
सुजीत सिंह प्रिंस-
गाज़ीपुर, करण्डा। शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका ताज़ा उदाहरण हैं करण्डा के खण्ड शिक्षा अधिकारी (BEO) रविन्द्र सिंह पटेल, जिनकी रिश्वतखोरी अब किसी से छिपी नहीं है। शर्मनाक यह है कि अब ये शिक्षामित्रों जैसे कम वेतन पाने वाले कर्मियों से भी रिश्वत लेने में नहीं हिचकिचा रहे हैं।
भड़ास को मिल रही लगातार शिकायतों के अनुसार, BEO करण्डा द्वारा शिक्षामित्रों से एकमुश्त पैसा लेकर उन्हें महीनों तक स्कूल न आने की ‘छूट’ दी जा रही है। नया मामला प्राथमिक विद्यालय सीतापट्टी का है, जहाँ के प्रधानाध्यापक ने शिक्षामित्र की लगातार अनुपस्थिति की सूचना बीईओ को दी थी, और मासिक उपस्थिति प्रपत्र में उसे अनुपस्थित दिखाकर भेजा था।



लेकिन रिश्वत के नशे में चूर खण्ड शिक्षा अधिकारी ने शिक्षामित्र से मोटी रकम वसूलकर उसी उपस्थिति पत्रक में फर्जी तरीके से हेराफेरी की और उसे उपस्थित दर्शा दिया, जिससे पूरे महीने का मानदेय अवैध रूप से पास कर दिया गया। यह न सिर्फ गंभीर वित्तीय अनियमितता है, बल्कि विभागीय नियमों और ईमानदारी पर सीधा हमला भी है।
भड़ास को कुछ अन्य शिक्षकों ने भी नाम और साक्ष्यों के साथ रविन्द्र सिंह पटेल की तानाशाही और भ्रष्ट गतिविधियों की जानकारी दी है। जल्द ही इन मामलों को साक्ष्यों सहित सार्वजनिक किया जाएगा।
प्रश्न यह है कि क्या करण्डा का शिक्षा विभाग रिश्वत से चलता है? क्या शिक्षामित्रों और शिक्षकों को काम के बजाय पैसे से उपस्थिति मिलती है? क्या जिला प्रशासन और बेसिक शिक्षा विभाग इस पर कोई कार्रवाई करेगा?
उपरोक्त आरोपों पर बीईओ रविंद्र सिंह पटेल से उनका पक्ष ह्वाट्सऐप के ज़रिए भड़ास ने मांगा लेकिन उन्होंने कुछ भी प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया!
भड़ास इस भ्रष्टाचार को बेनकाब करता रहेगा। अगर आपके पास भी संबंधित जानकारी या प्रमाण हैं, तो बेहिचक हमें भेजें – आपकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी। मेल करें : [email protected]
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