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आज के अखबार : CBSE पोर्टल शुरू नहीं हुआ, PM कर रहे निगरानी, शिक्षा मंत्रालय अब कार्रवाई कर सकता है

Newspaper front page with a bold political headline about rigged seats; includes a photo of a woman at a press conference and multiple columns of article text
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संजय कुमार सिंह

कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने देश में शिक्षा को धंधा बना दिया है। देशबन्धु की आज की लीड का शीर्षक है, धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर कांग्रेस ने मोदी सरकार व भाजपा को घेरा। सीबीएसई की गलती की जांच कराने के लिए छात्रों से पैसे वसूले जाने को राहुल गांधी ने जेबकतरों का काम बताया है। एक्स पर अपनी एक पोस्ट, जेबकतरों से सावधान में उन्होंने लिखा था कि सीबीएसई की गलती से नंबर गलत आए तो छात्रों को कॉपी के डिजिटल स्कैन का 100 रुपए प्रति विषय, फिर से अंकों को जोड़ने का 100 रुपए प्रति विषय और पुनर्मूल्यांकन का 25 रुपए प्रति सवाल देना होता है। कहने की जरूरत नहीं है कि किसी भी परीक्षा के मूल्यांकन में गलती नहीं होनी चाहिए, गलतियां होती हैं यही शर्मनाक है, जांच और पुनर्मूल्यांकन की व्यवस्था का मतलब इसे स्वीकारना, गलतियां मिलना मतलब कोई शक नहीं रहना और इस सब के पैसे वसूलना – जेब काटना हो या नहीं, धंधा तो जरूर है। पर सीबीएसई करता है और नए ऑन स्क्रीन मूल्यांकन के बाद ढेरों गलतियां हैं। पहले की खबरों के अनुसार सीबीएसई का सिस्टम इन गलतियों की जांच के पैसे लेने में भी गलतियां करता रहा है और छात्रों को लाखों के बिल ठोंक चुका है। आज अमर उजाला में छपी खबर के अनुसार, सीबीएसई पोर्टल शुरू नहीं हुआ है। खबर के अनुसार सोमवार को शुरू होना था लेकिन रात 12 बजे तक नहीं हुआ था। नवोदय टाइम्स में यह खबर तीन कॉलम की लीड है, लगभग ऐसे ही शीर्षक से। अखबार ने यह भी बताया है कि छात्रों ने स्क्रीन शॉट शेयर करके शिकायत की है। दि एशियन एज में इस खबर का शीर्षक है, सीबीएसई का पोर्टल नतीजों के बाद भी ठीक से काम नहीं कर रहा है और छात्र मुश्किल में हैं।

खबर में नहीं है और शायद जरूरत व रिवाज भी नहीं है लेकिन पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार कक्षा 12 के परिणाम 13 मई को घोषित हुए थे। 19–22 मई तक स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका प्राप्त करने के लिए आवेदन किया जाना था। सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन 26–29 मई के दौरान किया जाना था। इस बार डिजिटल मूल्यांकन हुआ और ऑन स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) का व्यापक उपयोग हुआ। इसका पता तब चला जब छात्रों को गलत या अधूरी उत्तर पुस्तिकाएँ मिलने की शिकायतें आईं। पोर्टल के काम न करने और तकनीकी गड़बड़ियों की भी शिकायतें हुईं। 26–29 मई की मूल समय-सीमा लागू नहीं हो सकी। मजबूरन सीबीएसई ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाया और नई तिथि एक जून बताई गई थी। इसी की खबर ऊपर है। शिकायतें 19 मई से ही आने लगी थीं। फिर भी, 26–29 मई के दौरान निर्धारित पुनर्मूल्यांकन अवधि के दौरान छात्रों को स्पष्ट जानकारी भी नहीं दी गई। तनाव, परेशानियों, अनिश्चितता के बावजूद किसी के खिलाफ कार्रवाई की कोई खबर नहीं है। शिक्षा मंत्रालय के तहत होने वाली दूसरी परीक्षा में भी पहले से चल रही गड़बड़ियों और प्रश्नपत्र लीक होने के कारण शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग रही लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। इस दौरान यह भी खबर रही कि शिक्षा मंत्री की बेटी के फोन का खर्च सरकारी कंपनी ने उठाया था।

मंत्री के इस्तीफे की खबर तो नहीं है आज अमर उजाला में छपी खबर के अनुसार सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सरकार युवाओं की चिन्ता को लेकर गंभीर है। प्रधानमंत्री खुद निगरानी कर रहे हैं। गौरतलब है कि ओएसएम के लिए जिस कंपनी को ठेका दिया गया है उसके संबंध भारतीय जनता पार्टी के नेताओं, प्रचारकों आदि से है। चर्चा है कि खास कंपनी को ठेका देने के लिए तीन बार निविदा निकाली गई है और शर्तें ढीली की गई हैं। कल शिक्षा विभाग के दफ्तर वाली एक बिल्डिंग में आग लगने की भी खबर है और मंत्री का इस्तीफा नहीं हुआ है जबकि आग लगने से कागजातों के नष्ट होने या नष्ट करके ठेकेदार को बचाने की कोशिश हो सकती है। आज उससे संबंधित कोई खबर पहले पन्ने पर नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, ओएसएम निविदा के मामले में सीबीएसई में कार्रवाई हो सकती है। आम समझ है कि ऐसा मंत्री की जानकारी और सहमति में भी हुआ हो सकता है। इसलिए मंत्री के पद पर रहते हुए निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। इसीलिए इस्तीफा देने या लेने का रिवाज रहा है लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार में ऐसा नहीं होता है। खबर के अनुसार हैदराबाद की कंपनी को ठेका देने से संबंधित विवरण मांगे गए हैं पर सवाल है कि मंत्रालय की जानकारी के बिना सीबीएसई ने पहली बार ओएसएम की शुरुआत की होगी और इतनी जल्दबाजी में लागू कर दिया होगा? कहने की जरूरत नहीं है कि परीक्षण का समय तो था ही नहीं। अगर नया सिस्टम जांचे-परखे बगैर शुरू हो गया तो नीचे वाले ही क्यों जिम्मेदार होंगे समझना मुश्किल है और ऊपर वाले भी माने जाएं तो कितना ऊपर तक? जाहिर है, मामला मुश्किल है। हिन्दुस्तान टाइम्स की खबर का शीर्षक है, मंत्रालय ने जांच बढ़ाई, सीबीएसई से रिपोर्ट की मांग की।

आज की दूसरी प्रमुख खबरों की शुरुआत द टेलीग्राफ की लीड से करता हूं। हालांकि, मिलती जुलती खबर टाइम्स ऑफ इंडिया में भी है। पश्चिम बंगाल में टीएमसी को तोड़ने की कोशिशों से संबंधित खबरों के बीच एक खबर यह भी है कि विधानसभा में विपक्ष के नेता से संबंधित विवाद और फर्जी हस्ताक्षर के मामले में तृणमूल ने अपने दो विधायकों को पार्टी से निकाल दिया है। दि एशियन एज की खबर के अनुसार ममता बनर्जी ने आरोप लगया है कि भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल में अपनी जीत दर्ज करने के लिए 177 सीटों पर गड़बड़ी की। उन्होंने कहा कि फर्जी मामलों के जरिए पार्टी को तोड़ने की कोशिश चल रही है। बंगाल में अगर तृणमूल कांग्रेस को तोड़ने की चर्चा है तो तमिलनाडु की राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत होने वाली है। दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार, भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के अन्नामलाई भाजपा छोड़ने वाले हैं। इंडियन एक्सप्रेस में भी यह खबर है। खबरों के अनुसार, तमिल राष्ट्रवाद को थामने का फैसला अन्नामलाई 7 जून को लेंगे। इंडियन एक्सप्रेस में इस खबर के साथ की एक खबर का शीर्षक है, तेलंगाना में नकद वेतन भुगतान पर प्रतिबंध। यही नहीं, राज्य में गिग वर्कर्स को भी न्यूनतम वेतन के तहत लाने की खबर है। इसकी तुलना डबल इंजन वाले किसी राज्य से करके देखिए तो आप पाएंगे कि नोएडा में आंदोलन हुआ तो भी मजदूरों को फायदा नहीं हुआ। जो जेल गए जिनपर मुकदमा चला उससे अलग यहां जो हुआ है वह लगभग किसी मांग के बिना है। नोएडा जैसे आंदोलन की खबर तो नहीं ही थी। छह जून को कॉक्रोच जनता पार्टी के संस्थापक के दिल्ली पहुंचने की खबर तो आज दिख रही है लेकिन द हिन्दू की लीड औद्योगिक आउटपुट कम होने की खबर है। यह खबर कहीं और इतनी प्रमुखता से नहीं दिखी। खबर इस प्रकार है, भारत का औद्योगिक उत्पादन, जिसे ‘औद्योगिक उत्पादन सूचकांक’ (IIP) से मापा जाता है, अप्रैल 2026 में 4.9% बढ़ा। यह आँकड़ा सोमवार को जारी की गई संशोधित शृंखला के तहत है, जिसमें 2022-23 को आधार वर्ष माना गया है। यह वृद्धि दर पिछले साल अप्रैल में दर्ज की गई 5.8% की दर से कम रही; पिछले साल के आँकड़ों में 2011-12 को आधार वर्ष माना गया था।

मैं रोज तीन हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल नौ, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।

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