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पुल ढहने की खबर छोड़कर नरेन्द्र मोदी की आत्मप्रशंसा के पुल!

संजय कुमार सिंह

आज के अखबारों की सबसे खास खबर है, द हिन्दू की लीड। रेलवे ने मानवीय भूल के दावों से पल्टी मारी; मरने वाले 10 हुए। इस खबर का उपशीर्षक है, वरिष्ठ अधिकारियों ने माना कि ऑटोमेटिक सिगनलिंग सिस्टम काम नहीं कर रहा था, कवच था ही नहीं, रेल सुरक्षा आयुक्त दुर्घटना के कारणों की जांच आज शुरू करेंगे। यह खबर आज इसलिये भी महत्वपूर्ण है कि सोशल मीडिया पर यह प्रचार किया जा रहा है कि 10 साल के यूपीए शासन में रेल दुर्घटनाओं की संख्या 10 साल के भाजपा शासन से ज्यादा थी। यानी दुर्घटनाएं हो रही हैं तो क्या हुआ कम हो रही हैं और कम लोग मरे हैं। गनीमत है, इस तरह की खबरें अखबारों में नहीं छप रही हैं और रेलवे ऐसे विज्ञापन नहीं छपवा रहा है। वरना कुछ भी हो सकता है। कहने की जरूरत नहीं है कि पहले दुर्घटनाएं ज्यादा होती थीं – क्योंकि भ्रष्टाचार था। अब जब इलेक्टोरल बांड की सरकार है, दुर्घटनाओं से बचने के लिए कवच लगाने का दावा है (पैसे तो खर्च हुए ही होंगे) तो दुर्घटनाएं रुक क्यों नहीं रही हैं? यह सवाल नहीं है, कम होने का प्रचार है।

कुल मिलाकर, तीसरा कार्यकाल भी वैसा ही होने के आसार हैं और इसमें अमर उजाला की खबर महत्वपूर्ण है, लोकसभा अध्यक्ष भाजपा का होगा इसपर सहमति बन गई है। खबर के अनुसार तेलुगू देशम पार्टी इस पद के लिए भाजपा उम्मीदवार को समर्थन देने पर राजी हो गई है। मुझे लगता है कि यह बड़ा मामला है और अगर यह खबर सही है तो दूसरे अखबारों में भी होनी चाहिये थी। लेकिन अमर उजाला में भी दूसरे पहले पन्ने पर है। नवोदय टाइम्स में टॉप पर खबर है, राजनाथ सिंह ने मंत्रियों से मुलाकात की, संसद की रणनीत पर चर्चा हुई। बैठक में स्पीकर के नाम पर भी मंथन हुआ। इसमें एनडीए के नेता मौजूद रहे। ईवीएम, इससे जुड़े मुद्दों पर चुनाव आयोग की चुप्पी, प्रधानमंत्री का सवाल कि, ईवीएम जिन्दा है या मर गया, नीट में घपला, रेल दुर्घटना से संबंधित उपरोक्त खबर के बीच आज अमर उजाला की लीड, तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने संसदीय क्षेत्र काशी के दौरे की है। इसके साथ आज यह भी खबर है कि मन की बात फिर से शुरू होगा और तीसरे कार्यकाल का पहला कार्यक्रम इतवार को आयेगा। अमर उजाला में प्रधानमंत्री का प्रचार, तीन कॉलम के विज्ञापन के बावजूद यह पांच कॉलम की लीड है। इसका शीर्षक है, दुनिया भर में खाने की हर टेबल पर हो भारत का कोई ना कोई उत्पाद : मोदी”

आपको याद होगा कि हाल ही में विदेशों में भारतीय मसालों की भारी किरकिरी हुई थी और उन्हीं दिनों यह खबर फैली थी कि भारतीय फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसएसएआई) ने मसालों में कीटनाशकों की मात्रा 10 गुना तक ज्यादा होने की अनुमति दे दी है। तब एफएसएसएआई ने कहा था कि ये सभी रिपोर्ट्स पूरी तरह से गलत हैं। नवभारत टाइम्स की एक पुरानी खबर के अनुसार, भारत में 295 से ज्यादा कीटनाशक रजिस्टर्ड हैं। इनमें से 139 सिर्फ मसालों के लिए इस्तेमाल किए जा सकते हैं। नियमों को कमज़ोर करने के संबंध में एफएसएसएआई का कहना था कि उन्होंने सिर्फ उन कीटनाशकों के लिए नियम बदले हैं जो भारत में इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं है। इसका मतलब है कि ये कीटनाशक भारतीय मसालों में नहीं डाले जा सकते, सिर्फ बाहर से आने वाले मसालों में हो सकते हैं। यह बदलाव इसलिए किया गया क्योंकि हाल ही में कुछ मशहूर मसाला ब्रांड्स के उत्पादों में खतरनाक रसायन पाए गए थे। यह भारत में विदेशी मसालों के बारे में है।

इस खबर में या ऐसी कोई दूसरी खबर मुझे नहीं मिली जिससे पता चले कि विदेशों में प्रतिबंधित किये गये भारतीय मसालों के मामले में सरकार ने कुछ सकारात्मक किया है जिससे कम से कम भारतीय मसाले विदेशों में खाने की मेज पर हों। यह वैसे भी सबसे आसान है। भारत से गोमांस का निर्यात होता नहीं है और भैंस का मांस निर्यात करने वालों को इलेक्टोरल बांड से चंदा देना होता है। ऐसे में सरकार विदेशों में इसकी लोकप्रियता के लिए क्या कर रही है, कुछ पता नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा है इसलिए खबर पांच कॉलम की लीड है। इस खबर के साथ हाइलाइट किया हुआ अंश है, दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक ताकत बनाने में कृषि की सबसे बड़ी भूमिका है। इसके बावजूद कृषि की बेहतरी के लिए 10 साल में इस सरकार ने क्या किया है यह किसी से छिपा नहीं है। इन दिनों किसान सम्मान निधि खाते में स्थानांतरित करने का बड़ा प्रचार है। हालांकि, सबको पता है कि इससे कृषि का विकास नहीं होने वाला है और आर्थिक स्थिति तो नहीं बदलने वाली है। फिर भी अखबारों में खबरों की ऐसी प्रस्तुति से भाजपा को फायदा होगा ही।

इस तरह, अमर उजाला की खबर के अनुसार प्रधानमंत्री ने काशी के मतदाताओं से कहा है कि तीसरी बार चुन कर धन्य कर दिया तो इंडियन एक्सप्रेस की लीड बताती है कि सरकार उत्तर प्रदेश के चुनाव नतीजों का पोस्टमार्ट कर रही है और 25 जून तक रिपोर्ट मांगी गई है। इसके जरिये यह जानने का प्रयास किया जा रहा है कि चुनाव नतीजों पर संविधान, आरक्षण, सरकार की भूमिका में किसका प्रभाव रहा। इंडियन एक्सप्रेस में पहले पन्ने पर नीट, प्राग से प्रत्यर्पण, मध्यप्रदेश में 11 घर बुलडोजर से गिराये जाने की कहानी का फॉलो अप आदि है। एक शीर्षक है, लोकसभा चुनाव हारने के बाद चिन्तित भाजपा-सेना की सरकार ने नागपुर-गोवा हाईवे परियोजना को टाला”इंडियन एक्सप्रेस में एक और बड़ी खबर है। इसके अनुसार, पंजाब में भगवंत मान की सरकार नशा माफिया के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में है और इसके लिए 10,000 पुलिस वालों का ट्रांसफर किया गया है

अमर उजाला की पांच कॉलम की खबर टाइम्स ऑफ इंडिया में दो कॉलम में है। इसका शीर्षक है, प्रधानमंत्री ने कहा, 10 साल बाद भी मतदाताओं का एनडीए सरकार को समर्थन बड़ी जीत है। कहने की जरूरत नहीं है कि 400 पार से शुरू करके 240 पर अटक जाना और बनारस में जीत का अंतर कम होने के बावजूद प्रधानमंत्री ऐसा दावा कर रहे हैं। दूसरी तरफ उनके समर्थक कह रहे हैं, काँग्रेस न तो खुद इतनी सीटें ला सकी कि सरकार बना सके और न ही उसका गठबंधन। ऐसे में बजाय खुशी मनाकर असफलता छिपाने के उसे आत्मावलोकन करना चाहिए कि क्या कारण  है जो 10 साल बाद भी जनता ने उसे सत्ता सौंपने से इंकार कर दिया। मुझे लगता है कि इसकी जरूरत नहीं है और सबको पता (या यकीन) है कि इसमें ईवीएम की भूमिका हो सकती है। चुनाव आयोग की तो है ही। आज की बड़ी खबरों में एक, नीट के मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी है। हिन्दुस्तान टाइम्स और नवोदय टाइम्स ने इसे लीड बनाया है। खबर के अनुसार नीट की परीक्षा में 0.001% गलती की भी गुंजाइश नहीं है। खबरों के अनुसार, शीर्ष अदालत ने एनटीए से कहा है कि अगर कोई गलती हुई है तो उससे इनकार करने की बजाय उसे स्वीकार करके सुधार किया जाना चाहिये।

हिन्दुस्तान टाइम्स में नीट की खबर लीड है और इसके साथ राहुल गांधी का आरोप तीन कॉलम में है। शीर्षक है, नीट के छात्रों का भविष्य दांव पर है लेकिन नरेन्द्र मोदी चुप है। असल में अखबारों ने राहुल गांधी को कम और नरेन्द्र मोदी जो बोल रहे हैं उसे ज्यादा प्रचार दिया है और यह पहले की तरह जारी है। हालांकि हिन्दुस्तान टाइम्स की आज की सेंकेंड लीड, आपने सिर्फ सांसद नहीं, प्रधानमंत्री चुना है। यही नहीं रेल दुर्घटना की खबर भी पहले पन्ने पर है। शीर्षक है, माल गाड़ी की गति निर्धारित गति सीमा से तीन गुना तेज थी। यह किसी और अखबार में इतनी प्रमुखता से नहीं है। नवोदय टाइम्स मोदी की तरफ से बता रहा है, मैं काशी का ही हो गया हूं। तो टाइम्स ऑफ इंडिया में नरेन्द्र मोदी का दावा है कि मतदाता 10 साल बाद भी एनडीए सरकार का समर्थन कर रहे हैं – यह बड़ी जीत है। नवोदय टाइम्स ने इस मामले में राहुल गांधी की टिप्पणी भी मूल खबर के साथ, शीर्षक के नीचे प्रकाशित की है। राहुल गांधी की फोटो के साथ छपी इस खबर का शीर्षक है, राहुल ने मौन के लिए पीएम पर निशाना साधा।

राहुल गांधी ने कहा है, बिहार, गुजरात और हरियाणा में हुई गिरफ्तारियों से साफ है कि परीक्षा में योजनाबद्ध तरीके से संगठित भ्रष्टाचार हुआ है और भाजपा शासित ये राज्य प्रश्नपत्र लीक का केंद्र बन चुके हैं। खबर के अनुसार, राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा है, नीट परीक्षा में 24 लाख से अधिक विद्यार्थियों के भविष्य के साथ हुए खिलवाड़ पर भी नरेन्द्र मोदी हमेशा की तरह मौन धारण किये हुए हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया में मौसम की खबर लीड है। हालांकि, शीर्षक दिल्ली में गर्मी से पांच लोगों की मौत की खबर है। अगर ऐसा है तो यह दूसरे अखबारों में भी लीड हो सकती थी। हिन्दुस्तान टाइम्स ने इसे पहले पन्ने से पहले के अध पन्ने पर लीड बनाया है। शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होगा, उत्तर पश्चिम भारत का 50 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा 1951 के बाद का सबसे समय झेल रहा है। इसके साथ ही खबर का शीर्षक है, दिल्ली में पांचवीं गर्म रात, गर्मी से बीमारी बढ़ रही है। राजधानी में बिजली की मांग अभी तक की सबसे ज्यादा। पांच लोगों की मौत की खबर टाइम्स ऑफ इंडिया में शीर्षक है। खबर के अनुसार लगातार चल रही लू से ये मौतें पिछले 72 घंटों  में  तीन अस्पतालों में हुई हैं।   

द टेलीग्राफ की भी आज की लीड रेल दुर्घटना पर है। दूसरे अखबारों में जिस आरोप और उसपर प्रतिक्रिया की चर्चा खबर के अंदर की गई है उसे द टेलीग्राफ ने शीर्षक बनाया है। फ्लैग शीर्षक में कहा गया है, मौजूदा-पूर्व कर्मचारियों ने (दुर्घटना के संबंध में) आधिकारिक लाइन पर एतराज किया। मुख्य शीर्षक है, मृत चालक दोषी था? ‘यह अनुचित है’। यहां सिगनल काम नहीं करने की रेलवे की स्वीकारोक्ति सिंगल कॉलम में अलग से है। आज के अखबारों में हत्या की साजिश के आरोप में प्रत्यर्पित निखिल गुप्ता का मामला भी महत्वपूर्ण है। इंडियन एक्सप्रेस में पीटीआई की फोटो है तो हिन्दुस्तान टाइम्स में फोटो के साथ खबर भी है।  हिन्दी के मेरे दोनों अखबारों में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। अमर उजाला में दूसरे पन्ने पर आज बिहार में ढहा भ्रष्टाचार का पुल फोटो के साथ चार कॉलम में है। भाजपा की तरफ से राजनाथ सिंह पहले कह चुके हैं, यहां इस्तीफे नहीं होते। दूसरी ओर प्रधानमंत्री का ना खाउंगा ना खाने दूंगा का प्रचार है। ऐसे में पुल के टूटे हुए टुकड़े नैतिकता औऱ ईमानदारी की धज्जियां उड़ा रहे हैं। पर यह मुद्दा नहीं है कि यह ऐक्ट ऑफ गॉड है या ऐक्ट ऑफ फ्रॉड

टाइम्स ऑफ इंडिया में रेल दुर्घटना की खबर पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर कुछ बुलेट प्वाइंट बॉक्स में हाई लाइट किये हुए हैं। इनके साथ ना खबर है ना इनका कोई सामान्य शीर्षक। बुलेट प्वाइंट का शीर्षक है, छह साल की घायल लड़की की मृत्यु के बाद बंगाल रेल दुर्घटना में मरने वालों की संख्या बढ़कर 10 हुई। इसमें बताया गया है कि ऑटोमेटिक सिगनलिंग सिस्टम खराब होने के कारण उस क्षेत्र में मालगाड़ी के लिए अधिकतम गति सीमा 15 किलोमीटर प्रति घंटा है निर्धारित है और वह लगभग तीन गुना तेज गति से चल रही थी। खबर के अनुसार यह 40 किमी प्रति घंटा से भी तेज थी। मारे गये लोको पायलट अनिल कुमार को इस दुर्घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। हालांकि, उनके परिवार के लोग इससे आहत हैं। आज के अखबारों में प्रधानमंत्री के कल के बनारस दौरे के बहाने उनका भरपूर प्रचार दिख रहा है। अमर उजाला का शीर्षक उनकी हवा-हवाई इच्छा है तो डिब्बाबंद भोजन के वैश्विक बजार में पहुंच बढ़ाने का सपना भी।

कहने की जरूरत नहीं है कि अपनी प्रशंसा खुद करने का उनका अंदाज, तीसरी बार चुनकर धन्य कर दिया और इस चुनाव ने इतिहास रचा जैसी खबरों और शीर्षक से है जो विज्ञापन से बचे पहले पन्ने पर भर दिया गया है। इसमें अंग्रेजी अखबारों की तरह निखिल गुप्ता की खबर नहीं है तो नीट आदि जैसे तमाम मामले दूसरे पहले पन्ने के लिए बचा लिये गये हैं। अंग्रेजी अखबारों में भी यह खबर प्रमुखता से है। यह दिलचस्प है कि प्रधानमंत्री ने अपने ही चुने हुए चुनाव आयुक्तों और उनके आयोग की तारीफ की थी और कहा था, “…. मैंने पूछा ईवीएम जिन्दा है कि मर गया … ये लोग तय करके बैठे थे कि भारत के लोकतंत्र और लोकतंत्र की प्रक्रिया के प्रति लोगों का विश्वास ही उठ जाये और लगातार ईवीएम को गाली दे रहे थे। लेकिन चार जून शाम आते-आते आते मुंह पर ताले लग गये।” यह गलत साबित बो चुका है। ईवीएम की कई गड़बड़ियां सामने आई हैं, उसका जवाब नहीं है।

मुंबई के एक मामले में मिडडे की खबर को चुनाव अधिकारी ने गलत बताया, उसके खिलाफ प्रचार किया गया और उसके मामूली से भूल-सुधार को खंडन प्रचारित किया और धमकाने, दबाने के साथ भ्रम फैलाने की कोशिश की गई। सरकारी स्तर पर जिनके बयान आये वे निचले अधिकारी और पुलिस के हैं। चुनाव आयोग ने वैसे ही चुप्पी साध रखी है जैसे चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री के सांप्रदायिक और आपत्तिजनक भाषणों पर था। तुर्रा यह कि प्रधानमंत्री उसी चुनाव आयोग और व्यवस्था की तारीफ कर रहे हैं। शिकायतों के मद्देनजर यह तो स्पष्ट है कि पारदर्शिता नहीं है और ऐसे में चुनाव आयोग का चुप रहना – भ्रम फैलाने में सहयोग करना तो है ही। प्रधानमंत्री अपनी पीठ खुद थपथपा रहे हैं और अखबार उसी को प्रचारित कर रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर में एक टेलीमार्केटिंग और नेटर्किंग कंपनी में महिला कर्मचारियों को बंधक बनाकर यातना देने और महीनों त बलात्कार का एक मामला द टेलीग्राफ में आज छपा है। इस मामले में एक व्यक्ति को गोरखपुर से गिरफ्तार किया गया है।

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1 Comment

1 Comment

  1. Dayal chand yadav

    June 19, 2024 at 11:54 pm

    PRP ACT 2024 par charcha kijiye Please?

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