गाजियाबाद में एसओ ने पत्रकार का कैमरा छीना, मारापीटा, पीएम और सीएम से कार्रवाई की फरियाद

‘सतर्क दृष्टि’ के संपादक तौसीफ हाशमी ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, यूपी के मुख्यमंत्री, गाजियाबाद के एसएसपी, डीआईजी मेरठ जोन, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, मानवाधिकार आयोग, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया एवं गृह मंत्रालय भारत सरकार को प्रेषित पत्र में एक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए पर्दाफाश किया है कि किस तरह पुलिस देह व्यापार को संरक्षण दे रही है। उन्होंने विजयनगर क्षेत्र (गाजियाबाद) में मुस्लिम नाबालिग लड़की को बेचे जाने के आरोपों की जांच करा कर विजयनगर थाने के एसओ व अन्य पुलिसकर्मियों या दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।

उन्होंने अपने प्रार्थनापत्र में अवगत कराया है कि ”वह शिक्षित मुस्लिम परिवार का एक ईमानदार पत्रकार है। गाजियाबाद के विजय नगर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में रहकर समाज के लोगों के दुखदर्द में साथ रहता है। विगत 26 जून 2015 को रात लगभग 11 बजे उसको सूचना मिली कि मुस्लिम समाज के एक परिवार की नाबालिग लड़की को उसकी कथित मां और कुछ लोग दूसरे समुदाय के कुछ लोगों को बेचने की कोशिश कर रहे हैं। इसकी शिकायत लेकर आने वाले लोगों को सलाह दी कि आप इस मामले में पुलिस को सूचित करो और मामले की शिकायत  करो। लड़की के भाई ने बताया कि यह मामला तो पुलिस के संरक्षण में ही अंजाम दिया जा रहा है। विजय नगर पुलिस के एसओ विशेष रूप से पूर्व में क्षेत्र में वेश्यावृति और कई प्रकार के अवैध धंधों को संरक्षण देते रहे हैं। 

”इसके बाद स्थानीय लोगों के आग्रह पर मैं विजय नगर थाने पहुंचा, जहां पहले से ही सैंकड़ों लोग जमा थे और पुलिस के खिलाफ नाराजगी का इजहार कर रहे थे। मेरे द्वारा लोगों को समझाने और पुलिस से बात करने का आश्वासन देने के बाद जब मैं वहां अपने वीडियो कैमरे सहित एसओ श्री हरिदयाल सिंह यादव के पास पहुंचा तो वह मुस्लिम समाज के लोगों को गालियां देते हुए कह रहे थे कि मुल्ले, तुम फिर आ गये। जब मैं उनकी इस गाली गलौज और अभद्रता को रिकार्ड करने लगा तो उन्होंने सीधे तौर पर मुझपर हमला बोल दिया और कहा कि अबे तेरी हिम्मत कैसे हुई मेरी रिकार्डिंग करने की। तू मुझे जानता नहीं है। और मेरे हाथ से कैमरा छीन लिया। थाने में एसओ हरिदयाल सिंद यादव, अवधेश यादव, ओसान सिंह यादव और सचिन नाम के पुलिसकर्मियों ने मेरे साथ मारपीट शुरू कर दी और मेरे कपड़े तक फाड़ डाले। उन्होंने जोर जोर से कहना शुरू किया कि आज इस पत्रकार को सबक सिखाना है, और इसके हाथ पैर तोड़ने हैं। इसके बाद बड़ी मुश्किल से मैंने भागकर अपनी जान बचाई।  

” इस बीच हरिदयाल सिंह यादव ने कहा कि समाजवादी सरकार मुल्लों के बाप की सरकार नहीं है। यह थाना मेरा है और मैं मुलायम सिंह यादव और बलराम यादव के परिवार का आदमी हूं। मेरे थाने में मेरी मर्जी के बगैर कुछ नहीं होगा। यहां पत्रकारों का मेरी मर्जी के बगैर आना नामुमकिन है। हरिदयाल ने भरी भीड़ में पूरे मुस्लिम समाज को गालियां देते हुए हुए कहा कि अबे क्या मिर्जापुर कांड और हाजी सईद कांड भूल गये। चुपचाप यहां से चले जाओ, नहीं तो अभी मलियाना बना दूंगा। 

” आपको याद दिला दें कि वियज नगर थाने के एसओ हरदयाल पूर्व में भी मुस्लिम समाज को लेकर अपनी कुंठा का परिचय दे चुके हैं। इससे पूर्व पुलिस की लापरवाही और एक गड़रिये की हत्या के विरोध में जनता के विरोध के दौरान इसने मिर्जापुर में पुलिस बर्बरता का खेल खेला था। रात को पूरे मुस्लिम बहुल गांव को घेरकर लाठियां बरसाईं गईं और सैकड़ों लोगों को जेल की हवा खिला दी गई थी। इसके बाद हाल ही में समाजवादी पार्टी के एक नेता हाजी आसिफ चौधरी के 85 साल के बुजुर्ग पिता हाजी सईद की हरिदयाल सिंह यादव ने दाढ़ी पकड़कर मारा पीटा था। इसकी शिकायत आप (मुख्यमंत्री) सहित सभी जगह की गई थी लेकिन हरिदयाल सिंह यादव के रसूख के आगे किसी की नहीं चली थी। 

”इसी सब के चलते हरिदयाल सिंह यादव व उसके साथ कुछ अन्य पुलिस कर्मियों का दुस्साहस लगातार बढ़ता जा रहा है। वर्तमान में हरिदयाल व इन जैसे कुछ लोगों की करतूत से समाजवादी पार्टी की सरकार में मुस्लिम समाज अपने आपको असुरक्षित महसूस करने लगा है। अनुरोध है कि इस मामले में हरिदयाल व उसके साथ उपरोक्त पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए इनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई के आदेश किये जाएं और मुझसे लूटा गया कैमरा मुझको वापस दिलाया जाए।

– तौसीफ हाशमी, संपादक सतर्क दृष्टि” 



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Comments on “गाजियाबाद में एसओ ने पत्रकार का कैमरा छीना, मारापीटा, पीएम और सीएम से कार्रवाई की फरियाद

  • yah kahan ka patrkar hai. yah tosif hasmi ek number ka dalal ha. 4 line likhkar dikha de isko aaj hi ham bhi patrkar man lenge. copy paste ke dam par dalali ka khiladi. camera kisi nahi loota iska.

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  • ha ha toseef hasmhi ab inko bhi patrkar kaha jane laga hai dallah aik number ka dekhne se hi kapti lagta hai oh kiya din aa gaye patrkarita ke

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  • मुल्ला पत्रकार जी आप क्यों मुल्ला समाज की ही केवल पैरवी करते दिख रहे है। ऐसा लगा रहा है पत्रकारिता कम दलाली ज्यादा यानी धर्म विशेष पर काम करने वाले आप है। आप जैसे लोग ही पत्रकारिता की मान मर्यादा को ताक पर रख के फर्जी पत्रकार का चोला थाम कर समाज को बेचने का काम करते है। शर्म करों मुल्ला साहब पत्रकारों को काम करने दो। फर्जी आदत क्यों डालते हो। आप हिन्दू समाज के दर्दो को कभी उठाया नही तो किस बात का पत्रकार है। 🙂

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  • आज़ाद खालिद says:

    भड़ास पत्रकारों का एक ऐसा मंच है जहां खुलकर अपनी कहना पत्रकारों के लिए आसान है और जहां उनके दुख दर्द की बात समय समय पर की जाती रही है। इसके लिए विशुद्ध रूप से भाई यशवंत बधाई के पात्र हैं।कभी कभी इसी मंच पर पत्रकारों के साथ होने वाले अत्याचार भी सामने आते हैं। ऐसे मेंं उम्मीद यही की जाती है कि हमारे पत्रकार साथी उचित मार्गदर्शन करते हुए अपने साथ के दुख को बांटने की कोशिश करेंगे। लेकिन इस बार मेरे कुछ साथियों का पत्रकार तौसीफ हाशमी के साथ हुए मामले पर कमेंट देखकर उनसे मुखातिब होने का मन कर रहा है। तो मेरे प्रिय साथी भाई अमित, एस. साह, इमरान जी और भाई रमेश, आपके अनुसार तौसीफ हाशमी दलाल हैं और वह पत्रकार भी नहीं हैं। तो क्या आपका मत है कि उनके साथ यही होना चाहिए था। एक दरोगा उनके साथ ऐसा करे या जला कर मार दे। साथ ही पत्रकार होने का क्या पैमाना है? मैं आपसे आपके संस्थान या आपकी पत्रकारिता या आपकी शैक्षिक योग्यता के बारे में कुछ कहने का भी दुस्साहस नहीं करूंगा। आप मेरे सम्मानित साथी हो….लेकिन क्या आपके द्वारा उठाए गये सवाल उचित समय पर उठाए गये हैं? क्या आपको नहीं लगता है कि अगर तौसीफ की जगह आप होते और कोई दरोगा आपकी यह हालत करता तो आपको क्या महसूस होता? रहा सवाल भाई रमेश और अमित भाई के सवाल का… कि मुल्ला पत्रकार है तौसीफ हाशमी…. इसको लेकर न सिर्फ मुझे निजी तौर पर ऐतराज़ है बल्कि शायद पत्रकार जगत तो भी… मैंने वर्ष 2002 में सहारा के अपने कार्यकाल और इसके अलावा दूसरे कई चैनलों में काम करते हुए देशभर में काफी लोगों को नौकरी पर रखवाया…. ठीक उसी तरह जैसे मुझे किसी ने नौकरी पाने में मदद की… गाजियाबाद से जब मैनें अनुज चौधरी को सहारा में और संजय शाह इंडिया टीवी में बतौर स्ट्रिंगर रखवाया तो कभी मेरे मन .में ये सवाल नहीं आया कि ये तो पंडा है। क्योंकि मुझे भी जब किसी ने रखवाया तो वो हिंदु भाई तो था… मगर उसने मुझे कभी मुल्ला नहीं समझा। अनुज चौधरी को जब मैनें सहारा के लिए स्ट्रिगर के तौर पर रखा… तो बाद में यहां के कई लोगों ने …उनमें से कई हिंदु भाई ही थे… कहा कि ये तो हत्या के मामले में फंसा हुआ है… क्रिमनल बैक ग्राउंड का है। इतना ही नहीं जब एक बार पुलिस अनुज चौधरी को गिरफ्तार करने के लिए पीछे प़डी और इनके बेहुनाह पिता को उठा कर ले गई तो यही मुल्ला यानि मैं न सिर्फ उसके साथ खड़ा रहा। इसी तरह जब संजय शाह को इंडिया टीवी में बतौर स्ट्रिगंर रखा तो उनको लेकर कई तरह के आरोप सामने आये…मगर और जब वो एक दिन एक जगह से उहागी करते हुए बाकायदा रंगे हाथों रकम के साथ पकड़े गये तो लगा कि कहीं हमसे चूक तो नहीं हो गई। लेकिन इंडिया टीवी में वो आज भी मौजूद हैं ये दोनों मेरे लिए मेरे छोटे भाई की तरह हैं। ये लोग अपने ईमान से कह दें कि कभी उन्होने हमें या हमने उन्हे हिदुं मुसलमान की नजर से देखा है। तौसीफ हाशमी को लेकर अगर किसी को लगता है कि वो मुल्ला पत्रकार है तो इसका मतलब ये हुआ कि रमेश जी जैसे लोग तो… जल कर मरे पत्रकार जगेंद्र के मामले की लड़ाई में मुस्लिम पत्रकारों को मुल्ला कर भगा ही देते। माफ करना रमेश भाई…. अभी ऐसे दिन नहीं आए हैं…. भारत की यही तो सुंदरता है कि ईद पर रमेश खुश हो और दीवाली पर तौसीफ झूमे। रहा सवाल दलाल होने का तो आज सभी तय कर लें कि अपने अपने शहर के दलाल पत्रकारों की सूची जारी करें। भड़ास पर सबूतों के साथ सभी दलालों की सूची भेजो। लेकिन उसके बाद उन दलालों को छोड़कर जिस जिस दिन कोई दरोगा या कोई गुंड़ा किसी पत्रकार को तंग करे…. तो भाई उसके साथ खड़े हो जाना, ताकि तुम्हारा अस्तित्व भी बचा रहे। और हां ईमानदार होने के लिए बहुत बड़ा हौंसला और बहुत बड़ा दिल चाहिए। जबकि किसी दूसरे पर उंगली उठाने के लिए महज एक इशारा। हम ये भी समझ रहे हैं कि ये दर्द किस लिए है…अभी तक पत्रकारिता की आड़ में शहर में चल रही कुछ दुकानों को इस बार तौसीफ ने पूछा नहीं..अब इसकी कीमत तो तौसीफ को चुकानी पड़ेगी ही…!,
    (आपका आजाद खालिद)

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  • noushad malik says:

    sanjay ji kya ab dlali ka certificate bhi batne lage trans hindon me kya hua tha tumhare sath yad kro jab tumhara aina dekhne ko bhi man nhi karta tha

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  • noushad malik says:

    tumhare bujurgo ne muglo ki gulami ki h tumne mullao ki apne bujurgo ka nam aise nhi lete bete ramesh varna body me ek -do hole badh jate h rhi bat hinduo ki ham unse behad mohabbat karte h lekin tum use bhi love jihad kahne lagte ho

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  • ahmed teli says:

    rmesh jee,sanjay sah jee,aur imran bhai and amit jeeapke jariye badhas4media.com per bhai toshef hashme jee ke bare me comment s padhe jise padhker bhut dukh huwa samjh nahi pa raha hun ki app ne jo comments kiya he us ke peche app ka maksad kya he app kya sandesh dena chahte hain ye bhe samjuh se pare he jopater kar hone ke nateapko sobha nahe deta ,aisa lagta he app sab logon ne ghaziabad ke un tamam paterkaron ko apne office me chair per beth ker cirtefecat jare karne ka theka le liya he .kon paterkar dalal he kon paterkar nahi is bare me appki rai le j lee jay to bah ter he3 mera ppko mashwera he ki dusron per ungliyan uthane se pahle apne kirdar ko dekhen log appke bare me kya raye rakhte hain usako jane to bahter hoga .samjhdar ke liye ishahra bhut he gahrai me jane ki jarorat nahi he

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  • vijay bhati says:

    Tosif hasmi me kuch vidwano ne apne vichar rakhe or vorho se joda gaya jab ki patrkar sabhi vargo ke liye ek saman drsthi se dekhta hai kaam karta hai kuch apne apko vidhwan kehne wale patrkaro ne apni hi biradri ke logo par kichad uchale se bhi nahi chuke wah desh or samaz ka kya bhala kar sakte hai. late gajender ke mamle main sabhi patkaro ne apni ek jutta ka parichy dete huy bhrest police prasasan ke khilf ek jutta ka parichay diya tha or maag ki wahi es parkar me logo ka najarya kyo badal gaya.

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  • ahmed teli says:

    patrkar tosif hasmi ke bare me kuch bhi likhne se pehle unke vyaktigat jivan ko samjhna bahut hi jaruri hai bina soche sanjhe unke charitra par ungliya uthana chand ko dhool dikhane ke barabar hai chuki aisa karne se chand maila nahi ho jata jis tarah chand maila nahi hota ishi tarah tosif hasmi ko sehar ki chand broker jurnilist ke jariye dalali ka tamga dene se koi fark nahi padta aise tamam logo ko mera mashwara hai ke dusre par ungliya uthane se phle apne kirdar ko chach parkhe or dekhe ki samaj me logo visshkar patrkar jagat ke log kya rai rakhte hai.dusri vishesh baat ye hai ki kisi dukhi ki awaaz uthana bhali wo kisi bhi jaati or dharam se sambandh raktha ho patrkar ka naitik daitwa banata ha or jo log aisa karne wolo ka hosla badhane un par kichad uchale ka kaam karte hai wo patkarita jagaat ke naam par kalank hai unhe patrkar kehlne ka koi haq nahi hai mera hasmi ji ko maswara hai ke aishe aroopo se ghabrakar kadam piche hatane jarurat nahi hai ghaziabad ke patrkar aapke saath hai or is tarah ki gundagardi karne walo ka muh tod jawab dene ke liye tyaar hai wo apni ladai jari rakhe hamari jabhi bhi jarurat ho ek aawaz de hum apne tamaam sathiyo ke saath unke kandhe se kandha milakar chlne ko tyaar hai.

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  • vijay bhati says:

    Toshif hasmi stark drsti ke sampadak niwashi vijay nagar ek gareeb ladki ko bikne se bachaya or kanooni roop se uski madad karni chai.to police prasasan ko ye baat nagawar gujri or unke camre kali kartoot kaid thi usko tood diya gaya or samaj wadi parti ke mantri balram singh yadav ke bhatije kehlale wale hardayaal singh yadav ne apni agreez virodh karne par daman niti ko apnate the ishi cheez ko aaj 69 varsh baad bhi police apna rahi hai.sampadak tosif hasmi ne thane main hi unke gunahoo se parda utha diya.s o satta ke maad main choor hardayal yadav ko laga ki ye meri kurshi ko hila dega or jo hum yaha badmasho gundo mawaliya ka saath dekar samaz ke logo se chandi kaat rahe hai wo ab nahi kat payegi.or hamari satta ka kya fayeda yedi humne ab mouz nahi li to kab lenge.ye to police ki barbarta ka mamla pehle nahi is se pehle bhi har roj koi na koi mamla samne aata rehta hai .or roj in vardi dharya se roj patrkaro ko 2 4 hona padta hai.kuch tatakathit patrkar jo police ke tukdo par palte hai unke avgno ka gungaan karte hai.ve mazhab ki baatin kar kar logo ko ladane ka bhi mansooba rakhte hai.mazhab ye nahi sikhata apas main bair rakhta hindi hai hum hindosta humara.

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