दैनिक भास्कर प्रबंधन नीचता पर उतारू, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कर्मियों के खिलाफ थाने में झूठी शिकायत

दैनिक भास्कर कोटा में मजीठिया वेज बोर्ड के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने पर प्रबंधन द्वारा किए जा रहे दमनात्मक कार्यवाहियों का सिलसिला थमा नहीं है. पांच छह कर्मियों को आफिस आने से मना करने के बाद अब इनके खिलाफ प्रिंटिंग मशीन खराब करने की शिकायत स्थानीय थाने में दर्ज कराई है. इससे कर्मचारियों में रोष फैल गया. सभी आंदोलनकारी कर्मचारियों ने प्रबंधन की इस नीचता के खिलाफ एकजुट रहने और आखिरी दम तक लड़ने का संकल्प लिया है. इस बीच भास्कर प्रबंधन ने अपने सभी विभागों के राजस्थान हेड को कोटा भेज दिया है और संकट से निपटारे की कोशिश शुरू कराई है.

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के साथ बैठक के बाद ग्रुप फोटो खिंचाते दैनिक भास्कर कोटा के हड़ताली मीडियाकर्मी.

 

भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह के साथ बैठक कर आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श करते दैनिक भास्कर कोटा के मीडियाकर्मी.

भास्कर के वरिष्ठ पदाधिकारी एक-एक हड़ताली कर्मी से मिलकर फोन कर काम पर आने का अनुरोध कर रहे हैं. कर्मियों में सबसे ज्यादा गुस्सा उस लेटर पर जबरन साइन कराने को लेकर है जिस पर लिखा गया है कि मुझे किसी ने बरगला कर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करवा दिया है और मैं इसे वापस ले रहा हूं. मजीठिया वेज बोर्ड न देने वाला भास्कर प्रबंधन अब सुप्रीम कोर्ट जाने पर कर्मचारियों से जबरन लिखवा रहा है कि उन्हें बहला-फुसला कर कोर्ट ले जाया गया. इसके पहले मजीठिया नहीं चाहिए वाले कागजात पर कर्मचारियों से साइन कराए थे. भास्कर प्रबंधन के ऐसे बेवकूफी भरे कदम पर सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट उमेश शर्मा का कहना है कि इस तरह के अनैतिक पत्रों पर जबरन साइन कराने से सुप्रीम कोर्ट में भास्कर को कोई राहत नहीं मिलने वाली है. अब तो भास्कर को सुप्रीम कोर्ट में शपथपत्र देना होगा कि उसने सभी कर्मियों को मजीठिया दे दिया है. अगर उसका शपथ पत्र झूठ निकला तो सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर भास्कर के मालिकान जेल जाने को तैयार रहें.

इस बीच, भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह ने कोटा पहुंचकर हड़ताली कर्मियों के साथ बैठक की. उन्होंने कर्मचारियों के साथ आगे की रणनीति पर विचार-विमर्श कर भास्कर प्रबंधन से निपटने की ठोस योजना बनाई. यशवंत ने कर्मचारियों से कहा कि वे कागज-पत्तर के मामले में ठोस रहें. रोजाना वह आफिस जाने और आफिस के भीतर न घुसने देने की मेल से शिकायत भास्कर के मालिकों सहित वरिष्ठ पदाधिकारियों, मैनेजरों से करें. इसकी एक कापी लेबर कोर्ट से लेकर पुलिस थाने में दें. यशवंत की सलाह पर भास्कर कोटा के हड़ताली कर्मियों ने स्थानीय थाने में पहले ही शिकायत दर्ज करा दी थी कि भास्कर प्रबंधन उन लोगों पर झूठे आरोप लगा सकता है और उनके जान-माल का नुकसान करा सकता है. इस आवेदन के कारण भास्कर प्रबंधन द्वारा मशीन खराब करने की थाने में की गई कंप्लेन की हवा निकल गई है.

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Comments on “दैनिक भास्कर प्रबंधन नीचता पर उतारू, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कर्मियों के खिलाफ थाने में झूठी शिकायत

  • यश गुप्ता says:

    दैनिक भास्कर कोटा के सभी कर्मचारियों की हिम्मत को सलाम। आपकी एकता का ही कमाल है कि अब अपने अधिकारो की लड़ाई लड़ने का निर्णायक वक़्त आ गया है। देशभक्त में अपनी चुनावी रणनीतियों का डंका बजानेवाले 56 इंच की छाती वाले भाई साहब से जरा पूछिए की वो मौनी बाबा क्यों बने हुए है। कोटा की तासीर है…सिर कटा सकते है लेकिन सिर झुक सकते नहीं। आंदोलन को पत्रकारिता के केजरीवाल आदरणीय यशवंतजी का साथ मिलना किसी दिव्या पुण्य प्रताप से कम नहीं। में ईश्वर से मालिको की आत्मा को मजीठिया नहीं देने तक शांति नहीं देने की प्रार्थना करता हू। साथियों अब अपने आंदोलन से कोटा के बच्चे को जोड़ने का समय आ गया है। सत्य परेशां हो सकता है,पराजित कभी नहीं।

    जय हिन्द

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  • जुलाब कोठारी says:

    एक्शन प्लान तैयार, कमांडो कार्रवाई का इंतज़ार

    पत्रिका समूह ने मजीठिया संकट से पार पाने के लिए कुछ रणनीतियां बनाई है। इस बार वन टू वन का प्लान है। कंपनी के सारे तथाकथित विश्वस्त गुर्गे बड़ी ही ख़ामोशी के साथ कदम बढ़ा रहे है। एक तरफ वकीलो की फ़ौज़ तिकडम भिड़ा रही है कि कैसे GK को जेल जाने से बचाया जाए तो दूसरे छोर पर सारे थकेले,आउटडेटेड,कामचोर, पिस्सू अफसरान अलग अलग संस्करणों में फ़ोन करके पता करने का प्रयास कर रहे है कि आखिर आंदोलन की वजह क्या है, कौन कितनी ताकत से उसका नेतृत्व कर रहा है। किसके मुह पर नोट मारने से काम चल जायेगा,कौन नोट सूंघते ही बेहोश हो जायेगा। बचे हुए फौलादियो को पिघलने में कितना लौहा लगेगा। लोगों को समझाया जा रहा है कि उनका carrier दांव पर लग जायेगा, आज पैसा मिल जायेगा पर कल कंपनी बम पर लात मार देगी। बीवी बच्चों का क्या होगा?
    यही नहीं देशभर से छांटें हुए भ्रष्ट, मक्कार सीए,मार्केटिंग और एडिटोरियल के भेड़िया छाप प्रोफेशनल्स की मुंहमांगे दामो पर सेवाएं ली जा रही है ताकि वे मौका देख हंटर चला सकें। दरअसल शुरुआती डेमेज कण्ट्रोल में ही दोनों निकम्मे राजपुत्रों का इस सच से साक्षात्कार हो गया कि बड़े पदों से चिपके चाटुकारों का कौई जनाधार नहीं है। वे कर्मचारी ही रीढ़ की हड्डी है जिन्होंने विरोध का किल्ला ठोका है उनका तम्बू उखाड़ने के लिए।

    मैनेजमेंट की इस चिर्कुटी बिसात पर अदना सा कर्मचारी तक दुलत्ती मार कर सीना ठोके ताली दे रहा है….अरे ओ सेठ के गुलामो…मुझे 5 लाख नहीं चाहिए…मै तो एक बार…उस 56 इंच की कमरवाले को तिहाड़ जेल में ….”मै ही राधा,में ही कृष्ण” की धुन पर सपरिवार ता..था..थाई..या करते देखना चाहता हूँ। मजीठिया देने में तुम जितनी देर करोगे,तुम्हारी सजा उतनी ही बढ़ती जायेगी। 6 महिने पहले तुम मेरे पास आकर रो लेते तो मै मान जाता लेकिन अब तो मै रुलाउंगा भी, चपत भी लगाउँगा, पाई पाई ब्याज सहित वसूलूंगा………..।
    इधर, मजीठिया परिवार के जिंदादिल साथियो को अल्लाह के रहमोकरम का इंतज़ार है। इस बार होली पर दीवाली और ईद सी खुशियां मनाएंगे क्योंकि 2015 में अप्रैल फूल बनाने का मौका सेठ के हाथ से निकल गया है।

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  • भास्कर कोटा का प्रबंधन बुरी तरह घबराया हुआ है. सोमवार को हड़ताल कर रहे कर्मचारियों को वार्ता के लिए बुलाया है. उधर संपादक विजय चौहान कर्मचारियों पर अपनी भड़ास निकाल रहा है. पेट्रोल के फर्जी बिल उठाने वाला हर माह दस हजार से भी ज्यादा का कम्पनी को चूना लगाकर अपने को कम्पनी का वफादार साबित कर रहा है।

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