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सियासत

चमन मिश्रा एंड फैमिली की नाराजगी और गजराज सिंह की डरी हुई सरकार!

अनिल सिंह-

‘परलोक सुधार टाइम्‍स’ समाचार पत्र के वरिष्‍ठ युवा पत्रकार चमन मिश्रा नाराज थे। कॉपी-पेस्‍ट करके बहुत मुश्किल से खबर लिखी थी, उसके बाद भी गजराज सिंह की सरकार नहीं गिरी। उनकी खबर का असर नहीं होने पर उनका गुस्‍सा सातवें आसमान पर था। गुस्‍से में उन्‍होंने सोशल मीडिया पर गजराज सिंह की सरकार को भ्रष्‍ट, बेईमान और जातिवादी घोषित कर दिया था, फिर भी उनका खून खौल रहा था। चमन मिश्रा का ब्‍ल्‍डप्रेशर बढ़ते देख उनके पिता मगन मिश्रा, जो सरकारी विभाग में बडे़ बाबू थे और सरकार से हमेशा नाराज रहते थे, उन्‍होंने हस्‍तक्षेप किया। चमन को समझाने का प्रयास करते हुए उन्‍होंने कहा, ‘’बेटा चमन, इतनी जल्‍दी हौसला नहीं हारते हैं। बेटा, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती, और गाली ग्‍लौज किये बिना कभी मार नहीं होती। बेटा, हम और तुम ही नहीं, तुम्‍हारे चाचा लोग भी सरकार से नाराज हैं। मामा और फूफा भी। सरकार आज नहीं तो कल गिरा ही दी जायेगी, तुम अपना प्रयास जारी रखो, लेकिन अपने शरीर का नुकसान मत करो।‘’

‘‘पिताजी इस सरकार में हमलोगों का जो अपमान हो रहा है, उसके बाद भी आप को लगता है कि मेरा गुस्‍सा शांत हो जायेगा। जब तक यह सरकार गिर नहीं जाती, तब तक प्रयास जारी रहेगा’’, चमन ने पूरे गुस्‍से में नथूने फुलाते हुए कहा।

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‘’बेटा हमलोगों को सरकार से नाराज रहना है, अपना खून नहीं जलाना है। खून सरकार का जलाना है’’, मगन मिश्रा ने चमन को समझाते हुए कहा।

‘’पिताजी यह इतना आसान नहीं है। फिर भी आप कहते हैं तो शांत हो जाता हूं, लेकिन आपको कोई गारंटी नहीं दे सकता कि कब तक शांत रहूंगा’’, चमन ने बहुत ही सयंमित तरीके से यह बात कही।

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मगन मिश्रा ने प्‍यार से अपने बच्‍चे के सिर पर हाथ रखकर सहलाया, और कहा, ‘’सरकार से नाराजगी नहीं छोड़नी है। सरकार से बराबर नाराज रहना है।‘’

दरअसल, चमन मिश्रा का पूरा परिवार सरकार से नाराज रहता था। गजराज सिंह की सरकार से पहले यह परिवार यमराज यादव की सरकार से नाराज था। उसके पहले यह परिवार कलावती देवी की सरकार से भी नाराज था। उसके पहले कर्मराज यादव की सरकार थी, तब भी यह परिवार नाराज था। राज्‍य से ठरकी दत्‍त त्रिपाठी की सरकार जाने के बाद इस परिवार पर जो नाराजगी चढ़ी, वो आज तक नहीं उतरी थी। ये परिवार कभी भी नाराज हो जाता था। किसी से भी नाराज हो जाता था। नाराजगी पर इस परिवार का जन्‍म सिद्ध अधिकार था। आज फिर चमन मिश्रा के खबर का असर नहीं होने पर पूरा परिवार नाराज था।

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चमन के बड़े चाचा लगन मिश्रा हाई कोर्ट में जज थे। छोटे चाचा जगन मिश्रा आईएएस थे। तीसरे चाचा छगन मिश्रा विधायक थे। चौथे चाचा गगन मिश्रा झकझोर टीवी न्‍यूज के संपादक थे। मामा विषधर अग्निहोत्री रेलवे में थे। फूफा पीटर पाठक केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र पांडेय जी के निजी सचिव थे। जीजा आफताब द्विवेदी प्रदेश सरकार में मंत्री थे। मौसा परविंदर चौबे बैंक में थे। यह सभी लोग सरकार से नाराज थे। इनकी नाराजगी को देखते हुए ही चमन ने खबर लिखी थी, लेकिन गजराज की सरकार गिरी नहीं थी, परंतु दबाव में थी।

इसी बीच, एक घटना घट गई। केंद्र की सरकार ने नोटबंदी कर दी। नोट बदलवाने को लेकर चमन के बैंकर मौसा परविंदर चौबे की लड़ाई उसकी मौसी कमला बाजपेयी से हो गई। चौबे जी ने अपनी पत्‍नी कमला जी को चार-पांच थप्‍पड़ रसीद कर दिया। दुर्भाग्‍य से इसका वीडियो पड़ोसी ललन दुबे ने बना लिया और झकझोर न्‍यूज के संपादक गगन मिश्रा को भेज दिया। गनन मिश्रा ने रन डाउन पर तैनात अपने रिपोर्टर बेंजामिन तिवारी को बोला इस खबर पर खेलना है। स्क्रिप्‍ट तैयार कराओ कि गजराज सिंह के प्रदेश की कानून व्‍यवस्‍था समाप्‍त हो चुकी है। महिलायें अब बाहर ही नहीं अपने घर पर भी सुरक्षित नहीं हैं। उन पर घर के भीतर भी घुसकर हमला हो रहा है। सरकार कानून-व्‍यवस्‍था की रक्षा करने में नाकाम है।

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गगन मिश्रा इस खबर पर प्राइम टाइम में खेलते उसके पहले ही विपक्षी पार्टी के चक्‍कू यादव ने सोशल मीडिया पर इस वीडियो को ब्रेक करते हुए लिखा, ‘’एक ब्राह्मण महिला को सरेआम पीटा गया, उसके घर में घुसकर पीटा गया और सरकारी तंत्र सोता रहा। थाना सोता रहा, पुलिस सोती रही। शासन-प्रशासन इस पूरे घटना क्रम की खबर तक नहीं लगी। पुलिस के मुखबिर तंत्र को भनक तक नहीं लग सकी। क्‍या यही सरकार होती है, जो एक महिला को बचा ना सके। उसे सुरक्षा ना दे सके। आखिर पुलिस वाले कहां मर गये थे। पुलिस केवल वसूली में लगी थी।‘’

चक्‍कू यादव के वीडियो ब्रेक करने से थानेदार ललित चतुर्वेदी बुरी तरह नाराज हो गये। जीटी रोड़ का थाना नहीं मिलने से वह सरकार से पहले से ही नाराज थे, अब चक्‍कू से भी नाराज हो गये। थानेदारी के बावजूद बहुत मुश्किल से उनका घर चल रहा था। किसी तरह थाना क्षेत्र में अफीम, गांजा, चरस, मिलावटी तेल वगैरह बिकवाकर परिवार को बमुश्किल पाल पोस रहे थे। हालात ऐसे थे कि कई मौकों पर चतुर्वेदी जी को अपनी सैलरी खर्च करने की नौबत आ जाती थी, लेकिन वो क्षेत्र में अवैध कट्टा और पकड़ा गया गांजा बिकवाकर इस परेशानी को टाल देते थे। अब चक्‍कू के सवाल उठाये जाने से वह खासे नाराज थे। उन्‍होंने अपने दल बल के साथ चक्‍कू को गिरफ्तार किया तथा एफआईआर लिखी कि चक्‍कू के पास एक पुडि़या हेराइन की सूचना मिली थी, जिसको एक अवैध कट्टे के नाल में रखे जाने का अंदेशा था। यह अंधेरे का लाभ उठाकर भागने ही वाला था कि मुखबिर की सटिक सूचना पर पुलिस ने उसे एक पुडि़या हेराइन, आधा किलो गांजा, हॉफ ब्‍लेड तथा एक अवैध कट्टे के साथ धर दबोचा।

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उधर, प्राइम टाइम पर गगन मिश्रा ने धुंआधार खबर चलाई कि गजराज की सरकार में कानून-व्‍यवस्‍था खतम हो चुकी है। एक महिला पर घर के भीतर हमला हो रहा है, और गजराज की पुलिस का कहीं अता-पता नहीं है। चक्‍कू यादव जैसे कुछ अराजक तत्‍व ललित चतुर्वेदी जैसे होनहार पुलिस वालों पर ही सवाल उठाने की कोशिश कर अपनी जातिवादी मानसिकता का परिचय दे रहे हैं। चतुर्वेदी जैसे थानेदारों की वजह से ही थोड़ी बहुत कानून-व्‍यवस्‍था बची हुई है, नहीं तो प्रदेश में कब की अराजकता फैल जाती। वहीं, इस सरकार में कानून-व्‍यवस्‍था पर उंगली उठाने वाले चक्‍कू यादव जैसे युवाओं को गजराज सरकार की पुलिस फर्जी मामले में फंसाकर अरेस्‍ट कर रही है। विरोधियों की आवाज पुलिस के बूटों तले कुचलने की कोशिश की जा रही है। यह सरकार पत्रकारों के खिलाफ है। पत्रकारों को भी सरकारी आवास नहीं दे रही है। तालिबानी मानसिकता वाली इस सरकार को जनता एक दिन इस सरकार को सबक जरूर सिखायेगी। इस खबर के गजराज की सरकार पूरी तरह दबाव में आ गई।

सरकार ने खबर के दबाव में दस आवासों का आवंटन किया, जिसमें आठ आवास गगन मिश्रा, चमन मिश्रा और उनके रिश्‍तेदारों को दिये गये। दो आवास नसीम और रमेश सिंह को मिला। इसके बावजूद चमन मिश्रा का परिवार की नाराजगी गजराज सरकार से कम नहीं हुई। दबाव में सरकार ने चमन के छोटे चाचा जगन मिश्रा को प्रमुख सचिव पीडब्‍ल्‍यूडी बना दिया, तीसरे चाचा छगन मिश्रा को उपमुख्‍यमंत्री बना दिया। फूफा पीटर पांडेय को एमएलसी बना दिया। इसके बावजूद चमन मिश्रा एवं रिश्‍तेदारों की सरकार से नाराजगी खत्‍म नहीं हुई।

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इसी बीच, चुनाव आ गये। चमन मिश्रा एंड फैमिली ने तय किया कि अब गजराज सिंह की सरकार को गिरा देना है। चमन मिश्रा एंड फैमिली की नाराजगी के चलते लोगों को लगने लगा कि अब गजराज सिंह की सरकार को कोई भी ताकत नहीं बचा सकती है। चमन के कुछ रिश्‍तेदार यमराज यादव को बताने पहुंच गये कि इस बार हमलोगों के वोट की वजह से तुम्‍हारी सरकार बनने जा रही है। यमराज खुश हुए परशुराम बाबा की मूर्ति लगवाई। चुनाव हुए। जनता ने गजराज सिंह की सरकार को फिर से चुन लिया। रिजल्‍ट आने के बाद चमन मिश्रा के परिवार ने तय किया कि उसने वोट गजराज सिंह की सरकार को दिया है। गगन मिश्रा ने ‘झकझोर टीवी न्‍यूज’ में खबर चलाई कि नाराजगी के बावजूद मिश्रा परिवार एवं रिश्‍तेदारों ने वोट गजराज सिंह की सरकार को दिया है, जिससे गजराज सरकार ने वापसी की। मिश्रा परिवार के वोट की ताकत है कि सरकार ने वापसी की, नहीं तो जनता इस सरकार से पूरी तरह नाराज थी।

चमन मिश्रा एवं संजय दीक्षित ने ‘परलोक सुधार टाइम्‍स’ में खबर लिखी कि मिश्रा एवं दीक्षित परिवार के अथक प्रयास से गजराज सिंह की सरकार ने की वापसी। जनता गजराज से बुरी तरह नाराज थी, लेकिन मिश्रा एवं दीक्षित परिवार के वोटों के आगे उसकी एक नहीं चली। जनता के अरमानों पर पानी फेरते हुए मिश्रा, दीक्षित, तिवारी, दुबे परिवार ने गजराज को एक बार फिर मुख्‍यमंत्री बनवाया। दोनों वरिष्‍ठ पत्रकार इस खबर को छापने के बाद दो-दो लाख का विज्ञापन लिये, फिर हर महीने लेने लगे। सरकार शमशेर सिंह, इनायत पटेल, हलधर गुप्‍ता को भी विज्ञापन देने लगी, इसकी जानकारी होते ही चमन मिश्रा और उनके रिश्‍तेदार एक बार फिर सरकार से नाराज हो गये हैं। ट्वीटर और सोशल मीडिया पर जान देने को उतारू हैं।

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इस व्यंग्य कथा के लेखक लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार अनिल सिंग हैं. सम्पर्क- +91 94515 87800

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