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ललित कला अकादमी का सच : कला सेवा के नाम पर शराब के प्याले छलकाने का खुल्लमखुल्ला खेल!

भारत सरकार द्वारा कला की सेवा एवं प्रोत्साहन हेतु बनायी गयी संस्था ललित कला अकादमी का बेहद बुरा दौर चल रहा है. अब यहां कला की सेवा के नाम पर एलाट हुए पैसों को शराब के प्याले  परोसे कर छलकाया जा रहा है.  ललित कला अकादमी के अत्यंत विवादित प्रशासक कृष्णा शेट्टी के कई किस्से इन दिनों कला प्रेमियों के बीच तैर रहे हैं. इन महोदय को इनकी हरकतों के कारण पहले कर्नाटका ललित कला अकादमी से हटाया गया था.

भारत सरकार द्वारा कला की सेवा एवं प्रोत्साहन हेतु बनायी गयी संस्था ललित कला अकादमी का बेहद बुरा दौर चल रहा है. अब यहां कला की सेवा के नाम पर एलाट हुए पैसों को शराब के प्याले  परोसे कर छलकाया जा रहा है.  ललित कला अकादमी के अत्यंत विवादित प्रशासक कृष्णा शेट्टी के कई किस्से इन दिनों कला प्रेमियों के बीच तैर रहे हैं. इन महोदय को इनकी हरकतों के कारण पहले कर्नाटका ललित कला अकादमी से हटाया गया था.

ताजा मामला ये है कि मार्च 2017 में बेंगलुरु में हुए कला के एक सम्मलेन में इन्होंने शराब परोसने का आदेश दे दिया. कला की सेवा की आड़ में मिले सरकारी पैसे से तब यहां खूब प्याले छलके. जब बिल देने की बात आई तो शराब के बिल को पानी एवं अतिरिक्त खाना के नाम पर एडजस्ट कर दिया गया. सवाल यह है कि जब निमंत्रण सिर्फ 200 लोगों को था और पहले से ही होटल को अकादमी द्वारा आदेश दिया गया था तो बाद में अतिरिक्त भोजन के नाम पर बिल क्यों दिया गया.

इस सम्बन्ध में कई शिकायतें भी की गयीं परंतु श्री कृष्णा शेट्टी को संघ का प्रश्रय होने के कारण कोई इनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हो रही है. श्री शेट्टी जो की ललित कला अकादमी का प्रशासक बनने के लिए एक रुपये मात्र का मासिक वेतन लेने को तैयार होकर आये थे, अब मंत्रालय पर दबाव बना कर लाखों का वेतन मांग रहे हैं. इतना ही नहीं, शेट्टी साहब ने अकादमी के गेस्ट हाउस को कब्ज़ा कर लिया है और इसे रोज शाम को मयखाने में तब्दील कर दिया जाता है. यहां सरकारी कर्मचारी द्वारा शराब की बोतलें मंगाई जाती हैं और देर रात तक इस प्रकार प्याले छलकाते हुए कला की सेवा की जाती है.

ज्ञात रहे कि ललित कला अकादेमी का इतिहास ऐसे ही प्रशासकों से भरा हुआ है, जो सभी सुविधाओं को जबरदस्ती अपने कब्जे में करके कला की सेवा करते हैं और भारत सरकार के करोड़ों रुपयों को पानी की तरह बहाते हैं. ऐसे संस्थान पूर्ण रूपेण सत्ता धारी पार्टी द्वारा अपने भ्रष्ट व खास लोगों को उपकृत करने का माध्यम बनकर रह गए हैं. ललित कला के इतिहास को खंगाला जाये तो यहाँ कलाकारों को सरकारी पैसों द्वारा पोषित किया जाता है. परंतु पूर्व प्रशासकों ने कलाकारों, वकीलों को कई गुना पैसा दिला कर उनसे वापस लेने का खेल खुल कर किया है. श्री शेट्टी भी कोई अपवाद नहीं सिद्ध हो रहे हैं. ये भी उसी परंपरा का निर्वाह करते हुए कला की सेवा करने में तत्पर हैं.

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