मेरठ के माधवपुरम निवासी वरिष्ठ पत्रकार राजेश अवस्थी का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने से पत्रकार जगत में शोक की लहर दौड़ गई। बताया जा रहा है कि राजेश अवस्थी लंबे समय तक दैनिक जागरण मेरठ में कार्यरत रहे और अपने शांत, मृदुभाषी तथा सहयोगी स्वभाव के कारण पत्रकार साथियों के बीच बेहद सम्मानित थे।
करियर का अधिकतर हिस्सा दैनिक जागरण मेरठ के साथ गुज़ारने वाले राजेश अवस्थी को छँटनी का शिकार प्रबंधन ने बना दिया। उनकी सैलरी काफ़ी कम थी फिर भी उन्हें लॉयल्टी का इनाम छंटनी के रूप में मिला। इस छंटनी के बाद से वे अवसाद में चले गए। बेहद संकोची और स्वाभिमानी राजेश अवस्थी दिनोंदिन आर्थिक संकट के जाल में फँसते गए।
जानकारी के अनुसार राजेश अवस्थी पिछले कुछ समय से आर्थिक तंगी और विभिन्न बीमारियों से जूझ रहे थे। शुक्रवार को वह घर से निकले थे, जिसके बाद शनिवार को उनका शव एक पेड़ के नीचे मिला। मौके से सल्फास की गोलियां भी बरामद होने की बात कही जा रही है। प्रारंभिक तौर पर मामला आत्महत्या का माना जा रहा है, हालांकि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
राजेश अवस्थी के साथ लंबे समय तक काम कर चुके पत्रकार साथियों ने बताया कि उन्होंने जीवनभर संघर्ष किया लेकिन कभी हार नहीं मानी। गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के बावजूद वे लगातार सक्रिय बने हुए थे। ऐसे में उनके इस कदम की खबर से मित्रों और सहयोगियों को गहरा सदमा लगा है।
पत्रकार समुदाय ने दिवंगत आत्मा की शांति की प्रार्थना करते हुए परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। साथ ही आर्थिक संकट से जूझ रहे परिवार की मदद के लिए भी साथियों और शुभचिंतकों से आगे आने की अपील की जा रही है।
राजेश अवस्थी जैसे जेन्यूइन पत्रकारों की किस्मत में केवल अवसाद, अभाव और आखिर में मौत चुनने का विकल्प ही शेष है.
जिम्मेदारी और ईमानदारी से काम कर रहे पत्रकार भी दलाल पत्रकारों के साथ सामूहिकता में भ्रष्टाचारी घोषित कर दिये जाते हैं, जबकि ईमानदारी से काम कर रहे और पत्रकारिता के लिये जूझ रहे सत्तर-अस्सी फीसदी पत्रकार अभाव से जूझने के बावजूद गलत या भ्रष्टाचार का रास्ता नहीं अख्तियार करते हैं.
अवस्थी जी को विनम्र श्रद्धांजलि।।
-अनिल कुमार
मोदी सरकार की गोद में बैठे दैनिक जागरण और उनके मालिकान का ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाने की हनक और पत्रकारों को गोजर, कॉकरोच, केंचुआ समझने का नतीजा सामने हैं। मेरठ के पत्रकार राजेश अवस्थी ने छंटनी के बाद जहर खाकर आत्महत्या कर ली। यह उनका ही शव है।
खुद को विश्वक नंबर एक अखबार कहने वाला दैनिक जागरण शायद एक कॉलम की खबर भी न छापेगा। मुझे खुद पर धिक्कार है कि मैंने ऐसे निर्लज्ज अखबार के साथ कभी काम किया है। यह एक नंबर के भ्रष्ट और संवेदनहीन लोगों का ठिकाना है।
-आवेश तिवारी



Alok
May 23, 2026 at 3:37 pm
अखबार और मीडिया की दुनिया एक तरह की ‘किलिंग फैक्ट्री’ है।