‘छत्तीसगढ़ की लोक एवं मिथक कथाएँ’ पुस्तक विमोचित

कोंडागाँव। हरिहर वैष्णव द्वारा संपादित एवं सरस्वती बुक्स, भिलाई (छ.ग.) से प्रकाशित पुस्तक “छत्तीसगढ़ की लोक एवं मिथक कथाएँ” का विमोचन अभी 01.01.2021 को कोंडागाँव में सम्पन्न हुआ। विमोचन किया श्री वैष्णव की धर्मपत्नी श्रीमती मायावती वैष्णव ने। उन्होंने पुस्तक को अपने घर की “पूजा-खोली” में भगवान को समर्पित किया।

इस पुस्तक में छत्तीसगढ़ के विभिन्न अंचलों में बोली जाने वाली छत्तीसगढ़ी के साथ-साथ “पाँच कोस में पानी बदले, दस कोस में बानी, पन्द्रह कोस में पगड़ी बदले, बीसकोस में छानी” कहावत को चरितार्थ करती विभिन्न भाषाओं यथा हल्बी, भतरी, गोंडी, धुरवी, बस्तरी, बाम्हनी (बामनी या पण्डई), कोस्टी, कमारी, बैगानी, बिरहोरी, भुँजिया, बंजारी, सरगुजिहा और सादरी की भी रोचक और शिक्षाप्रद 77 लोक तथा मिथक कथाओं का समावेश किया गया है।

लोक तथा मिथक कथाओं की इस पुस्तक का आवरण चित्र बनाया है “बस्तर के तुलसीदास” के नाम से विख्यात बहुमुखी प्रतिभा के धनी कीर्ति शेष राम सिंह ठाकुरजी के लब्ध प्रतिष्ठ चित्रकार पुत्र राजेन्द्र सिंह ठाकुर ने।

लोक व मिथक कथाएं कहने-बताने वालों के नाम इस प्रकार हैं- हरिहर वैष्णव, बलदाऊ राम साहू, तीरथ दास बैरागी, वीरेन्द्र”सरल”, संजीव बख्शी, डॉ. जयमती कश्यप. डॉ. पीसी लाल यादव, सुधा वर्मा, हरेन्द्र यादव,गोपीकृष्ण सोनी, तुलसी तिवारी, घनश्याम सिंह नाग, शिवकुमार पाण्डेय, मनोज वर्मा,सुरेश मरकाम, पूर्णिमा सरोज, घनश्याम सिंह नाग, लोकनाथ राठौर, तुलसी रामपाणिग्रही, शकुंतला तरार, हितेश कुमार, डुमन लाल ध्रुव, धनीराम कड़मिया, डॉ. सुधीरपाठक, गोविंद भगत एवं सागर भगत।

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