मोदी और मीडिया यानि ‘गोदी मीडिया’ पर इस चुनाव में बने ये सात कार्टून न देखा तो क्या देखा!

इस चुनाव में मीडिया ने ये कमाया है। सतीश आचार्य और मंजुल जैसे कार्टूनिस्टों की कूची से मीडिया का बनता चेहरा देखिए। मीडिया पर बने सभी कार्टूनों का संग्रह होना चाहिए।

-Ravish Kumar


मीडिया पर जब इतने सारे कार्टून बनने लगे तो समझ लीजिए मीडिया की साख बेहद संकट में है. भारतीय मीडिया सत्ता के आगे जिस तरह समर्पण कर भक्ति भाव में रंग गया है, वह शर्मनाक है. मीडिया का मतलब ही होता है सत्ता को आइना दिखाना, सत्ता की कमियां ढूंढना. पर मीडिया जब सत्ता के प्रवक्ता की तरह काम करने लगे तो कार्टूनिस्टों को अपनी कूची उठानी ही पड़ेगी. सभी कार्टून जोरदार हैं. कार्टूनिस्ट्स को बधाई.

-Yashwant Singh
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