पत्रिका में 12 का टर्मिनेशन और 40 का आउट ऑफ स्टेट ट्रांसफर

: सुब्रत राय की तरह पत्रिका के कोठारीज को भी भेजा जाए जेल : पत्रकारों के लिए मजीठिया की लड़ाई स्वतंत्रता संग्राम की तरह हो गई है। जिस तरह अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाने वालों का दमन कर दिया जाता है, वैसे ही राजस्थान पत्रिका मैनेजमेंट के खिलाफ कोर्ट में जाने वालों के खिलाफ पत्रिका ने दमनकारी नीति शुरू कर दी है। 28 अप्रैल से पहले पत्रिका ने मजीठिया आंदोलन को पुरजोर तरीके से दबाने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। मजीठिया आंदोलन लीड कर रहे पत्रकारों को पत्रिका प्रशासन ने रातों-रात टर्मिनेट करना शुरू कर दिया ताकि आंदोलन की कमर तोड़ सके।

राजस्थान पत्रिका के जयपुर मुख्यालय से संपादक स्तर के पत्रकार और सालों एडिट व जैकेट पेज देख रहे राकेश वर्मा को टर्मिनेट कर दिया गया है। रात को घऱ जाने के बाद उन्हें मैनेजमेंट ने फोन किया कि आपके सेवाओं की अब जरूरत नहीं है इसलिए आफिस आने की जरूरत नहीं है। इसी तर्ज पर जयपुर से फ्रंट पेज इंचार्ज विनोद पाठक, उदयपुर से वरिष्ठ पत्रकार विवेक भटनागर, भरतपुर के संपादक और सवाईमाधोपुर के इंचार्ज कौशल मूंदड़ा, अजमेर से सीनियर एकाउंटेट कैलाश नारायण शर्मा को राजस्थान से टर्मिनेशन की सूचना मैनेजमेंट द्वारा फोन पर दी गई और कहा गया कि आपका लेटर और हिसाब आपके घर पहुंच जाएगा। यह सब राजस्थान में हुआ है। कुल कुल 12 पत्रकारों को पत्रिका ने टर्मिनेट कर दिया है। इसके अलावा जयपुर से वरिष्ठ पत्रकारों को जो मजीठिया को लेकर कोर्ट गए उनको काले पानी की सजा देते हुए ट्रांसफर कर दिया गया है। इनमें विमल जैन, सत्यनारायण खंडेलवाल, महेश गुप्ता, अशोक शर्मा जैसे नाम शामिल हैं।

पत्रिका मैनेजमेंट का फंडा है कि कैसे भी करके इस आंदोलन में शामिल लोगों को तोड़ा जाए इसलिए धड़ाधड़ टर्मिनेशन और ट्रांसफर हो रहे हैं। वहीं पत्रिका ने अफवाह फैला रखी है कि ट्रांसफर होने वाले वरिष्ठ पत्रकारों ने मैनेजमेंट को माफीनामा लिखकर अपना ट्रांसफर कैंसल करवाने के लिए निवेदन किया है ताकि दूसरे शहरों के पत्रकार भी केस वापस लेने के लिए साइन कर दे। लेकिन सत्यनारायण खंडेलवाल ने माफीनामा के बदले अपना इस्तीफा मैनेजमेंट को सौंप दिया है। वहीं 3 पत्रकारों ने मैनेजमेंट के दबाव में केस वापसी पर साइन कर दिए हैं। पत्रिका की एक माह से ज्यादा की कवायद में चार सौ पत्रकारों में से प्रबंधन केवल 4 से ही केस वापसी पर साइन और माफीनामा लिखवाने में सफल रहा।

पत्रिका की इस दमनकारी नीति से मजीठिया के लिए कोर्ट में जाने वाले पत्रकारों का इरादा और मजबूत हो गया है। हर पत्रकार रोज अपने ट्रांसफर और टर्मिनेशन की राह देख रहा है। लेकिन अब पत्रकारों ने संकल्प लिया है इस दमनकारी नीति को कोर्ट में चुनौती दिया जाएगा और सहारा के सुब्रतो राय की तरह इस बाप-बेटे की जोड़ी गुलाब-निहारी कोठारी को जेल भेज कर अपना हक लेंगे। पत्रिका के कई लोग मजीठिया को लेकर कोर्ट में नहीं गए, अब ये सोच रहे है कि इन आंदोलकारियों को पैसा मिलेगा तो हमें भी मिल जाएगा। लेकिन इनकों यह नहीं पता कि यह मीडिया माफिया किसी एक का नहीं है। एक दिन सबका नम्बर आना है। इनका ट्रांसफर और टर्मिनेशन होना तय है। लेकिन नपुंसकों की तरह मालिकों के तलवे चाटने की आदत अभी तक इस बिरादरी में बरकरार है।

जय पत्रकार एकता
हमारा हक मजीठिया

पत्रिका में कार्यरत एक कर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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Comments on “पत्रिका में 12 का टर्मिनेशन और 40 का आउट ऑफ स्टेट ट्रांसफर

  • गुलाब कोठारी रा्ज्यसभा का मेंबर बनने के लिए मरा जा रहा है। उसका बेटा निहार भी काली कमाई करने में लगा है। चुतिया लोगों से लिखवा रहा है कि हमें मजीठिया नहीं चाहिए। अबे सालों आज अमिताभ बच्चन और अंबानी भी दो रुपए ज्यादा कमाना चाहते हैं तो पत्रकार क्यों नहीं। असल में नंगे कोठारियों ने राजस्थान, मप्र जैसे राज्यों में नपुंसक प्रभारी बैठा रखे हैं। अरुण चौहान ने कैलाश विजयवगीय की खबर तो ली लेकिन अपने बाप गुलाब और निहार की लेके बताए तो जानें। उसने अपने दलाल विजय चौधरी जैसे चुतिये को इंदौर का एडिटर बनवा दिया। इस सबको कोढ़ फूटेगा।

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  • ROOPA RAM GOYAL TO VIJAYA VIRGEYA KE KHAS KE GADI MAIN GHUMTA YE SAB IS GADDAR HAGAMJADE AYEASH DARUWAJ RANDWAJ NALAYAK SADAK CHHAP GANDU GULAB KOTHARI KE HE TO CHHL THEE KI AESA KARNE PAR HAM IN LOGA SE PAISA BASUL KAREGE

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