संसद की स्थायी समिति अब इंटरनेट पर समान पहुंच और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े मुद्दों की जांच करेगी। इसके तहत Meta, Google, Amazon और X जैसी बड़ी डिजिटल और सोशल मीडिया कंपनियों को तलब किया गया है।
संसदीय स्थायी समिति ऑन कम्युनिकेशंस एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इस बात की पड़ताल करेगी कि कहीं टेलीकॉम कंपनियां और डिजिटल प्लेटफॉर्म कुछ चुनिंदा उपभोक्ताओं को विशेष इंटरनेट सुविधा या अलग अनुभव तो नहीं दे रहे।
नेट न्यूट्रैलिटी पर बढ़ी चिंता
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक समिति के अध्यक्ष Nishikant Dubey ने कहा कि समिति यह जांच करेगी कि क्या पोस्टपेड मोबाइल ग्राहकों या डिजिटल प्लेटफॉर्म के पेड यूजर्स को बाकी लोगों से अलग इंटरनेट अनुभव दिया जा रहा है।
यह मुद्दा 26 मई को हुई समिति की बैठक में उठा, जिसमें दूरसंचार विभाग (DoT) और भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) के अधिकारियों ने सेवा गुणवत्ता और उपभोक्ता सुरक्षा को लेकर प्रस्तुति दी। बैठक में खास तौर पर नेट न्यूट्रैलिटी यानी सभी के लिए समान इंटरनेट पहुंच पर चर्चा हुई।
“नेटवर्क स्लाइसिंग” पर भी सवाल
समिति अब “नेटवर्क स्लाइसिंग” जैसी नई तकनीकों की भी समीक्षा करेगी। रिपोर्ट्स के अनुसार एक निजी टेलीकॉम कंपनी द्वारा पोस्टपेड ग्राहकों के लिए नेटवर्क स्लाइसिंग सुविधा शुरू किए जाने के बाद यह बहस तेज हुई कि क्या यह नेट न्यूट्रैलिटी के सिद्धांतों के खिलाफ है।
नेटवर्क स्लाइसिंग के जरिए कुछ विशेष यूजर्स को बेहतर इंटरनेट स्पीड या अलग नेटवर्क अनुभव दिया जा सकता है। समिति यह देखना चाहती है कि इससे इंटरनेट उपयोग में भेदभाव तो नहीं पैदा हो रहा।
पेड फीचर्स भी जांच के दायरे में
संसदीय समिति सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर मौजूद उन सब्सक्रिप्शन आधारित फीचर्स की भी जांच करेगी, जिनमें पैसे देने वाले यूजर्स को अतिरिक्त विजिबिलिटी, ज्यादा पहुंच या अलग एंगेजमेंट टूल्स मिलते हैं।
समिति का मानना है कि डिजिटल इकोसिस्टम में सभी उपभोक्ताओं के अधिकार और समान अवसर सुनिश्चित होना चाहिए।
आगे होंगी और बैठकें
रिपोर्ट्स के अनुसार समिति आने वाले हफ्तों में इस मुद्दे पर और बैठकें करेगी। इसके बाद नेट न्यूट्रैलिटी, टेलीकॉम सेवा गुणवत्ता और डिजिटल उपभोक्ता अधिकारों को लेकर अपनी अंतिम टिप्पणियां तैयार की जाएंगी।



