रायपुर : सरकारी नौकरी से रिटायर होकर मीडिया में और खास तौर पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में धमक बनाने वाले सुभाष मिश्रा की आख़िरकार एशियन न्यूज से छुट्टी हो गई। या यूँ कहिये उन्हें चैनल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। भूपेश सरकार में एक दौर ऐसा भी रहा है जब सुभाष मिश्रा के पास आज की जनधारा अखबार के साथ-साथ वीआईपी न्यूज, स्वदेश न्यूज, टीवी 27 और एशियन न्यूज हुआ करता था
एशियन न्यूज एक साल भी नहीं चला और उसके पहले उनके पार्टनर अरुण भद्रा से विवाद हो गया. बताया जाता है कि उस वक़्त चैनल में पूरा निवेश अरुण भद्रा का था लेकिन मालिकाना हक सुभाष मिश्रा और उनकी विवाहित पुत्री सुरुचि मिश्रा धनेरवाल के पास था।
इतना ही नहीं सुभाष मिश्रा स्वयं और उनकी पुत्री तथा पुत्र एशियन न्यूज से भारी भरकम वेतन भी लिया करते थे. पार्टनरशिप डीड में उल्लेखित शर्तो की जानकारी लगने के बाद अरुण भद्रा ने इसका विरोध किया और आरोप लगाया कि उक्त एग्रीमेंट उन्हें धोखे में रखकर किया गया था, भद्रा ने पूरे मामले की शिकायत पुलिस से की है और मामला विचाराधीन है।
आरोप है कि भद्रा से विवाद गहराने के बाद सुभाष मिश्रा ने चैनल के मालिक जैन को नया ऑफर दिया और उनके साथ हुआ एग्रीमेंट निरस्त कराकर रायपुर के एक बड़े बिल्डर सुबोध सिंघानिया की गोद में जा बैठे। रायपुर के एक वरिष्ठ पत्रकार के मुताबिक सुभाष मिश्रा पर पाठ्य पुस्तक निगम का महाप्रबंधक रहने के दौरान आर्थिक अनियमितता के कई आरोप लगे थे और आज भी वे मामले जाँच एजेंसियों के पास पेंडिंग हैं।
बताया जाता है कि भद्रा से अलग होने के बाद उन्होंने तुरंत बिल्डर सिंघानिया के साथ हाथ मिलाया, ताकि भद्रा से निपटने में मदद मिल सके। लेकिन सुभाष मिश्रा का यह दाँव पांच महीने बाद ही उल्टा पड़ने लगा जब सिंघानिया ने सुभाष मिश्रा को अलग करने का बड़ा दांव खेला.
लोक सभा चुनाव के पहले ही पत्रिका के राज्य सम्पादक रहे राजेश लाहोटी को राधेकृष्ण मल्टीमिडिया प्राइवेट लिमिटेड का ग्रुप एडिटर बना दिया गया, इसी समूह के अंतर्गत एशियन न्यूज आता है, जिसके प्रधान सम्पादक उस वक़्त सुभाष मिश्रा थे. एक तरह से लाहोटी की नियुक्ति यह सन्देश थी कि अब सुभाष मिश्रा स्वतः ही संस्थान छोड़ दें, लेकिन ऐसा हुआ नहीं और मिश्रा चैनल में डटे रहे। हालांकि इस दौरान उनके कई वफादार सेना नायकों को संस्थान छोड़कर जाना पड़ा लेकिन सुभाष अपने एक एक करीबियों को वीरगति प्राप्त होते हुए देखते रहे, लेकिन अपनी कुर्सी का मोह नहीं छोड़ पाए।
बहरहाल, एक नया अध्याय तब जुड़ा जब वे पिछले कुछ दिनों से पारिवारिक और स्वस्थगत कारणों से छुट्टी पर थे। सिंघानिया ग्रुप ने उन्हें बाहर करने का मन पूरी तरह बना लिया था. हालात को भाँपते हुए सुभाष मिश्रा ने स्वयं ही एशियन न्यूज को अलविदा कह दिया। वैसे खबर यह भी है कि अगर वे इस बार भी चिपके रहते तो उन्हें अलग तरीके से अलग करने की तैयारी सिंघानिया के चहेते कर्ताधर्ताओं ने कर रखी थी.
रायपुर से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.
इस बारे में ख़ुद सुभाष मिश्र बताते हैं-
मैंने स्वास्थ्यगत कारणों से स्वयं रेस्ट लिया है। पिछले दो माह से मैं रीढ़ की हड्डी में गैप की वजह से ठीक से बैठ नहीं पा रहा था। मुझे चिकित्सकों ने रेस्ट की सलाह दी है।
मैंने और मेरी बेटी ने प्रावधान होने के बावजूद भद्रा यानी हमारी कंपनी से कोई मानदेय नहीं लिया। वहाँ हमारा श्रम पैसा लगा था फिर भी हमने वहाँ से अपने को बिना कुछ लिए अलग किया. वजह हमारे सम्पादक और साथियों के साथ अनप्रोफेशनल व्यवहार था. फ़रवरी 2023 में मैंने इस पूरे प्रसंग पर एक पत्र लिखा था अरूण भद्रा को. वह भेज रहा हूँ कृपया पढ़ लें.



