चीन घुसपैठ पर भाजपा का ये सांसद मुखर है लेकिन भाजपा की केंद्रीय सरकार डर के मारे चुप्पी साधे है!

धर्म वीर-

चीन ने तो कोरोना काल में ही भारत सीमा के अंदर पूरा गांव बसा दिया!

अरुणाचल प्रदेश में चाइना ने आख़िर किया क्या है? अब नया विवाद क्या है? पूरा पढ़िए एक बार और ख़ुद समझ जाइए….

एक बार में समझ ना आए तो पोस्ट में दिए गए चित्र देखिए और फ़िर से पोस्ट पढ़िए। सब समझ में आ जाएगा। मैं आपको इस पूरे मुद्दे के बारे में इस प्रश्नोत्तरी से समझाने का प्रयास करता हूँ।

प्रश्न – क्या चीन ने भारत के अधिकार क्षेत्र में दख़ल देते हुए एक गाँव बसा लिया है ..?

उत्तर – हाँ

प्रश्न – सीमा रेखा से कितने किलोमीटर अंदर ..?

उत्तर – लगभग 4.5 किलोमीटर अंदर

प्रश्न – क्या चीन उस स्थान पर पहली बार क़ाबिज़ हुआ है ..?

उत्तर – नहीं । चीन इस स्थान पर 2010 के पहले ही अपनी डिफ़ेन्स चौकी और पोस्ट बना चुका था । भारत सरकार की नज़र में यह मामला 2010 में आया था । लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि उस वक्त तक यहाँ केवल एक सामान्य सैनिक पोस्ट थी और कोई बड़ा स्ट्रक्चर नहीं था ।

प्रश्न – क्या तात्कालिक भारत सरकार ने इस डिफ़ेन्स पोस्ट के मामले में चीन के ख़िलाफ़ कोई कार्यवाही की थी ..?

उत्तर – कोई बड़ी कार्यवाही नहीं की गई थी । डिप्लोमेटिक लेवल पर विरोध दर्ज करने से आगे बात बढ़ी हो ऐसी कोई जानकारी पब्लिक डोमेन में नहीं है ।

प्रश्न – क्या चीन इस गाँव वाले स्थान पर नेहरू के समय से ही क़ाबिज़ था जैसा आरोप कुछ लोग़ आज लगा रहे हैं ..?

उत्तर – बिलकुल नहीं । उस इलाक़े में चीन और भारत के बीच में मेकमोहन रेखा ही एक्चुअल लाइन ओफ़ कंट्रोल का काम करती है और 1962 में युद्ध के पश्चात् चीन ने एकतरफ़ा युद्ध विराम करते हुए अपने आपको मेकमोहन रेखा के दूसरी तरफ़ कर लिया था । भारत इसी मेकमोहन रेखा को ही अंतर्राष्ट्रीय सीमा मानता है जबकि चीन इस रेखा को अपने लिए सीमा नहीं मानता है । मेकमोहन रेखा को पार करके अरुणाचल प्रदेश साइड में जो भी निर्माण हुआ है वह नब्बे के दशक से लेकर 2021 के बीच में हुआ है जिसमें 2010 तक एक आर्मी पोस्ट और वहाँ तक चीन की तरफ़ से रोड का निर्माण भी शामिल है ।

प्रश्न – फ़िर अब नया क्या हुआ है ..?

उत्तर – नया यह हुआ है कि जिस जगह पर चीन ने 2010 तक केवल रोड और डिफ़ेन्स पोस्ट बनाए थे वहाँ पर पिछले दो – तीन सालों में चीन ने सेकडों पक्के मकान का एक पूरा गाँव बसा लिया है । यही नहीं पुरानी डिफ़ेन्स पोस्ट को भी बेहद आधुनिक बना लिया है ।

प्रश्न – क्या यह चीन की दग़ाबाज़ी है .?

उत्तर – बिलकुल है । भारत के नियंत्रण वाले क्षेत्र के साथ साथ किसी भी विवादास्पद क्षेत्र में इस तरह का पक्का निर्माण किया जाना ग़लत है । यह ना सर्फ़ द्विपक्षीय सम्बन्धों को ख़राब करने वाला है बल्कि एक तरह से अंतर्राष्ट्रीय संधियों का भी उल्लंघन है । दूसरे पक्ष को युद्ध के लिए भड़काना तो खैर है ही ।

प्रश्न – यह पूरा मुद्दा प्रारम्भ कहाँ से हुआ है ..?

उत्तर – अरुणाचल प्रदेश से आने वाले सत्ताधारी दल भाजपा के एक सांसद हैं मिस्टर तापिर गाउ । तापिर गाउ पिछले कई वर्षों से उनके संसदीय क्षेत्र में बढ़ती चायनीज़ घुसपैठ को लेकर देश के प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष को लिख चुके हैं । उन्होंने लोकसभा में भी इस मुद्दे को उठाया था और पिछले दिनों उन्होंने दावा किया था कि चीन भारत की सीमा के पचास – साठ किलोमीटर तक अंदर आ चुका है । सांसद महोदय इस वक्त भी अपनी जानकारी के सही होने का दावा कर रहे हैं । उनका कहना है कि चीन ना सिर्फ़ बड़े बड़े रिहायशी और सैनिक अड्डे उनके इलाक़े में बना रहा है बल्कि डबल लेन की रोड भी अरुणाचल प्रदेश में बना रहा है । वह दावा करते हैं कि धीरे धीरे चीन भारत के सौ किलोमीटर अंदर स्थित शहर चंगलाग़म तक पहुँचना चाहता है । ध्यान दें कि तापिर ग़ाउ सत्ताधारी भाजपा के सांसद हैं विपक्ष के नहीं ।

प्रश्न – भारत सरकार का इस मामले में क्या रुख़ है ..?

उत्तर – इसमें कोई शक नहीं है कि भारत सरकार ने भी पिछले दशकों में इंडो चाइना बॉर्डर पर अपनी सेना के काम आने वाली आधारभूत संरचना में बड़ा निवेश किया है । भारत भी मेकमोहन लाइन के आस पास रोड , सुरंग आदि बनाने और सेना की उपस्थिति मज़बूत करने में लगा हुआ है । यही कारण है कि पिछले कुछ दिनों से भारत और चीन एक बीच में तनाव काफ़ी बढ़ गया है ।

प्रश्न – क्या चीन के इरादे ख़तरनाक हैं ..?

उत्तर – 100% । जिस तरह का विस्तारवादी रवैया चीन का है उस लिहाज़ से लगता नहीं कि चीन केवल इस गाँव को बसाने के पश्चात् रुक जाएगा । जिस तरह से वह दोहरा हाइवे बना रहा है और उसने जिस हेवी तकनीक के सहारे गाँव बसाया है उससे यह आसानी समझ में आ सकता है कि चाइना धीरे धीरे भारत की ज़मीन को हड़पता जा रहा है बिना आधिकारिक युद्ध लड़े । दरअसल चाइना सभी पड़ोसियों के साथ इसी तरह की शातिराना हरकतें करके उनकी जगह हड़पता है । धीरे धीरे पड़ोसियों kee जगह घेरकर उसको अपने नक़्शे में दिखता है और अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं को धोखा देने का प्रयास करता है । चीन जो कुछ भी अरुणाचल प्रदेश में कर रहा है वैसा ही कुछ कश्मीर घाटी में करना चाहता है । गल्वान घाटी में बाईस भारतीय सैनिकों की शहादत चीन के इन्हीं ख़तरनाक मंसूबों को रोकने में हुई थी ।

प्रश्न – अब आगे क्या ..?

उत्तर – भारत सरकार को देश की सभी राजनीतिक पार्टीज़ सहित पूरे देश को भरोसे में लेकर चीन के ख़िलाफ़ आर्थिक प्रतिबंध लगाने की कार्यवाही करनी चाहिए । इसके साथ साथ अपने सैनिक उपस्थिति भी बढ़ानी चाहिए और जितना हो सके चीन के बॉर्डर पर सैनिक ढाँचे का निर्माण करना चाहिए ।

(जो भी लिखा है उससे सम्बंधित चित्र नीचे देखिए। किसी पोईंट पर सहमत ना हों तो कमेंट में प्रश्न पूछिए।)

लेखक धर्म वीर का अपना YouTube चैनल है ‘Dharam Veer Live’ नाम से.

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