सभी को नमस्कार,
मैं, राघव तिवारी, News24 में डिजिटल विंग में शिफ्ट हेड पद से इस्तीफा दे रहा हूँ। यह निर्णय मैंने काफी सोच-विचार के बाद लिया है।
कोई संस्थान अच्छा या बुरा नहीं होता। लोग उसे अच्छा या बुरा बनाते हैं। न्यूज 24 के साथ भी कुछ ऐसा ही हो रहा है। संस्थान ने साल भर पहले मुझ पर भरोसा जताया और पूरी टीम के सपोर्ट के चलते कभी कोई दिक्कत नहीं हुई। लेकिन फिर मैनेजमेंट बदला, धीरे धीरे पूरी टीम बदल गई।
दिक्कत बदलाव से नहीं हुई। दिक्कत गलत इंसान के गलत जगह बैठने से हुई। अगर कोई एक व्यक्ति गलत होता तो उसका असर केवल उसी पर पड़ता लेकिन लीडर के गलत होने से पूरी टीम सफ़र करती है।
टीम में भेदभाव, टीम को लेकर न चलना, लीडरशिप जीरो हो जाना, खबरों में लापरवाही, अतार्किक नियम, ब्रेकिंग को नजर अंदाज करना इत्यादि, फ्लोर पर भारी मात्रा में होने लगा था।
कई बार मैंने खुद तनवीर जी, सुशांत जी को इसके बारे में बताया लेकिन स्थिति जस की तस रही। शायद उन्हीं के द्वारा लाए गए लोगों की गलतियां थीं।
बीच में स्थितियों को देखते हुए शिफ्ट हेड का पद छोड़ दिया था। बाद में, सुशांत जी के आश्वासन और रिक्वेस्ट पर मैंने फिर शिफ्ट हेड का पद संभाला था लेकिन लगातार वही रवैया के चलते मैंने संस्थान छोड़ने के फैसला किया है।
कुछ उदाहरण
– टीम की साथी वंदना जी की खबरों में काफी दिक्कत होती है। कई बार खबर रिपीट कर देती हैं। मुझसे कई बार अपशब्दों के साथ बात थी। इसपर चीफ कंटेंट ऑफिसर तनवीर जी ने मुझे वंदना जी को टोकने के लिए मना कर दिया। इसका स्क्रीनशॉट मेल में अटैच है।
– मॉर्निंग में मीटिंग होती है। एक बार मैंने मीटिंग में न्यूज के बाद बिजनेस का प्लान मांगा। मैंने बिजनेस देखने वाली वंदना जी को प्लान बताने के लिए कहा तो उन्होंने कहा- ‘आगे बढ़ो आगे अभी नहीं है’। फिर अन्य साथियों से मैंने प्लान पूछा। जब मैंने स्पोर्ट्स का प्लान बताने के लिए एक साथी को कहा तो वंदना जी ने स्पोर्ट्स के साथी को टोकते हुए कहा – अब मैं बताती हूं। मैंने स्पोर्ट्स के साथी को ही बोलने के लिए कहा लेकिन वंदना जी नहीं मानी। यहां तक मीटिंग में नवनियुक्त टीम लीड आकर्ष जी भी मौजूद थे। आकर्ष जी ने वंदना जी को बोलने के लिए कहा। इससे टीम पर बहुत बुरा असर पड़ा। वंदना जी की मनमर्जी को सपोर्ट करने की खिल्ली पूरी टीम से उड़ाई।
– किसी मसले पर मैंने तनवीर जी और अन्य वरिष्ठों को मेल की थी। मामला समझने और लीडरशिप दिखाने के बजाय तनवीर जी ने ये रिप्ले किया- ‘No more mails and discussions on this topic without my permission. All of you, please behave like mature colleagues.’
मैंने इस मेल को अटैच कर रहा हूं।
– ऐसे फैसलों से गलती करने वालों का हौसला बढ़ता गया और काम करने वालों के लिए दिक्कत होती गई। आज पूरे फ्लोर पर टॉक्सिक माहौल है।
– हाल में, मैंने कुछ गलतियों के लिए टीम की एक साथी को ऑफिशियल ग्रुप में ही टोका। थोड़ी ही देर में तनवीर जी से ये मैसेज किया- ‘Aap dono apne dicussions thode limit mei rakhie’
गलती को समझने और गलती करने वाले को समझने की बजाय ये जवाब ने मुझे हैरान कर दिया। इसका स्क्रीनशॉट भी मेल में अटैच है।
मैं जिंदा हूं…
“उसूलों पर जहाँ आँच आये टकराना ज़रूरी है, जो ज़िंदा हो तो फिर ज़िंदा नज़र आना ज़रूरी है”
— वसीम बरेलवी।
वरिष्ठों के फैसले हमेशा चौंकाने वाले और पक्षपात भरे रहे हैं। मैं इसे इग्नोर नहीं कर सकता। मैं आप सभी की रिस्पेक्ट करता हूं लेकिन आत्म सम्मान से ज्यादा नहीं।
13 मई को कंपनी में मेरा लास्ट वर्किंग डे रहा। मैंने कंपनी का लैपटॉप स्टोर में गोपाल जी के पास सबमिट कर दिया है।
धन्यवाद
राघव तिवारी



