटो का असर हो या नहीं, कोशिश तो हो ही रही है।
नवोदय टाइम्स में पांच कॉलम का बाटम है, नवीन पटनायक की तबीयत पर गरमाई उड़ीशा की राजनीति। इसके उपशीर्षक का हिस्सा है, भाजपा उनके बारे में अफवाह फैला रही है। अखबार ने नरेन्द्र मोदी के संदेह को तीन कॉलम में छापा है। इसका शीर्षक है, नवीन बाबू की तबियत खराब होने के पीछे कोई षडयंत्र तो नहीं। जवाब नवीन पटनायक का है, सेहत ठीक, अफवाह न फैलायें। नरेन्द्र मोदी चुनाव प्रचार के दौरान अगर 77 साल के नवीन पटनायक का स्वास्थ्य खराब बता रहे तो खुद 74 साल का होने के बावजूद एक महिला के चरणों में सिर रखकर अमर उजाला के कैप्शन के अनुसार मातृशक्ति को नमन कर रहे हैं। मुझे नहीं पता देश के प्रधानमंत्री ने जिस महिला के पैरों पर अपना सिर रखा है वह उम्र में उनसे बड़ी है कि नहीं और कौन है। अखबार बता रहा है कि उड़ीशा के केंद्रपाड़ा में चुनावी रैली के दौरान उन्होंने बुजुर्ग महिलाओं को नमन कर आशीर्वाद लिया। लाल कालीन पर प्रधानमंत्री जिस महिला के पैरों पर सिर रखे हैं वह नंगे पाव है लेकिन प्रधानमंत्री सैंडल पहने हुए हैं। आप इसका जो मतलब लगाइये यह फोटो की खास बात है।
जहां तक मातृशक्ति को नमन करने की बात है, आज ही खबर है, महिला खिलाड़ियों के शोषण के आरोपी बृजभूषण सिंह के बेटे और भाजपा उम्मीदवार करण भूषण के काफिले की एसयूवी ने तीन लोगों को रौंद दिया है। इनमें दो लोगों की मौत हो चुकी है। साठ साल की महिला सीता देवी की हालत नाजुक है। इससे पहले किसान आंदोलन के समय केंद्रीय मंत्री अजय मिश्र टेनी के बेटे आशीष मिश्र की गाड़ी ने किसानों को रौंद दिया था। इसके बाद हुए संघर्ष में आठ लोग मारे गये थे। मरने वालों में चार किसान, मंत्री के बेटे का चालक और तीन भाजपा कार्यकर्ता थे। इस घटना के एक साल बाद खबर थी, पीड़ित परिवारों को न्याय का इंतजार। तब इस हिंसा में अपने बेटे को खोने वाले किसान चरणजीत सिंह ने कहा था, जब तक केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त नहीं किया जाता, “कुछ नहीं होगा।” ना टेनी को बर्खास्त करने की खबर है और ना ही कुछ होने की। टेनी को टिकट मिला है और वे चुनाव लड़ रहे हैं। चुनाव के समय मातृशक्ति को नमन और उसका प्रचार करने वालों का काम नहीं है कि वे ऐसी पुरानी बातें याद दिलायें।
मातृ शक्ति को नमन से अलग, हेडलाइन मैनेजमेंट से संबंधित एक खबर आज द हिन्दू में है। शीर्षक है, प्रज्वल रेवन्ना को गिरफ्तार करने के लिए एसआईटी बैंगलोर एयरपोर्ट पर डेरा डाले हुए है। आप जानते हैं कि सैकड़ों यौन उत्पीड़न का आरोपी प्रज्वल पूर्व प्रधानमंत्री का पोता और कर्नाटक में हसन से सांसद है और चुनाव लड़ रहा है। इस बार उसके लिए प्रधानमंत्री ने वोट मांगे थे और मतदान के बाद वह देश छोड़कर भाग गया था। कर्नाटक सरकार केंद्र से उसका पासपोर्ट रद्द करने की मांग करती रही, पर उसने खुद 31 मई को आने की सूचना दी है। आप जानते हैं कि अंतिम चरण का मतदान एक जून को है और इस दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को भी वोट पड़ना है। ऐसे में 31 मई को पहुंचने वाले रेवन्ना के लिए एसआईटी हवाई अड्डे पर पहले से ही डेरा डाले बैठी है और इसकी खबर 30 को ही छप गई तो यह सब प्रचार और हेडलाइन मैनेजमेंट ही है। तैयारियों के बारे में मुझे पता नहीं है। 31 को आने की खबर अपने आप में महत्वपूर्ण है। नवोदय टाइम्स की खबर के अनुसार, प्रज्वल की अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज हो चुकी है और आधिकारिक सूत्रों के अनुसार उसने 30 मई को म्युनिख से बेंगलुरू आने का टिकट बुक कराया है। 31 मई को तड़के उसके यहां पहुंचने की संभावा है। ऐसे में दो दिन पहले से ही डेरा डालने की खबर का क्या मतलब जब महीने भर में पासपोर्ट रद्द नहीं हो पाया या हुआ हो तो खबर में उसका जिक्र ही नहीं है।
ऐसा भी नहीं है कि हसन और वाराणसी का कोई संबंध नहीं है और हसन के वोट का असर वाराणसी में पड़ने का कोई कारण नहीं है। आपको बता दूं कि टोयोटा नाम की मशहूर कार बनाने वाली कंपनी का प्लांट कर्नाटक के विडाडी में है और कंपनी सीएसआर का पैसा वाराणसी में भी खर्च करती है। 29 मई को टोयोटा मोबिलिटी फाउंडेशन (टीएमएफ) ने यह घोषणा की कि टोयोटा मोबिलिटी फाउंडेशन के सस्टेनेबल सिटीज चैलेंज के भाग के रूप में इनोवेशन चैलेंज की मेजबानी के लिए दो वैश्विक शहरों, डेट्रायट और वेनिस के साथ वाराणसी का चयन किया गया है। 9 मिलियन डॉलर की वैश्विक पहल का लक्ष्य शहरों को सस्टेनेबल मोबिलिटी की ओर तेज़ी से बढ़ने में मदद करना, स्वस्थ और सुरक्षित शहरी वातावरण को बढ़ावा देना और साथ ही लोगों के आवागमन, काम करने, अध्ययन करने और सेवाओं तक पहुँचने की क्षमता को बढ़ाना है।
आप समझ सकते हैं कि एक जून को वोट ठीक से पड़ें या नहीं पड़ने का कोई कारण हो तो उसे दूर करने के हर उपाय हो रहे हैं औऱ उसमें मीडिया की कितनी कैसी भूमिका हो सकती है। आइये, अब एक जून को वाराणसी में मतदान को प्रभावित कर सकने वाली खबरें देख लें।
- इंडियन एक्सप्रेस में आज असम के मुख्यमंत्री हिमन्त बिस्व सरमा का इंटरव्यू है और इसका शीर्षक है, मुसलमान काशी और मथुरा की मस्जिदें हटा लें, चीजें बदलेंगी।
- इंडियन एक्सप्रेस की एक और खबर है, भाजपा ने टीएमसी के कलकत्ता गढ़ में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया, माकपा पुराने और नये के मेस के भरोसे। हालांकि इस खबर के साथ फोटो ममता बनर्जी के रोड शो की है।
- अमर उजाला ब्यूरो की श्रीनगर/ कुपवाड़ा डेटलाइन की खबर का शीर्षक है, पीओके में पाकिस्तान को सैन्य मदद बढ़ा रहा है चीन। उपशीर्षक है, पाकिस्तानी सेना के लिए बना रहा स्टील के बंकर, मानव रहित लड़ाकू विमान भी मुहैया कहा रहा है। यह खबर किसने दी या कैसे मिली इसमें नहीं बताया गया है। एक बॉक्स का शीर्षक है, भारत सतर्क, नापाक मंसूबे किये जाएंगे विफल। इसमें लिखा है, भारतीय अफसरों ने कहा …. नापाक मंसूबे विफल करने के लिए तैयार हैं। होवित्जर तोपें तैनात …. लीपा घाटी में सुरंग का निर्माण। चार कॉलम में बॉटम छपी इस खबर में यह नहीं बताया गया कि ब्यूरो को खबर कैसे मिली?
- दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की जमानत अवधि बढ़ाने सुप्रीम कोर्ट का इंतजार भी भाजपा के पक्ष की खबर है। इसके साथ तथ्य है कि अदालत उनकी गिरफ्तारी को रद्द करने की अपील पर सुवनाई कर चुकी है और फैसला सुरक्षित रख लिया है। मैं मान कर चल रहा हूं कि फैसला सरकार के खिलाफ मतदान करवा सकता है। इसलिए सुरक्षित रख लिया गया है और सरकार व दूसरी एजेंसियां भले लेवल प्लिंग फील्ड का ख्याल नहीं रखे, सुप्रीम कोर्ट को रखना चाहिये और शायद उसने रखा भी है।
- 2020 के दिल्ली दंगा मामले में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में जेल में बंद जेएनयू के पूर्व छात्र शर्जील इमाम को दिल्ली हाईकोर्ट से वैधानिक जमानत दे दी है। शरजील ने मामले में सात साल की अधिकतम सजा की आधी सजा काट लेने का हवाला देकर जमानत मांगी थी जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। लेकिन उसपर यूएपीए का भी मामला है इसलिए वह अभी जेल में ही रहेगा।
- एसएंडपी ने भारतीय रेटिंग बदली – रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने भारतीय अर्थव्यवस्था की रेटिंग और अर्थव्यवस्था के आउटलुक को स्थिर से पॉजिटिव किया है। एसएंडडपी के अनुसार भारत के मजबूत आर्थिक विकास ने क्रेडिट मेट्रिक्स पर सकारात्मक प्रभाव डाला है।
- सीएए से नागरिकता शुरू – हरियाणा, बंगाल और उत्तराखंड में सीएए से नागरिकता शुरू। नवोदय टाइम्स ने इस खबर के साथ जो अंश हाईलाइट किया है वह है – ममता कर रही थीं विरो। भाजपा ने 2019 में चुनाव घोषणा पत्र में सीएए लागू करने का वादा किया था जबकि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसका विरोध कर रही थीं।


