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बिहार में मीडिया पर घोषित प्रतिबंध

Vinayak Vijeta : मुख्यमंत्री का सख्त निर्देश, ईटीवी को कोई बाईट नहीं दें जदयू नेता… राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जदयू नेताओं और अपने प्रवक्ताओं को यह सख्त निर्देश दिया है कि वह ईटीवी को न तो कोई बाईट दें और न ही ऑन या ऑफ द रिकार्ड इस चैनल के किसी संवाददाता से बात करें। सुत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री का इस चैनल पर गुस्सा पिछले दिनों पंचायत प्रतिनिधियों के सम्मेलन को लेकर था। बताया जाता है कि इस सम्मेलन के प्रचार के लिए सूचना और जनसंपर्क विभाग ने पटना के तीन निजी चैनलों को विज्ञापन दिया था। पर ईटीवी ने इस विज्ञापन को इसलिए स्वीकार नहीं किया कि विज्ञापन का दर चैनल के निर्धारित दर से काफी कम था।

Vinayak Vijeta : मुख्यमंत्री का सख्त निर्देश, ईटीवी को कोई बाईट नहीं दें जदयू नेता… राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जदयू नेताओं और अपने प्रवक्ताओं को यह सख्त निर्देश दिया है कि वह ईटीवी को न तो कोई बाईट दें और न ही ऑन या ऑफ द रिकार्ड इस चैनल के किसी संवाददाता से बात करें। सुत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री का इस चैनल पर गुस्सा पिछले दिनों पंचायत प्रतिनिधियों के सम्मेलन को लेकर था। बताया जाता है कि इस सम्मेलन के प्रचार के लिए सूचना और जनसंपर्क विभाग ने पटना के तीन निजी चैनलों को विज्ञापन दिया था। पर ईटीवी ने इस विज्ञापन को इसलिए स्वीकार नहीं किया कि विज्ञापन का दर चैनल के निर्धारित दर से काफी कम था।

इसके वावजूद ईटीवी ने उस सम्मेलन का लाईव किया जहां मंच के टेबल पर ईटीवी का माईक भी लगा था पर मुख्यमंत्री ने ईटीवी के माईक को हटवा दिया। बुधवार को जदयू के प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ट नारायण सिंह ने मुख्यमंत्री के निर्देशनुसार सभी प्रवक्ताओं को तलब किया और उन्हें यह सख्त निर्देश दिया कि न ही कोई प्रवक्ता या जदयू का कोई नेता ईटीवी को अपना बाईट देगा न ही कोई इस चैनल के पैनल डिस्कशन में भाग लेगा। अपरोक्ष रूप से मीडिया को अपने बंदिश में रखने की लगातार कोशिश करने वाले नीतीश कुमार के इस निर्देश की गुप्त चर्चा जगह जगह हो रही है।

अपने पहले शासन काल में से ही काफी अहंकारी बन गए नीतीश कुमार के उस रूप की चर्चा भी मीडिया जगत में हो रही है जब तत्कालीन आबकारी मंत्री जमशेद अशरफ के हवाले से पटना से प्रकाशित एक प्रमुख हिन्दी दैनिक के वरीय पत्रकार ने सुशासन (शराब शासन) पर एक खबर लिखी थी जिसमें पूरे बिहार में हर चौक चौराहे पर शराब की दुकान खुलने और गलत आबकारी नीती की चर्चा थी। तब यह  खबर उस अखबार के प्रथम पृष्ठ पर प्रमुखता से छपी थी।

उस खबर को लेकर नीतीश कुमार उस अखबार और उसके प्रबंधन पर इतने क्रोधित हुए कि प्रबंधन को उस वरीय पत्रकार को नौकरी से हटाने तक का दवाब बना दिया था। कई दिनों तक इस अखबार को सरकारी विज्ञापन देने पर रोक लगा दी गई। नीतीश का गुस्सा देख तब इस अखबार के मालिक तक पटना आए और नीतीश कुमार से मिलने की कोशिश की पर खफा नीतीश ने उन्हें मिलने का समय नहीं दिया। बाद में किसी तरह इस अखबार के  प्रबंधन ने इस मामले को पैचप करते हुए अपने उस वरीय पत्रकार का तबादला दिल्ली कर दिया। बाद में काफी मान-मनौव्वल के बाद नीतीश कुमार माने जिसके बाद उन वरीय पत्रकार को फिर पटना पदस्थापित किया गया।

बिहार के स्वतंत्र पत्रकार विनायक विजेता की फेसबुक वॉल से. 

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