Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

सुख-दुख

कारपोरेट घरानों के लाभ के लिए मोदी सरकार कर रही ईपीएफ अंशदान में कटौती

लखनऊ : मोदी सरकार द्वारा ईपीएफ के अंशदान में दो प्रतिशत की कटौती करने की कोशिश का यूपी वर्कर्स फ्रंट ने कड़ा विरोध किया है। वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपूर ने आज प्रेस को जारी अपने बयान में कहा कि कारपोरेट घरानों के लाभ के लिए केन्द्र सरकार यह कटौती कर रही है। सरकार का यह दावा कि इस कटौती से श्रमिकों की क्रयशक्ति बढ़ेगी भी झूठ के पुलिंदा के सिवाय और कुछ नहीं है। क्योंकि इस सरकार के तीन साल के कार्यकाल में लगातार बड़े पैमाने पर हुई श्रमिकों की छंटनी, श्रमिकों की मजदूरी में वृद्धि न होना और लगातार अनियंत्रित महंगाई ने श्रमिकों की क्रयशक्ति को बहेद गिरा दिया है और अब भविष्यनिधि के अंशदान में कमी उनके जीवन को और भी असुरक्षित करने का ही काम करेगा।

लखनऊ : मोदी सरकार द्वारा ईपीएफ के अंशदान में दो प्रतिशत की कटौती करने की कोशिश का यूपी वर्कर्स फ्रंट ने कड़ा विरोध किया है। वर्कर्स फ्रंट के प्रदेश अध्यक्ष दिनकर कपूर ने आज प्रेस को जारी अपने बयान में कहा कि कारपोरेट घरानों के लाभ के लिए केन्द्र सरकार यह कटौती कर रही है। सरकार का यह दावा कि इस कटौती से श्रमिकों की क्रयशक्ति बढ़ेगी भी झूठ के पुलिंदा के सिवाय और कुछ नहीं है। क्योंकि इस सरकार के तीन साल के कार्यकाल में लगातार बड़े पैमाने पर हुई श्रमिकों की छंटनी, श्रमिकों की मजदूरी में वृद्धि न होना और लगातार अनियंत्रित महंगाई ने श्रमिकों की क्रयशक्ति को बहेद गिरा दिया है और अब भविष्यनिधि के अंशदान में कमी उनके जीवन को और भी असुरक्षित करने का ही काम करेगा।

उन्होंने कहा कि देश में चले लम्बे आंदोलन के बाद वामपंथ समर्थित तात्कालीन संयुक्त मोर्चा सरकार ने 1997 में भविष्य निधि कानून 1952 में संशोधन कर दस प्रतिशत के अंशदान को 12 प्रतिशत किया था जिसे अब मोदी सरकार बीस वर्ष बाद घटाकर दस प्रतिशत करना चाहती है। इस कटौती से मालिकानों द्वारा श्रमिकों की भविष्य निधि में दिया जा रहा अंशदान दो प्रतिशत कम हो जायेगा जिससे श्रमिकों को बेहद नुकसान होगा। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार बनने के बाद से ही अपने कारपोरेट आकाओं के लिए लगातार श्रमिकों के ईपीएफ पर हमला कर रही है।

सरकार ने पहले ईपीएफ निकासी पर ब्याज लगाने की कोशिश की फिर 58 साल तक की आयु तक ईपीएफ निकासी पर रोक लगायी पर श्रमिकों के देशव्यापी विरोध के बाद उसे अपने कदम वापस खींचने पड़े। सरकार ने बिना ईपीएफ न्यास बोर्ड की सहमति के पांच हजार करोड़ रूपए श्रमिकों की भविष्य निधि के निकाल कर शेयर बाजार में लगा दिए जिसमें भारी घाटा उठाना पड़ा और इसका सहारा लेकर ईपीएफ ब्याज दरों को भी घटा दिया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ईपीएफ अंशदान में कटौती करने की अपनी योजना को अमलीजामा देती है तो वर्कर्स फ्रंट अन्य केन्द्रीय श्रम संगठनों के साथ मिलकर चौतरफा विरोध करेगा।

दिनकर कपूर
प्रदेश अध्यक्ष
यूपी वर्कर्स फ्रंट
[email protected]

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन