त्रिकालदर्शी थे मूर्धन्य पत्रकार बच्चन सिंह!

वाराणसी : पत्रकार बच्चन सिंह जी त्रिकालदर्शी थे. उन्होंने अपने पत्रकार जीवन में आपातकाल का समय देखा. इसके बाद 20 वीं सदी के पूर्व और 21 वीं सदी से भलीभांति रू-ब- रू हुए. इन्हीं तीनों समय को लक्ष्य कर पत्रकारिता और साहित्य के क्षेत्र में जो कलम चलाई, वह उन्हें अमरता प्रदान कर गयी.

उक्त उद्गार महामना मालवीय हिन्दी पत्रकारिता संस्थान ( म. गांधी. काशी विद्यापीठ) के निदेशक प्रो. ओमप्रकाश सिंह ने रविवार को स्व. बच्चन सिंह जी की 79 वीं जयन्ती पर आयोजित वेब संगोष्ठी में मुख्य अतिथि पद से बोलते हुए व्यक्त किए. प्रो. सिंह ने कहा कि बच्चन सिंह की कलम में वह ताकत थी, जो दिशा बदल दे. वह महान पत्रकार तो थे ही कुशल साहित्यकार भी थे.

संगोष्ठी के विशिष्ट अतिथि डा. अर्जुन तिवारी ने पत्रकारिता और साहित्य की चर्चा करते हुए, उसके समन्वय की बात कही. उन्होंने कहा कि पत्रकारिता और साहित्य का प्रगाढ़ संबंध है. कुशल पत्रकार वही है, जो साहित्य को भी जानता है. बच्चन सिंह दोनों विधाओं को जानते थे. उनकी कलम भूत, भविष्य, वर्तमान तीनों के लक्ष्य को लेकर चली है. अध्यक्षता करते हुए प्रमुख निबंधकार डा. उमेश प्रसाद सिंह ने भी पत्रकारिता और साहित्य के अटूट संबंधों की चर्चा की.

विशिष्ट वक्ता डा. वशिष्ठ नारायण सिंह ने बच्चन सिंह जी के व्यक्तित्व- कृतित्व पर चर्चा करते हुए कहा वह संबंधों का निर्वाह करते थे. अखबार में काम करते समय रोज नये प्रयोग किया करते थे. रिपोर्टिंग और सम्पादन में भी पारंगत थे. जो उनसे मिलता, वह उन्हीं का होकर रह जाता. पत्रकारिता जैसे व्यस्त पेशे में रहते हुए 24 पुस्तकों का सर्जन बहुत बड़ी बात है. कहा कि एक पुस्तक काशी का इतिहास का प्रकाशन न होना दुखदायी है.

यह इतिहास श्रृंखलाबद्ध तरीके से ‘गांडीव ‘ में प्रकाशित हुआ था. बाद में छपने के लिए बच्चन सिंह जी ने दिया. प्रकाशक ने इसकी स्क्रिप्ट ही गायब कर दी. इसके छपने पर काशी के बारे में तमाम गुत्थियां सुलझेंगी. प्रयागराज के वरिष्ठ पत्रकार इन्द्रकान्त मिश्र ने भी श्री बच्चन सिंह जी के साथ काम करने के अनुभव बताए.

संगोष्ठी का संचालन वरिष्ठ पत्रकार कमल नयन मधुकर ने करते हुए उनके संस्मरण सुनाए. स्वागत प्रमुख लेखक व पुस्तक सम्पादक एल. उमाशंकर सिंह ने किया. उल्लेखनीय है कि हाल ही में प्रकाशित ‘बच्चन सिंह पत्रकार व साहित्यकार ‘ नामक पुस्तक का सम्पादन भी एल. उमाशंकर सिंह ने ही किया है.

  • भड़ास की पत्रकारिता को जिंदा रखने के लिए आपसे सहयोग अपेक्षित है- SUPPORT

 

 

  • भड़ास तक खबरें-सूचनाएं इस मेल के जरिए पहुंचाएं- bhadas4media@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *