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मणिपुर में एक साल से चल रही हिंसा और उसकी रिपोर्टिंग का विविधतापूर्ण अंदाज

आज हिन्दुस्तान टाइम्स और नवोदय टाइम्स में एक खबर है, मस्जिद में मौलाना की पीटकर हत्या। मारपीट करने वाले तीन नकाबपोश थे। यह अजमेर (भाजपा शासन है) के रामगंज थानांतर्गत कंचन नगर स्थित मोहम्मदी मदीना मस्जिद की वारदात है। वैसे तो यह बिल्कुल जरूरी नहीं है कि एक हत्या की खबर पहले पन्ने पर हो लेकिन केंद्रीय गृहमंत्री जो आरोप लगाते रहे हैं और जो दावे किये हैं उसमें यह खबर महत्वपूर्ण है। दंगा कराने की साजिश का हिस्सा भी हो सकती है। ठीक है कि शुरुआत कर्नाटक से हुई थी और वहां भाजपा की सरकार नहीं थी। पर आरोपी गिरफ्तार हो चुका है और राजस्थान की खबर ही नहीं छपी है। यह अंतर रेखांकित करने लायक है।

संजय कुमार सिंह

देश की 18वीं लोकसभा के लिए 2024 का आम चुनाव लगभग दो या डेढ़ महीने चलेगा और दो दौर के मतदान के बाद तीसरे दौर का मतदान 7 मई को होना है। अब तक हो चुके मतदान में लोगों की भागीदारी कम रही है और इस कारण सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी की हालत खराब समझी जा रही है। मतदान का प्रतिशत या चुनाव में लोगों की भागीदारी बढ़ाने की कोशिशें सत्तारूढ़ भाजपा और सरकार दोनों की ओर से जारी है। इस क्रम में खबर छपी है कि अमित शाह ने मध्य प्रदेश के (भाजपा) नेताओं से कहा है कि वोटिंग प्रतिशत कम होने पर मंत्री पद जायेगा, ज्यादा मतदान वाले विधायकों को मंत्री पद संभव। यह भी खबर है कि भाजपा नेतृत्व ने राज्य इकाइयों को निर्देश दिया है कि बूथ कार्यकर्ताओं को कसें, वोटिंग बढ़ायें। वोटिंग बढ़ाने का सबसे आसान तरीका है कि मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक आने-जाने की सुविधा दी जाये और सुविधा देने वाला लोगों को घर बुलाने जाये। मतदाता सूची के ‘पन्ना प्रमुख’ यह काम बखूबी कर सकते हैं पर हमलोग बचपन से यह जानते हैं कि मतदाताओं को (आने-जाने की सुविधा का) प्रलोभन देना भी गलत है और पन्ना प्रमुख नई व्यवस्था है। ऐसे में जरूरत सही-गलत का घालमेल करा सकती है पर अभी यह मुद्दा नहीं है। मुद्दा वही है कि आज के अखबारों में क्या है।

आप जानते हैं कि 2019 के चुनावों से पहले (या समय पर) पुलवामा हो गया था और सरकार का काम अपेक्षाकृत आसान हो गया था। इस बार भी आरोप थे कि भाजपा चुनाव जीतने के लिए दंगा करा सकती है हालांकि, कर्नाटक चुनाव की तरह इस बार भी अमित शाह कह चुके हैं कि कांग्रेस और सहयोगी जीते तो दंगे और अत्याचार होंगे। बिहार के कटिहार लोकसभा क्षेत्र में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए, पूर्व भाजपा अध्यक्ष ने अपनी पार्टी को यह श्रेय भी दिया कि उन्होंने देश को नरेंद्र मोदी के रूप में ‘पहला ओबीसी प्रधानमंत्री’ दिया है, जिन्होंने वंशवाद की राजनीति को ‘खत्म’ कर दिया है। “मोदी ने नक्सलवाद का सफाया किया और आतंकवाद पर लगाम लगाई। जब कांग्रेस सत्ता में थी, तो आतंकवादी मनमाने ढंग से हमला करते थे और कोई भी जवाबी कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता था। इसके विपरीत, उरी और पुलवामा में हमलों के तुरंत बाद सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट हवाई हमले किये गये। हमारे सुरक्षा कर्मी पाकिस्तान की सीमा पार गये और आतंकवादियों को उनके ठिकानों पर ढेर कर दिया गया। अमित शाह ने जो कहा है उसका मतलब यह भी है कि भाजपा की सत्ता रही तो वे ढेर रहेंगे वरना जाग जायेंगे। पर वह अलग मुद्दा है।

इस बार कर्नाटक में जब रामेश्वर कैफे में विस्फोट हुआ तो लगा कि विधानसभा चुनाव से पहले अमित शाह का कहा सच हो सकता है पर ऐसा कुछ हुआ नहीं और बम प्लाट करने वालों को गिरफ्तार किया जा चुका है। और भी मामले हैं कुछ छपते हैं कुछ नहीं और ऐसा ही एक मामला आज भी है। हिन्दुस्तान टाइम्स और नवोदय टाइम्स में एक खबर है, मस्जिद में मौलाना की पीटकर हत्या। मारपीट करने वाले तीन नकाबपोश थे। यह अजमेर (भाजपा शासन है) के रामगंज थानांतर्गत कंचन नगर स्थित मोहम्मदी मदीना मस्जिद की वारदात है। वैसे तो यह बिल्कुल जरूरी नहीं है कि एक हत्या की खबर पहले पन्ने पर हो लेकिन केंद्रीय गृहमंत्री जो आरोप लगाते रहे हैं और जो दावे किये हैं उसमें अगर मस्जिद में कोई नकाबपेश किसी मौलाना की हत्या कर देता है तो वह दंगा फैलाने की साजिश भी हो सकती है। ठीक है कि शुरुआत कर्नाटक से हुई थी और वहां भाजपा की सरकार नहीं थी। पर आरोपी गिरफ्तार हो चुका है और यहां खबर ही नहीं छपी है। यह अंतर रेखांकित करने लायक है।

खासकर चार सौ पार के दावे और पहले के दो मतदान में वोटों का प्रतिशत 2019 से कम होने के संदर्भ में भाजपा की परेशानी। आपको याद होगा कि 2019 चुनाव से पहले पुलवामा हुआ था और पुलवामा के नाम पर वोट मांगे गये थे। इस बार भी आरोप थे कि सरकार कुछ ना कुछ वोट बटोरू करेगी पर राममंदिर में प्राण प्रतिष्ठा से लेकर मंगल सूत्र छीन कर मुसलमानों को देने तक के प्रधानमंत्री के आरोप का अपेक्षित असर नहीं हो रहा है। यहां तक कि कांग्रेसी भाजपा वालों की तरह हर शहर में रो भी नहीं रहे हैं। इस क्रम में आज की जो खबरें गौर करने लायक हैं वे इस प्रकार हैं – मणिपुर में सीआरपीएफ के दो लोग मारे गये। टाइम्स ऑफ इंडिया के शीर्षक में है कि यह राज्य में शांति रखने वालों पर पहला हमला है। अमर उजाला का शीर्षक है, मणिपुर में कुकी उग्रवादियों के हमले में सीआरपीएफ के दो जवान शहीद। उग्रवादियों ने मणिपुर में सीआरपीएफ के दो लोगों को मार डाला (द हिन्दू) 4. बंगाल का सुरक्षाकर्मी मणिपुर में मारा गया (द टेलीग्राफ) 5. मणिपुर की झड़प में उग्रवादियों ने सीआरपीएफ के दो अधिकारियों को मार गिराया (हिन्दुस्तान टाइम्स) और 6. मणिपुर में उग्रवादियों का हमला, दो जवान शहीद, दो अन्य सुरक्षाकर्मी घायल (नवोदय टाइम्स)।

इंडियन एक्सप्रेस में यह खबर लीड है और मामला इसी से समझ में आता है। बाकी खबरों से आप पूरी घटना का एक छोटा सा हिस्सा ही जान पाते हैं। इस खबर का (फ्लैग शीर्षक), बिष्णुपुर आउटपोस्ट में विस्फोट, (मुख्य शीर्षक) मणिपुर आउटपोस्ट पर हमला सीआरपीएफ के दो लोग मारे गये। मुख्य मंत्री के सुरक्षा सलाहकार ने कहा, केंद्रीय बलों को पहली बार इस तरह निशाना बनाया गया है। अमर उजाला में उपशीर्षक है, हमलावरों ने पहाड़ों की चोटियों से बरसाईं गोलियां, बम फेके, शिविर को बनाया निशाना। अखबार ने इसके साथ मुख्यमंत्री का बयान छापा है, बलिदान व्यर्थ नहीं जायेगा।

तथ्य यह है कि मारे गये दो सुरक्षाकर्मियों में एक सब इंस्पेक्टर और दूसरा हेड कांस्टेबल है। इन्हें जवान नहीं कहा जा सकता है भले अधिकारी कहने में दिक्कत हो। और यही सभी शीर्षक से झलकता है। मुझे लगता है कि आम तौर पर ऐसी स्थिति में अधिकारी बताना जरूरी या मकसद नहीं हो तो सुरक्षाकर्मी लिखा जाना चाहिये पर अखबारों में यह अभी भी तय नहीं है या जो तय है उससे जरा सा भी मामला अलग हो जाने पर कुछ अखबार चीखने लगते हैं, निर्देश नहीं मिला। मणिपुर के मामले में यह संभव है और इसी लिए यह खबर सिंगल कॉलम से लेकर लीड तक सब है। कहा जा सकता है कि सरकार की प्रशासनिक कमजोरी से संबंधित इस खबर की प्रस्तुति को लेकर यह भिन्नता है। आइये अब चुनावी खबरों की प्रस्तुति देख लें।

टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक हिन्दी में इस प्रकार होगा, संविधान बदलना तो कांग्रेस चाहती है : प्रधानमंत्री। ओबीसी का कोटा लूटकर मुसलमानों को दे देगी। हिन्दी में असल में क्या कहा है वह मुझे नहीं मिला। इसके दो मतलब हैं या तो हिन्दी पट्टी से बाहर कहा होगा या फिर हिन्दी वालों ने इस दावे को महत्व नहीं दिया। वैसे यह दावा जो है सो है। इसके साथ दो सिंगल कॉलम की खबरें हैं उससे आप अनुमान लगा सकते हैं कि आज टाइम्स ऑफ इंडिया ने राजनीतिक या चुनावी खबरों को कैसा महत्व दिया है। सिंगल कॉलम की छोटी खबर पहले है। उसका शीर्षक है, “भाजपा संविधान बदलेगी, लोगों को उनके अधिकारों से वंचित करेगी : प्रियंका”। तीसरी खबर का शीर्षक है, 26/11 अभियोजक उज्ज्वल निकम को भाजपा टिकट मिला।

द हिन्दू ने इसे पहले पन्ने पर दो कॉलम में छापा है। शीर्षक है, मुंबई नॉर्थ सेंट्रल सीट उज्ज्वल निकम अंदर, पूनम महाजन बाहर। अमर उजाला में शीर्षक है, कसाब को फांसी दिलाने वाले वकील (उज्ज्वल) निकम भाजपा प्रत्याशी। यहां इसपर उनका बयान भी है, सौभाग्यशाली हूं, देश सेवा का मौका मिला। द टेलीग्राफ के शीर्षक से पता चलता है कि राजनीति के लिहाज से मामला इतना सीधा नहीं है। शीर्षक है, कसाब के अभियोजक के लिए महाजन का टिकट कटा। इसलिए, मामला देश सेवा का हो या नहीं, जीतने की संभावना का ज्यादा है। पूरी तरह राजनीति हो तो कुछ कहा नहीं जा सकता है। आपको याद दिला दूं कि अजमल कसाब पाकिस्तानी आतंकवादी था जो 26/11 के मुंबई हमले में जिन्दा पकड़ा गया था और विधिवत मुकदमा चलाने के बाद फाँसी पर चढ़ा दिया गया था। उज्ज्वल निकम उस मामले में सरकारी वकील थे और यह बयान देकर सनसनी फैला दी थी कि यरवदा जेल में बंद कसाब को जेल में बिरयानी खिलाई जा रही है। निकम के उस बयान के बाद देशभर में लोगों का गुस्सा केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर फूटा था और कांग्रेस पर पाकिस्तान तथा मुसलमान परस्त होने के आरोप लगाये गये थे।  बुलडोजर न्याय वालों ने प्रक्रिया के पालन के बावजूद कांग्रेस सरकार के खिलाफ माहौल बनाया था और उसके सबसे बड़े कलाकार को अब भाजपा ने अपना प्रतिनिधि बनाया है। नवोदय टाइम्स में यह खबर पांच कॉलम में बॉटम है। शीर्षक अमर उजाला जैसा ही है, कसाब को फांसी दिलाने वाले वकील भाजपा उम्मीदवार। 

यहां उल्लेखनीय है कि बाद में निकम ने खुद क़बूल किया था कि न तो कसाब ने कभी बिरयानी माँगी थी न कभी उसे बिरयानी दी गई थी। उन्होंने लोगों का ध्यान भटकाने और भावनाएँ भड़काने के लिए यह झूठी कहानी गढ़ी थी। इस बात की पुष्टि पुणे की तत्कालीन पुलिस कमिश्नर मीरा बोरवनकर ने भी अपनी किताब, “मैडम कमिश्नर” में की है। इस तरह, कसाब को बिरयानी खिलाए जाने की झूठी कहानी गढ़ने वाले वकील उज्ज्वल निकम को भाजपा ने उत्तर मध्य मुंबई से उम्मीदवार बनाया है। इसके लिए पार्टी ने अपने नेता दिवंगत प्रमोद महाजन की बेटी पूनम महाजन का टिकट काट दिया है। (वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ श्रीवास्तव की फेसबुक पोस्ट से)।

हिन्दुस्तान टाइम्स ने भी एक चुनावी खबर को लीड बनाया है। शीर्षक है, विपक्ष ‘भारत विरोधी ताकतों’ को मजबूत करेगा: मोदी”। नवोदय टाइम्स की लीड है,कांग्रेस झूठ की ‘विशेषज्ञ’ और  आप (आम आदमी पार्टी) ‘सरदार’ : शाह”द हिन्दू की पहले पन्ने की खबर के अनुसार अरविन्द केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर करके आरोप लगाया है कि केंद्र सरकार चुनावी क्षेत्र में अपनी प्रतिस्पर्धा को कुचलने के लिए ईडी का उपयोग कर रही है। इसपर सोमवार को सुनवाई होनी है। द टेलीग्राफ की आज की लीड का शीर्षक है, दूसरे दौर में कम मतदान के बाद नया स्पिन। इसका फ्लैग शीर्षक है, मोदी कल्याणवाद के नारे पर जोर दे रहे हैं

द टेलीग्राफ का आज का कोट ममता बनर्जी का है। उन्होंने कहा है, बंगाल में एक पटाखा भी चल जाये तो एनआईए, सीबीआई या एनएसजी जांच के लिए चली आ रही है। ऐसा लगता है जैसे युद्ध चल रहा है। तो आइये अब बंगाल की राजनीति से संबंधित आज की खबरें देखते हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स की दो कॉलम की खबर का शीर्षक है, संदेशखली में छापों (और बरामदगी) के बाद टीएमसी चुनाव आयोग पहुंची। द हिन्दू में चार कॉलम में छपी खबर का शीर्षक है, संदेशकली में जब्त सामा सीबीआई का ही लाया होगा : ममता”नवोदय टाइम्स में शीर्षक वही है जो हिन्दू में है। यहां शीर्षक है, ममता का आरोप, जांच एजेंसी ने प्लांट किये संदेशखली में सामान

आज एक और खबर के दिलचस्प शीर्षक हैं। मैं दो ही उदाहरण दे रहा हूं। द हिन्दू में शीर्षक है, उत्तराखंड के जंगलों में आग से 140 हेक्टेयर्स से ज्यादा बर्बाद। इस खबर का उपशीर्षक है, वायुसेना ने हेलीकॉप्टर तैनात किये क्योंकि नैनीताल के पास उसके बेस को आग से खतरा था। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आग बुझाने में सहायता के लिए सेना को बुलाया गया है। 72 घंटे में आग की 108 घटनाओं की रिपोर्ट मिली। अमर उजाला में इसी खबर का शीर्षक है, उत्तराखंड के जंगलों में आग बुझाने में जटा वायुसेना का हेलीकॉप्टर। सेना को भी लगाया गया … प्रदेश में 23 और जगह लगी आग …. कुमाऊं के 16 स्थान शामिल।  इसी तरह द हिन्दू में एक खबर है, भाजपा की अल्पसंख्यक शाखा के बर्खास्त नेता को गिरफ्तार किया गया। इंडियन एक्सप्रेस में इसका शीर्षक है, प्रधानमंत्री की टिप्पणियों की आलोचना करने वाले भाजपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पूर्व प्रमुख को पुलिस ने रोका। कहने की जरूरत नहीं है कि हिन्दू की खबर विवरण अंदर होने की सूचना है औऱ एक्सप्रेस के शीर्षक से लगता है कि खबर पहले पन्ने की है। मैं प्रस्तुति के इसी अंतर को रेखांकित करना चाहता हूं और आज ऐसे कई मामले हैं जो बहुत स्पष्ट हैं।     

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