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राफ़ेल केस, चीफ़ जस्टिस, यौन उत्पीड़न, महिला कर्मी, जासूसी, राज्यसभा सीट, पुनर्नियुक्ति और आज का नया खुलासा!

गिरीश मालवीय-

वायर ने खुलासा किया है कि भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली सुप्रीम कोर्ट की कर्मचारी से संबंधित तीन फोन नंबर इज़राइल स्थित एनएसओ समूह की ग्राहक- एक अज्ञात भारतीय एजेंसी द्वारा निगरानी के उद्देश्य से संभावित हैक के लिए लक्ष्य के रूप में चुने गए थे.

यानी यह साफ है कि उस दौरान उस महिला की गतिविधियों की जानकारी निकाल कर इस मामले को सेटल किया गया।

मुझे याद है कि चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर यौन शोषण के आरोप सामने आए थे तो लगभग पूरा मीडिया और सोशल मीडिया भी यही मानकर इस घटना का विश्लेषण कर रहा था कि जस्टिस रंजन गोगोई को उक्त महिला फंसा रही है , यह रंजन गोगोई के खिलाफ कोई साजिश है जिसमे वह महिला सबसे बड़ा मोहरा है…

लेकिन अब साफ हो गया है कि वह महिला मोहरा नही थी वह पीड़ित थी ओर पैगासस के जरिए उसकी एक्टिविटी को ट्रेस कर के उसे मोहरा बनाया गया और सुप्रीम कोर्ट में उस वक्त चल रहे रॉफेल जैसे बहुत महत्वपूर्ण केसेस की फाइलो को निपटाया गया, बाद में ईनाम के बतौर गोगोई जी को राज्यसभा का सदस्य बनाया गया और सेटलमेंट के बतौर उस महिला को पुर्ननियुक्ति दी गयी उसके पति को भी दिल्ली पुलिस ने वापस नोकरी पर बहाल किया।

आपको एक बार पूरा घटनाक्रम याद दिला देता हूँ…..

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई के खिलाफ लगे यौन शोषण के आरोप ने न्‍यायपालिका को हिलाकर रख दिया था दरअसल मामला कुछ यूं था कि 35 वर्षीय महिला सुप्रीम कोर्ट में जूनियर कोर्ट असिस्टेंट के रूप में काम कर रही थी.

महिला ने उस वक्त मुख्य न्यायाधीश रहे रंजन गोगोई के खिलाफ 22 न्यायाधीशों को एक एफिडेविट भेजकर शिकायत दर्ज की थी

यह एक सामान्य शिकायत नहीं थी, बल्कि एक सीजेआई के खिलाफ यौन उत्पीड़न की शिकायत थी. इस एफिडेविट में उसने 10 और 11 अक्टूबर, 2018 को CJI निवास पर उसके साथ हुई कथित घटना का विस्‍तृत ब्‍यौरा दिया है.

पूरा देश इस घटना से हतप्रभ रह गया था सभी के दिमाग मे यही आया कि यह मामला बनावटी है और रंजन गोगोई को उस समय चल रहे महत्वपूर्ण मामलों से हटाने का प्रयास है …….

तत्कालीन वित्त मंत्री ने तो इस शिकायत का दोष वामपंथी ताकतों पर डाल दिया जेटली ने अपने ब्लॉग में उस वक्त इस घटना का जिक्र करते हुए लिखा ‘अस्थिरता पैदा करने वाली ताकतों में बड़ी संख्या में वामपंथी या अति वामपंथी विचारधारा के हैं। इनका न तो कोई चुनावी वजूद है न ही जनसमर्थन। इसके बावजूद ये लोग मीडिया और शैक्षणिक संस्थानों में असमानुपातिक रूप से अब तक मौजूद हैं। जब इन्हें मीडिया की मुख्यधारा से बेदखल कर दिया गया तो इन्होंने डिजिटल और सोशल मीडिया का सहारा ले लिया……..

जस्टिस रंजन गोगाई ने इस आरोप को सिरे से नकार दिया जस्टिस रंजन गोगोई ने तो उस समय यहां तक कहा कि इसकी भी जांच होनी चाहिए कि इस महिला को यहां (सुप्रीम कोर्ट) में नौकरी कैसे मिल गई जबकि उसके खिलाफ आपराधिक केस है

रंजन गोगोई ने अपने ही खिलाफ जज बनने का फ़ैसला ले लिया ……….शनिवार 20 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में जो कुछ हुआ वह न्याय के उपहास से कुछ भी कम नहीं था। चीफ जस्टिस ने अपने संवैधानिक पद का उपयोग करते हुए उन पर लगे यौन उत्पीड़न के आरोपों को न केवल नकारा, बल्कि शिकायतकर्ता के खिलाफ नकारात्मक टिप्पणी करते हुए स्वयं पर लगे आरोपों को न्यायिक व्यवस्था के विरुद्ध एक बड़ी साजिश बताया। साथ ही साथ इस मामले में मीडिया की भी आवाज दबाने की कोशिश की। इसके अलावा अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल ने भी शिकायतकर्ता की गैरमौजूदगी में उसका चरित्र हनन किया गया

जब यह मामला कोर्ट के सामने आया तो उस वक्त अटॉर्नी जनरल ने भी रंजन गोगोई का पक्ष लेते हुए कहा कि पुराने मामले में पुलिस द्वारा कैसे इस महिला को क्लीन चिट दी गई. ?

साथ ही चीफ जस्टिस तो अपने खिलाफ आरोप देखकर कहने लगे कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता ही खतरे में है.

महिला को झूठा सिद्ध करने के लिए उस वक्त बहुत से खेल खेले गए ……..कहा जाने लगा कि मुख्य न्यायाधीश को एक झूठे मामले में फंसाया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट के वकील उत्सव बैंस ने दावा किया था कि सीजेआई गोगोई को यौन शोषण के झूठे आरोपों में फंसाने की साजिश की जा रही है.
उन्होंने मामले में एक एयरलाइन संस्थापक, गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम और एक कथित फिक्सर को इसके लिए जिम्मेदार बताया और दावा किया कि एक अजय नामक व्यक्ति ने प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ आरोप लगाने के लिए 1.5 करोड़ रुपये की पेशकश की गई थी.

बाद में जस्टिस पटनायक ने इस बात को झूठा करार दिया जस्टिस एके पटनायक जांच समिति ने उपरोक्त महिला कर्मी को शीर्ष अदालत और मुख्य न्यायाधीश को बदनाम करने की साजिश में शामिल होने के मामले में क्लीन चिट दे दी

बाद में उच्चतम न्यायालय ने महिला के आरोपों की इनहाउस समिति से जांच करवाई, जिसने छह मई को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई को भी क्लीन चिट दे दी थी।

इस पूरे प्रकरण पर आप विहंगम दृष्टि डालेंगे तो आप देखेंगे कि खुले आम न्याय की हत्या हुई है ……कमाल की बात है कि सुप्रीम कोर्ट दोनों ही पक्ष को राहत दे दी ……….रंजन गोगोई को भी क्लीन चिट मिल गयी महिला को भी क्लीन चिट दे गई ओर आज यह भी साफ हो गया कि पूरे मामले को पैगासस जैसे स्पाई वेयर का इस्तेमाल कर के सेटल किया गया था।……

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