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ऑनलाइन टीचर्स को दौ कौड़ी का बताने वाली अंजना ओम कश्यप पर खान सर फायर हैं!

न्यूज एंकर अंजना ओम कश्यप एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार विवाद एक पुरानी घटना को लेकर है, जिसे लेकर दावा किया जा रहा है कि वर्ष 1980 के संदर्भ से जुड़ी सामग्री को 2026 के परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया गया। इसको लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और पत्रकारिता की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

विवाद तब और बढ़ गया जब चर्चित शिक्षक एवं यूट्यूबर खान सर ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही टिप्पणियों में कहा जा रहा है कि बेबाक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले खान सर ने आरोपों का जवाब देते हुए अपनी बात मजबूती से रखी है।

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स का कहना है कि यदि किसी पुराने संदर्भ या घटना को वर्तमान घटनाक्रम के रूप में प्रस्तुत किया गया है, तो यह गंभीर पत्रकारिता संबंधी प्रश्न खड़े करता है। वहीं कुछ लोग इसे तथ्यों की प्रस्तुति को लेकर हुई गलतफहमी भी बता रहे हैं।

इस पूरे विवाद के बीच कई पोस्टों में अंजना ओम कश्यप और तथाकथित “गोदी मीडिया” पर भी निशाना साधा गया है। कुछ यूजर्स ने दावा किया कि पुराने तथ्यों को नए संदर्भ में पेश करने से मीडिया की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

फिलहाल सोशल मीडिया पर खान सर और अंजना ओम कश्यप को लेकर बहस तेज है।

https://twitter.com/Dr_MonikaSingh_/status/2061283407876005905

डॉ नदीम अख्तर-

आज तक की एंकर अंजना ओम कश्यप ने यूट्यूब टीचर्स की जो तारीफ की है, उससे मुझे बहुत खुशी हुई है। अंजना चूंकि News24 में मेरी सहकर्मी रह चुकी हैं, इसलिए कुछ कुछ उनको जानता हूं। तो कह ये रहा था कि अंजना की तारीफ से प्रेरित होकर मेरा भी मन कर रहा है कि यूट्यूब पे आ जाऊँ। मुझे भी दो कौड़ी का कहलाने का बड़ा शौक और मन है।

वैसे अपने पाठकों को बता दूं कि जब दिल्ली में था तो मुझे दो बड़े यूट्यूब चैनलों से ऑफर आया। दरख्वास्त ये थी कि मुझे पत्रकार रवीश कुमार के टक्कर का यूट्यूब शो लिख कर देना है, जिसके वे मुझे अच्छे पैसे भी दे रहे थे। पर मैंने विनम्रता से मना कर दिया।

पहला कारण ये था कि रवीश कुमार से “टक्कर” मुझे नहीं लेना। टक्कर के शो का मतलब है कि फिल्म अभिनेता दिलीप कुमार को आप राजकुमार जैसा बनने बोल रहे हो। रवीश कुमार क्या, किसी भी पत्रकार की सोच, चीज़ों को परखने, बोलने और लिखने का नजरिया एकदम अलग होता है। और रवीश कुमार या ध्रुव राठी कोई माइलस्टोन तो हैं नहीं कि वहां पहुंचना है! सो ये सोच ही मुझे अजीब लगी। मेरा अपना स्टाइल है और अपनी एनालिसिस। फेसबुक पे अलग है। यूट्यूब पे लिखूंगा और बोलूंगा तो विजुअल मीडियम के हिसाब से फेसबुक लेखन की तरह नहीं होगा। वहां कहानी सुनाई जाएगी।

दूसरा। मैं अपने लेखन को दूसरे का चेहरा क्यों दूं? जिस दिन करना होगा, खुद का लिखा स्वयं बोलूंगा। मैं कमर्शल लेखन नहीं करता। अपने लिए लिखता हूं। तो यूट्यूब पे भी अपने लिए लिखूंगा और खुद के लिए बोलूंगा। खैर।

तो बात हो रही थी यूट्यूब पे बोल रहे दो कौड़ी के टीचर्स की, जिनका जिक्र अंजना ने किया है। तो अंजना जी को ये बता दीजिएगा कि दुनियाभर में यूट्यूब पे बोलने वाले दर्शकों की पहली पसंद हैं और मेनस्ट्रीम मीडिया कहलाने वाले टीवी चैनल अपनी क्रेडिबिलिटी खोते जा रहे हैं। वे भोंपू रह गए हैं। वहां ना कोई नई सोच है, ना नया प्रयोग और ना कोई हवा का ताज़ा झोंका। सब वहां बस नौकरी कर रहे हैं।

यूट्यूब पे ताज़गी इसलिए है कि यहां हर क्षण इंसान का खुद से कॉम्पटिशन है। क्या नया करें। वैसे भारत में खबरों के यूट्यूब चैनल भी टाइप्ड हो गए हैं लेकिन वे कुछ कुछ करते रहते हैं। असल चीज है जनता से जुड़ाव। अगर ये कला आपमें हैं तो यूट्यूब आप ही के लिए है। वहां दो कौड़ी के ख़बरनवीस और टीचर आप बन सकते हैं।


ख़ान सर का जवाब…..करारा जवाब…..आना ही था। बेबाक बोलने वाले आदमी हैं, चुप कैसे रहते।
अब उधर से जवाब का क्या जवाब आता है देखते हैं।
अंजना जी, चुप रहना बेहतर होगा। इस खेल में आप ही हारेंगी। आपकी ही फ़ज़ीहत होगी। ऐंकरों की छवि बेहद ख़राब है। गोदी मीडिया के ऐंकर अब जनता के बीच सबसे बड़े खलनायक बन चुके हैं।
हाँ, अगर मोदी-शाह आपकी ओर से ख़ान के पीछे पड़ जाएं तो और बात है। -मुकेश कुमार


इसे कहते है उड़ता हुआ तीर अपनी तरफ घुमा लेना. अब एक नया मोर्चा खोल लिया गोदी मीडिया ने. ये लोग रिसर्च भी बढ़िया करते हैं! -प्रशांत टंडन


मासूम बच्चे और उनके माता-पिता की गाढ़ी मेहनत की कमाई का पैसा लूटने वाले कुछ कोचिंग सेंटर के सेलिब्रिटी टीचर्स आज भाड़े के वीडियो बना बनाकर ज्ञान दे रहे हैं। सार्वजनिक रूप से महिलाओं को गाली देने वाले, उनकी नक़ल उतारने वाले ये छिछले यूट्यूबर बच्चों की कड़ी मेहनत पर अपनी दुकान सजाते हैं। असल हीरो बच्चे हैं, ये माँ बाप की मेहनत की कमाई के लुटेरे कितना भी कूदें, देशभर के बच्चों को live जोड़कर हमने पेपर लीक के पिड़ित बच्चों को आवाज़ दी तो इनके स्टारडम को बड़ा धक्का लगा है! शिक्षा को धंधा बनाने वालों को दर्द हो तो अच्छा है।वैसे कोचिंग माफिया के खिलाफ मेरा विडियो वायरल करने के लिए धन्यवाद! मेरे शो पर सभी panelist ने बोला कि कोचिंग माफिया पर नकेल कसी जाए।

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