जनसंसद में देशव्यापी संघर्ष का आह्वान, 23 मार्च से भूमि-अधिकार अभियान

दिल्ली : अखिल भारतीय लोक मंच (ऑल इंडिया पीपुल्स फोरम- एआईपीएफ) के दो दिवसीय स्थापना सम्मेलन के बाद जंतर-मंतर पर जन-संसद को वामपंथी-समाजवादी नेताओं, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और बुद्धिजीवियों ने संबोधित किया।

दिल्ली में जंतर-मंतर पर जन-संसद 

जन-संसद को संबोधित करते हुए कुलदीप नैयर ने कहा कि जनता की जमीन को उसकी मर्जी के बगैर कोई नहीं ले सकता, यह जनता का लोकतांत्रिक हक है। इस हक के लिए जो जरूरी लड़ाई लड़ी जाने वाली है, वे हर स्तर पर उसका साथ देंगे। भाकपा-माले के राष्ट्रीय महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि मोदी सरकार में अच्छे दिन सिर्फ कारपोरेट और अमीरों के हैं। भूमि अर्जन अध्यादेश किसानों की जमीन हड़पने वाला है। जमीन, खेत-खेती, आजीविका और खाद्य सुरक्षा सबकुछ पर यह सरकार हमला कर रही है।

वक्ताओं ने कहा कि खाद्य सुरक्षा कानून और मनरेगा में किए गए जनविरोधी संशोधन इसकी बानगी हैं। जो बड़े बड़े आंदोलन हुए हैं उन्होंने यूपीए, राजद-जदयू सरकार समेत समेत तमाम दंभी सरकारों को सबक सिखाया है और अब मोदी सरकार के कंपनी राज को भी कड़ा सबक सिखाकर रहेगी। 

दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि यह दूसरी आजादी की लड़ाई है। जनांदोलनों की ताकतों की जो व्यापक एकता बन रही है, उसके जरिए यह लड़ाई निश्चित तौर पर जीती जाएगी। सुनीलम ने कहा कि कारपोरेट ताकतों की मददगार पार्टियां इस देश की जनता का भला नहीं कर सकतीं, यह साबित हो चुका है। दयामनी बरला ने कहा कि जल, जंगल, जमीन के साथ-साथ राजसत्ता पर भी जनता का अधिकार है, जिसे लड़कर लेना है। प्रकाश जेना और राजू बोरा ने कहा कि वे किसानों के लिए जो संघर्ष चला रहे हैं, उसे एआईपीएफ के अभियान से और ताकत मिलेगी।  रोमा मलिक ने तमाम आंदोलनों के बीच अटूट एकता की जरूरत पर जोर दिया। मु. सलीम ने कहा कि देश की संसद अरबपतियों-करोड़पतियों की प्रतिनिधि संस्था में तब्दील हो चुकी है, इसलिए देश की जनता ने उसके समानांतर अपना संसद लगाया है।

भीमराव बंसोड ने कहा कि सांप्रदायिक और कारपोरेट हमले के खिलाफ जबर्दस्त प्रतिरोध खड़ा करना वक्त की मांग है। पूर्व सांसद रामेश्वर प्रसाद ने कहा कि मोदी सरकार का जो भूमि अर्जन अध्यादेश है, यह बड़े पैमाने पर खेत मजदूरों और ग्रामीणों की आजीविका, पोषण और कुल मिलाकर जीवन के लिए भारी संकट पैदा करेगा। किरण शाहीन ने कहा कि खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ पानी का अधिकार भी जनता का एक अहम सवाल है, जिस पर लड़ाई जरूरी है। 

ऐपवा की राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी और उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी पीसी तिवारी ने भी जनसंसद को संबोधित किया। इस मौके पर मंच पर अखिल भारतीय खेत मजदूर सभा के राष्ट्रीय महासचिव धीरेंद्र झा, रिटायर्ड कर्नल लक्ष्मेश्वर मिश्रा, पीयूसीएल के कविता ऐपवा की राष्ट्रीय महासचिव मीना तिवारी तथा सचिव कविता कृष्णन, लाल निशान पार्टी- लेनिनिस्ट के राजेंद्र बाउके तथा एआईपीएफ के सलाहकार परिषद के ले. जेनरल यूएसपी सिन्हा भी मौजूद थे। अखिल भारतीय किसान महासभा और एआईपीएफ के अभियान समिति के सदस्य राजाराम सिंह ने जनसंसद का संचालन किया। 

बाद में भूमि अधिग्रहण विरोधी किसान आंदोलनों से जुड़े कृषक मुक्ति संग्राम समिति, आसाम तथा एआईपीएफ के सलाहकार समिति के सदस्य राजू बोरा, एआईपीएफ के राष्ट्रीय परिषद सदस्य और पॉस्को प्रतिरोध संग्राम समिति के प्रकाश जेना, झारंखड में आदिवासी अधिकारों और जनांदोलनों की चर्चित नेता और एआईपीएफ अभियान समिति की सदस्य दयामनी बरला, एआईपीएफ अभियान समिति के सदस्य तथा मध्य प्रदेश के पूर्व विधायक व किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष सुनीलम ने जमीन पर किसानों-आदिवासियों के हक और सरकारी जमीन के वितरण के लिए पूरे देश में जोरदार आंदोलन संगठित करने का संकल्प दुहराया गया। 

प्रतिनिधिमंडल की ओर से हजारों विशेष ग्राम सभाओं द्वारा पारित प्रस्ताव राष्ट्रपति को सौंपे गए। जनसंसद में एआईपीएफ भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस 23 मार्च से 30 जून तक पूरे देश में भूमि अधिकार-श्रम अधिकार अभियान चलाने का निर्णय लिया गया।

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