सत्येंद्र पीएस-
भाजपा के बिहार के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने सिखों के एक चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा चलाए जा रहे मेडिकल कॉलेज पर ही कब्जा कर लिया है। वह नेताओं के बच्चों को फ्री में एडमिशन देकर डॉक्टर बनाते हैं, जिससे उनकी भाजपा में राजनीति भी चमक गई और बड़े नेता भी बन गए।
दिलीप जी बहुत छोटी मछली हैं। बिहार के हैं। इसलिए वहां के लोगों ने खबर लिखने की हिम्मत दिखाई। उसके लिए साधुवाद।
देश भर में पिछले 10 साल में तमाम उद्योगपतियों के उद्योगों पर भाजपा नेताओं ने कब्जा किया है। वह फरीदाबाद से मुंबई और कर्नाटक तक है। तमाम बिल्डरों, कम्पनियों, समाचार चैनलों के मालिकों ने सुसाइड कर लिया, उनकी फैमिली के लोग विदेश भाग गए, कुछ जेल में डाल दिए गए। उनकी सम्पदा औने पौने भाव लिखवा ली गई। क्या अगर कभी भाजपा सरकार बदलती है तो।पीड़ितों को न्याय मिलेगा? इससे संबंधित वरिष्ठ पत्रकार पुष्य मित्र की ये खबर जोरदार है।

Pushya Mitra-
किशनगंज में एक मेडिकल कॉलेज है, जो देश भर में सिखों के कुछ चुनिंदा मेडिकल कॉलेज में से एक है। मगर आप हमारे इलाके में जाएं तो लोग बताएंगे कि यह दिलीप जायसवाल का कॉलेज है, जो लंबे समय तक बिहार भाजपा के कोषाध्यक्ष रहे और अब प्रदेश अध्यक्ष हैं। यह उलटबांसी मुझे कभी समझ नहीं आए कि एक माइनोरिटी कॉलेज के सर्वेसर्वा वो कैसे हो सकते हैं।
पिछले दिनों प्रशांत किशोर ने जब उस बारे में सवाल उठाया तो मैंने भी अपने तरीके से तफ्तीश की। फिर यह कहानी सामने आई। उस सिख परिवार से भी मिला जिनके लोगों ने इस कॉलेज को शुरू करवाया था। उन्होंने तमाम जरूरी कागजात दिए। पटना साहिब के गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटी के अध्यक्ष से बात की, जिन्हें इस कॉलेज का पदेन सदस्य बनाया गया था। उन्हें कुछ पता नहीं था।
फिर आखिर में तमाम सवालों के साथ दिलीप जायसवाल जी से मिला। उन्होंने उनमें से कुछ के जवाब दिए। फिर यह स्टोरी बनी।
उन्होंने एक कागज स्टोरी छपने के बाद भी भेजा है। वह बहुत महत्वपूर्ण नहीं है, मगर उनका पक्ष है इसलिए हम उसे आगे कभी जगह देंगे। फिलहाल यह स्टोरी इंडिया टुडे के नए अंक में आई है। माता गुजरी मेडिकल कॉलेज की लगभग पूरी कहानी।



