पी7 चैनल के आफिस में रात गुजारी आंदोलनकारी पत्रकारों ने (देखें तस्वीरें) : पार्ट 3

श्रम विभाग के पास ताकत बहुत है, बस वह ईमानदारी से अड़ जाए, डंट जाए. श्रम विभाग नोएडा में कई तेजतर्रार अधिकारियों के होने के कारण मीडिया से जुड़े मामलों पर इन दिनों काफी सक्रियता और तेजी दिखाई जा रही है. श्री न्यूज से लेकर भास्कर न्यूज और पी7 न्यूज तक में पत्रकारों व मीडियाकर्मियों का प्रबंधन से सेलरी-बकाया आदि को लेकर विवाद है. इन चैनलों के मामले श्रम विभाग पहुंचे तो श्रम विभाग ने कड़ा रुख अपनाया और प्रबंधन पर सख्ती की.

आंदोलनकारी पत्रकारों के बीच बैठे श्रम विभाग, नोएडा के असिस्टेंट लेबर कमिश्नर शमीम अख्तर (मोबाइल से बात करते हुए).

यही कारण है कि भास्कर न्यूज की हेमलता अग्रवाल हों या पी7 न्यूज के केसर सिंह आदि, इन्हें श्रम विभाग की सख्ती के आगे झुकना पड़ रहा है. पर ये मोटी चमड़ी वाले प्रबंधकीय लोग इतनी जल्दी रास्ते पर कहां आने वाले. यही कारण है कि केसर सिंह आदि के लिखित वादे से मुकरने के कारण पी7 के मीडियाकर्मियों को फिर आंदोलन के मैदान में कूदना पड़ा है. मीडियाकर्मियों के पी7 आफिस में अनशन पर बैठने की सूचना मिलते ही श्रम विभाग की तरफ से असिस्टेंट लेबर कमिश्नर शमीम अख्तर मौके पर पहुंचे और मीडियाकर्मियों के सुख-दुख को सुना. उधर, भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह ने भी मौके पर जाकर सभी साथियों को संबल और हौसला दिया. इस मौके की कुछ तस्वीरें…

उपरोक्त दोनों तस्वीरों में आंदोलनकारी पत्रकारों के दुख सुख सुनते हुए दिख रहे हैं श्रम विभाग नोएडा के असिस्टेंट लेबर कमिश्नर शमीम अख्तर.

आंदोलनकारी पत्रकारों के बीच में बैठे यशवंत सिंह (बिलकुल दाएं) ने उन्हें हर हाल में अंत तक तन मन धन से समर्थन करने का वादा किया.

इसके आगे की सचित्र आदोलन कथा पढ़ने के लिए इस शीर्षक पर क्लिक करें:

पी7 चैनल के आफिस में रात गुजारी आंदोलनकारी पत्रकारों ने (देखें तस्वीरें) : पार्ट 4

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पी7 चैनल के आफिस में रात गुजारी आंदोलनकारी पत्रकारों ने (देखें तस्वीरें) : पार्ट 2

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Comments on “पी7 चैनल के आफिस में रात गुजारी आंदोलनकारी पत्रकारों ने (देखें तस्वीरें) : पार्ट 3

  • आप लोग 17(2) की अर्जी लेबर बिभाग मैं लागा कर RC इश्यू करवा कर कंपनी के खिला वाइंडिंग उप पेटिशन लगाई. ESI & EPF बिभाग को मालिके के खिलाफ action और recovery करने को लिखे.

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  • महेन्द्र श्रीवास्तव says:

    श्रम विभाग अगर ईमानदार हो जाए तो कोई भी कंपनी कर्मचारियों के साथ अन्याय ना कर सके।
    दिल्ली का श्रम विभाग बिल्कुल ईमानदार नहीं है। वो कंपनी के मालिकों से मिल जाते हैं और मोटामाल बनाते हैं ।

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