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इंटरव्यू

जेएनयू से निकला एक संत, प्रत्यूष पुष्कर को सलाम करो (देखें वीडियो)

Yashwant Singh : जेएनयू से लोग अफसर बनकर निकलते हैं, नेता बनकर निकलते हैं, इतिहासकार बनकर निकलते हैं, शिक्षक बन जाते हैं, पर बहुत कम लोग संत बनते हैं. प्रत्यूष पुष्कर उनमें से एक हैं. ये शुरुआती दिनों में मीडिया में रहे हैं. आशीष खेतान के साथ काम कर चुके हैं. फ्रीलांस फोटो जर्नलिस्ट के बतौर पूरा देश घूम चुके हैं. इन दिनों वे आर्ट और अध्यात्म पर काम कर रहे हैं. 

Yashwant Singh : जेएनयू से लोग अफसर बनकर निकलते हैं, नेता बनकर निकलते हैं, इतिहासकार बनकर निकलते हैं, शिक्षक बन जाते हैं, पर बहुत कम लोग संत बनते हैं. प्रत्यूष पुष्कर उनमें से एक हैं. ये शुरुआती दिनों में मीडिया में रहे हैं. आशीष खेतान के साथ काम कर चुके हैं. फ्रीलांस फोटो जर्नलिस्ट के बतौर पूरा देश घूम चुके हैं. इन दिनों वे आर्ट और अध्यात्म पर काम कर रहे हैं. 

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प्रत्युष पुष्कर को देखकर आप उनकी उम्र का अंदाजा नहीं लगा सकते. किसी को वह बस बीस साल के दिखते हैं तो कोई पैंतीस चालीस से कम का नहीं बताता. मैंने उनसे पूछा भी, लेकिन उन्होंने जन्म की तारीख बताई और चुप लगा गए. उनकी प्रेयसी विदेशी हैं और डाक्टर हैं. आजकल उनकी प्रेयसी की मित्र लिजा उनके यहां रुकी हुई हैं. दिल्ली के हौज खास गांव में स्थित प्रत्युष पुष्कर के ठिकाने पर उनके छोटे भाई और कुछ अन्य पढ़ने लिखने वाले मित्र भी रहा करते हैं. यहां आकर लगता है जैसे आप अपने घर आ गए हों. बेहद सहज माहौल. कहीं कोई तकल्लुफ नहीं.

प्रत्यूष पुष्कर जेएनयू से निकले हैं. वे एबीवीपी और आइसा, दोनों से दुखी हैं क्योंकि इनने जेएनयू के छात्रों को इस ओर या उस ओर लाकर युद्ध की मुद्रा में खड़ा कर दिया है. प्रत्यूष पुष्कर युवा संत हैं. भारत के हर हिस्से को घूम चुके हैं, जी चुके हैं, अब भी घूमते रहते हैं और इन दिनों गंगोत्री जाने की तैयारी में हैं. अंग्रेजी भाषा पर जबरदस्त पकड़ रखने वाले प्रत्युष पुष्कर को अंतरराष्ट्रीय गीत संगीत से लेकर अध्यात्म और भक्ति के हर ओर-छोर का पता है. ओशो हों या बुद्ध, सब पर बतियाने के लिेए उनके पास बहुत कुछ है. कुछ घंटों की अपनी मीटिंग के दौरान प्रत्यूष पुष्कर को कई रूपों में देखा. एक गीतकार, एक संगीतकार, एक ओजस्वी वक्ता, एक ममतामयी संत, एक बेहद तार्किक व्यक्तित्व.

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उनके करीबी लोग कहते हैं कि प्रत्यूष दरअसल ओशो के मिशन को पूरा करने के लिए प्रकटे हैं. सच क्या है, यह नहीं पता लेकिन इतना मालूम है कि प्रत्युष पुष्कर में कुछ तो है जो सबको उनकी तरफ खींचता है. चलते वक्त वे गले मिले और देर तक सीने से चिपकाए रखकर अंदर की उर्जा उष्मा को महसूस करने को प्रेरित किया. मुझे निजी तौर पर प्रत्यूष पुष्कर से मिलकर खुशी हुई क्योंकि आज के दौर में जब हर कोई तुरत फुरत शार्टकट अपनाकर सिर्फ और सिर्फ पैसे कमा बना लेना चाहता है वहां प्रत्यूष पुष्कर जैसा व्यक्तित्व अपनी ही मस्ती, अपनी ही स्टाइल और अपनी ही दुनिया में मस्त है. शायद दुनिया को ऐसे लोगों की ज्यादा जरूरत है.

संबंधित वीडियोज देखने के लिए नीचे क्लिक करते जाएं :

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जेएनयू वाला संत : प्रत्यूष पुष्कर और जीवन के रंग
https://www.youtube.com/watch?v=ZZXRj_orsxg

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जेएनयू वाला संत : प्रत्यूष पुष्कर और अध्यात्म का हालचाल
https://www.youtube.com/watch?v=21HeF4L8Dqc

जेएनयू वाला संत : प्रत्यूष पुष्कर की संगीत भरी दुनिया
https://www.youtube.com/watch?v=iEqmrY8RXfY

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जेएनयू वाला संत : प्रत्यूष पुष्कर एक अनूठा व्यक्तित्व
https://www.youtube.com/watch?v=9Rgy5Ir6uJ8

भड़ास एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

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