देश की सरकारी तेल कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में शानदार मुनाफा दर्ज किया है। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) और भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) का संयुक्त शुद्ध लाभ जनवरी-मार्च तिमाही में करीब 19,470 करोड़ रुपये रहा। यह पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले लगभग 41 फीसदी ज्यादा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इन तीनों सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों का देश के ईंधन रिटेल बाजार में करीब 90 फीसदी हिस्सा है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति में उतार-चढ़ाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के बावजूद कंपनियों ने मजबूत प्रदर्शन किया।
कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव
रिपोर्ट में बताया गया कि फरवरी 2026 में अमेरिका-इजराइल और ईरान तनाव के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया। जो कीमत पहले करीब 72 डॉलर प्रति बैरल थी, वह बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। हालांकि बाद में इसमें कुछ नरमी आई और मई में कीमतें करीब 105 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं।
विशेषज्ञों का मानना है कि साल के अधिकांश समय कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहने और रिफाइनिंग मार्जिन बेहतर रहने से कंपनियों को फायदा मिला।
IOC और HPCL का मुनाफा तेजी से बढ़ा
Indian Oil Corporation ने चौथी तिमाही में 11,377 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जो पिछले साल की तुलना में करीब 56 फीसदी ज्यादा है। पूरे वित्त वर्ष में कंपनी का नेट प्रॉफिट 36,802 करोड़ रुपये रहा।
वहीं Hindustan Petroleum Corporation Limited का चौथी तिमाही का लाभ 46 फीसदी बढ़कर 3,901 करोड़ रुपये पहुंच गया। पूरे साल में HPCL का मुनाफा 17,175 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 133 फीसदी अधिक है। कंपनी ने 19.25 रुपये प्रति शेयर का अंतिम डिविडेंड देने की भी घोषणा की है।
BPCL का तिमाही लाभ स्थिर, सालाना मुनाफा बढ़ा
Bharat Petroleum Corporation Limited का चौथी तिमाही का लाभ लगभग स्थिर रहा और मामूली गिरावट के साथ 3,191 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। हालांकि पूरे वित्त वर्ष में कंपनी का नेट प्रॉफिट 75 फीसदी बढ़कर 23,303 करोड़ रुपये हो गया।
पेट्रोल-डीजल कीमतें बढ़ाने के बावजूद घाटे का दावा
रिपोर्ट के अनुसार, कंपनियों ने हाल ही में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में करीब 3 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ोतरी की थी। इसके बावजूद सरकारी अधिकारियों और कंपनी अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अब भी प्रतिदिन करीब 500 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है, खासकर ऑटो फ्यूल और घरेलू गैस बिक्री में।

देश की तीन ऑयल कंपनियां इस संकट की घड़ी में भी मुनाफा कमा रही हैं। इन तीनों कम्पनियों ने इस साल जनवरी से मार्च महीने के बीच में 19470 करोड़ का मुनाफा बनाया है। पिछले साल इसी समय के मुकाबले इन कंपनियों ने 40.74 प्रतिशत मुनाफा बनाया है। इन तीनों कम्पनियों का देश के 90 प्रतिशत फ्यूल रिटेल मार्केट पर कब्जा है..
तेल कंपनियां मुनाफा कमा रही है और जनता का जेब काटा जा रहा है..वाह रे महामानव-अजय झा
मृगांका सिंह-
पेट्रोलियम मंत्री ने देश को बताया कि तेल कम्पनियों को रोज 1000 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है और फिर कुछ ही दिनों कई बार पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ा दी! हमारी प्रबुद्ध मीडिया ने भी सरकार से कोई सवाल नहीं किया! अब तेल कंपनियां अपने तिमाही रिपोर्ट में 41% का Profit बता रही हैं।

यही तो दूरदर्शी जननायक Rahul Gandhi जी ने कहा था कि महंगाई का ऐसा तूफान आने वाला है, जैसा आपने पहले कभी नहीं देखा… चुनाव खत्म महंगाई शुरू, यही है narendra modi BJP 4 India का गुजरात मॉडल।
तेल कंपनियां अभी भी मुनाफा कमा रहीं तो फिर मूल्य वृद्धि क्यों…? सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने वित्त वर्ष 2025-26 में ज़बरदस्त मुनाफ़ा कमाया। तीनों OMCs ने कुल मिलाकर 77,280.65 करोड़ रुपये का मुनाफ़ा कमाया, जो वित्त वर्ष 2024-25 के मुक़ाबले 130% ज़्यादा है। यहाँ तक कि चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च 2026) में भी, जब इज़रायल और अमेरिका ने ईरान पर हमला किया था, तब भी तीनों OMCs का मुनाफ़ा 19,470 करोड़ रुपये रहा—जो पिछले साल की इसी अवधि के मुक़ाबले 40% ज़्यादा है। जब इन OMCs ने इतना ज़्यादा मुनाफ़ा कमाया है, तो फिर पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतें हर दिन धीरे-धीरे करके क्यों बढ़ाई जा रही हैं? आज चंडीगढ़ में पेट्रोल की क़ीमत 98.12 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल की क़ीमत 86.09 रुपये प्रति लीटर है। दिल्ली में ये क़ीमतें क्रमशः 102.12 रुपये और 95.20 रुपये हैं। एक तरफ़ जहाँ OMCs जमकर मुनाफ़ा कमा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ़ लोग क़ीमतों की इस दमनकारी व्यवस्था के बोझ तले दबे जा रहे हैं? इसी को सुशासन कहते हैं?-अजय शुक्ला, वरिष्ठ पत्रकार
मनोज अभिज्ञान-
देश संकट में है। जनता से कहा जा रहा है कि पेट्रोल बचाइए। बाइक कम चलाइए। बेवजह बाहर मत जाइए। शादी में एक ही गाड़ी ले जाइए। पड़ोसी के साथ कार पूल कर लीजिए। ऐसा माहौल बना दिया गया है मानो देश का भविष्य आपके स्कूटर की किक पर टिका हो। लेकिन उधर बंदरगाहों पर जहाज़ों में लाखों टन पेट्रोल और डीजल भरकर विदेश रवाना हो रहे हैं। रिलायंस और नायरा जैसी कंपनियां सस्ते रूसी तेल से पेट्रोल बनाकर दुनिया भर में बेच रही हैं और अरबों डॉलर कमा रही हैं। देश की अर्थव्यवस्था उस महान भारतीय सिद्धांत पर चल रही है जिसमें त्याग हमेशा जनता करेगी और मुनाफा कोई और ले जाएगा।
भारत से पेट्रोल (गैसोलीन) और अन्य रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात मुख्यतः कुछ बड़ी रिफाइनिंग कंपनियां कर रही हैं। पिछले लगभग तीन महीनों में रिलायंस इंडस्ट्रीज और नायरा एनर्जी सबसे बड़े निर्यातक रहे।
रिलायंस का जामनगर कॉम्प्लेक्स दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी है और भारत का सबसे बड़ा पेट्रोल निर्यातक माना जाता है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी के अनुसार 2023 से ही भारत के गैसोलीन निर्यात का बड़ा हिस्सा रिलायंस अकेले कर रही है। Reuters और Kpler के आंकड़ों के अनुसार 2025 की पहली छमाही में रिलायंस ने लगभग 21.66 मिलियन मीट्रिक टन रिफाइंड फ्यूल एक्सपोर्ट किया। नायरा एनर्जी ने इसी अवधि में करीब 3 मिलियन मीट्रिक टन रिफाइंड फ्यूल निर्यात किया।
भारत सरकार के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच भारत ने लगभग 14 मिलियन टन गैसोलीन (पेट्रोल), 23.6 मिलियन टन गैसोइल/डीजल निर्यात किया। पिछले 3 महीनों में भारत हर महीने लगभग 1.3 से 1.5 मिलियन टन पेट्रोल 2 से 2.5 मिलियन टन डीजल निर्यात कर रहा है। इन निर्यातों का बड़ा हिस्सा यूरोप, अफ्रीका, UAE और एशियाई बाजारों में जाता है।


