पत्रकार प्रशांत गिरफ्तारी प्रकरण पर PCI में फूट पड़ी, संजय सिंह चले अलग राह

प्रेस क्लब आफ इंडिया के कथित वामपंथी पैनल से लगातार जीतते रहे संजय सिंह ने अब अपनी राह खुल कर जुदा कर ली है. पत्रकार प्रशांत कन्नौजिया गिरफ्तारी प्रकरण को लेकर प्रेस क्लब आफ इंडिया की तरफ से आज जो प्रोटेस्ट मार्च आर्गेनाइज किया गया, उससे संजय सिंह ने अपनी नाइत्तफाकी जताई है.

संजय ने इस बाबत फेसबुक पर एक पोस्ट लिखा है, जिसे हूबहू नीचे दिया जा रहा है. ज्ञात हो कि संजय सिंह उत्तर प्रदेश के सीएम योगी के गृह जनपद गोरखपुर के निवासी हैं और उनका योगीजी से पुराना संबंध है. प्रशांत कन्नौजिया की गिरफ्तारी सीएम योगी पर कथित कमेंट के कारण हुई है, इसलिए संजय द्वारा प्रेस क्लब आफ इंडिया के प्रोटेस्ट मार्च से खुद को अलग रखने और इसका इजहार सार्वजनिक तौर पर करने की व्याख्या लोग अपने हिसाब से अलग-अलग तरीके से कर रहे हैं.

पढ़िए संजय सिंह का वक्तव्य-

मीडिया संगठनों का दोहरा चरित्र

संजय सिंह

पत्रकारिता की आड़ में चरित्रहनन और ब्लैकमेलिंग पर उतारू एजेंडा पत्रकारों पर कानूनी कार्रवाई के खिलाफ बयान जारी करने और आज प्रेस क्लब से पार्लियामेंट तक प्रोटेस्ट मार्च करने की मैं निन्दा और र्भत्सना करता हूं।

ऐसा मैं इसलिए कर रहा हूं कि इन संस्थानों ने जब बिहार में पत्रकार भाइयों की हत्या हो रही थी, पश्चिम बंगाल में मीडियाकर्मियों पर हमला हो रहा था, सेक्टर 11, नोएडा स्थित एक बड़े मीडिया संस्थान में वेतन न मिलने के खिलाफ आंदोलनरत सैकड़ो मीडियाकर्मियों को बाहर कर दिया गया। जिसमें से 21 पत्रकार संस्थान के गेट पर भारी गर्मी और लू के थपेड़ों को सहते हुए धरने पर एक माह तक बैठे रहे और तकरीबन एक दर्जन टी वी संस्थानों/समाचार पत्रों के चार सौ पत्रकारों को बिना नोटिस के बाहर का रास्ता दिखा दिया गया, जिससे उनके परिवारजन भूखे-नंगे सड़क पर आ गए तो इसके विरोध में न तो प्रोटेस्ट मार्च निकाला और न ही बयान ही जारी किया।

मैं ‘प्रेस क्लब आफ इंडिया’ की इस कार्रवाई से अपने को अलग करता हूं। और पत्रकार भाइयों से अपील करता हूं कि पत्रकारिता के नाम पर किसी पार्टी विशेष और विचारधारा विशेष का एजेंडा चला रहे एवं चरित्र हनन करने वाले ऐसे पत्रकारों से कोई सहानुभूति न रखें और उनका पर्दाफाश करें।

संजय सिंह
संयुक्त सचिव
प्रेस क्लब आफ इंडिया
दिल्ली

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Comments on “पत्रकार प्रशांत गिरफ्तारी प्रकरण पर PCI में फूट पड़ी, संजय सिंह चले अलग राह

  • इंसाफ says:

    संजय सिंह ने गिरफ्तार पत्रकारों के बारे में जो स्टैंड लिया है उसके बारे बहस हो सकती है. उनके योगी आदित्यनाथ से अच्छे सम्बन्ध हो सकते है . इसलिए वह खुलकर नहीं बोल रहे पर एक बात संजय सिंह ने शत प्रतिशत ठीक कही है. जब नॉएडा सेक्टर ११ में दर्जनों पत्रकार वाजिब मांग के लिए आन्दोलन कर रहे थे तो प्रोटेस्ट मार्च क्यों नहीं निकला . कई पत्रकार बे -सहारा हो गए. आज भी पत्रकारों का शोषण चल रहा है. कहां प्रोटेस्ट हो रहा है. संजय सिंह ने राष्ट्रीय सहारा का नाम नहीं लिया है. लेकिन वहां आज भी शीर्ष पदों पर बैठे लखटकिया कि चल रही है. उच्च प्रबंधन सहारा में अस्थिरता चाहता है. अस्थिर करने के लिए इस महीने से राष्ट्रीय सहारा के कर्मचारियों के स्लैब/पगार 5 हजार कम कर दिए गए हैं. ऊँचे ओहदे वालों ने अपना स्लैब/ पगार पहले से अधिकतम ५ लाख तक बाधा लिया है. लोग इंतजार कर रहे थे कि पगार बढ़ेगी पर पगार घटा डी गयी. पूरा वेतन तो नसीब नहीं हो रहा था एक उचित स्लैब लागु हुवा था पर प्रबंधन को बर्दास्त नहीं हुआ अखित सहारा में उथल पुथल क्यों नहीं हो रहा है. सो करमचारियों के रहम में और कटौती कर दी गयी. आओ कौन प्रोटेस्ट करेगा. ण योगी साथ देंगें न कोई यूनियन. पत्रकारिता तो मर गयी है. समय रहते चेतिए.

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  • शशिधर पाठक says:

    संजय सिंह से यही उम्मीद की जा सकती है। उन्हें पता है नम भूमि पर ही पौधे उगते है।

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  • charan singh says:

    जो हुआ सो हुआ। अब सब पत्रकार संगठन मिलकर पत्रकारों के शोषण और दमन के खिलाफ मोर्चा खोलें।

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