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सहारा मीडिया से मोटी सेलरी वालों को हटाने का काम शुरू, कई नाम चर्चा में

सुब्रत राय के लगातार तिहाड़ की रोटी खाने से सहारा समूह के मीडिया वेंचर के आगे दानापानी का संकट आ खड़ा हुआ है. इसे देखते हुए प्रबंधन ने पहले तो सेलरी रोके रखकर लोगों को खुद भाग जाने का मौका दिया. पर जो मोटी सेलरी वाले लंबे समय से कुंडली मारे बैठे हैं उनके न भागने पर प्रबंधन ने उन्हें भगाने का फैसला लिया है.

<p>सुब्रत राय के लगातार तिहाड़ की रोटी खाने से सहारा समूह के मीडिया वेंचर के आगे दानापानी का संकट आ खड़ा हुआ है. इसे देखते हुए प्रबंधन ने पहले तो सेलरी रोके रखकर लोगों को खुद भाग जाने का मौका दिया. पर जो मोटी सेलरी वाले लंबे समय से कुंडली मारे बैठे हैं उनके न भागने पर प्रबंधन ने उन्हें भगाने का फैसला लिया है.</p>

सुब्रत राय के लगातार तिहाड़ की रोटी खाने से सहारा समूह के मीडिया वेंचर के आगे दानापानी का संकट आ खड़ा हुआ है. इसे देखते हुए प्रबंधन ने पहले तो सेलरी रोके रखकर लोगों को खुद भाग जाने का मौका दिया. पर जो मोटी सेलरी वाले लंबे समय से कुंडली मारे बैठे हैं उनके न भागने पर प्रबंधन ने उन्हें भगाने का फैसला लिया है.

चर्चा है कि गोविंद दीक्षित से लेकर अजय पांडेय, अशोक ओहरी, हरदीप सिंह, संजय बहादुर, सुनील कुमार समेत दर्जनों लोग हटाए गए हैं या हटाए जाने की प्रक्रिया में हैं. इन नामों में कुछ संपादकीय से जुड़े हैं तो कुछ एकाउंट व अन्य विभागों से. इन सभी की सेलरी दो लाख से ज्यादा बताई जाती है. सूत्रों के मुताबिक ऐसे लगभग चौदह लोगों की लिस्ट बनाई गई है जिन्हें नमस्ते किया जाएगा.

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0 Comments

  1. pintu

    July 7, 2015 at 10:21 am

    ab ankhe khuli hai sahar shree ki choro ko nikal bahar kar rahe hai achch ho raha hai sabse bada chor to mishra ji the or upendr ray..

  2. pankaj

    July 7, 2015 at 7:21 am

    ये काम तो बहुत पहले करना चाहिए था ।पर चलो अच्छा है इसी बहाने नये लोगों को काम करने का मौका मिलेगा

  3. pankaj

    July 7, 2015 at 7:21 am

    ये काम तो बहुत पहले करना चाहिए था ।पर चलो अच्छा है इसी बहाने नये लोगों को काम करने का मौका मिलेगा

  4. सहारा कर्मी

    July 7, 2015 at 7:30 am

    अगर ये काम बहुत पहले हो जाता तो सायद संस्थान को ये दिन नहीं देखने पड़ते

  5. सहाराकर्मी

    July 7, 2015 at 12:23 pm

    सहारा में यदि सचमुच छंटनी हो जाए तो शायद अच्छे दिन लौट आएं। लेकिन प्रबंधन में बैठे चोर ऐसा नहीं होने देंगे। एक लाख से उपर वेतन पाने वाले सिर्फ और सिर्फ चोर हैं। ये नौकरी नहीं करते सिर्फ चमचागीरी करके पैसा हासिल करने में जुटे हैं। अगर वे काम करते तो संस्थान का स्तर इतना नीचे नहीं गिरता। न टीआरपी और न क्वालिटी।

  6. saharian

    July 8, 2015 at 7:48 am

    सहारा परिवार बड़ा नौटंकीबाज है ,यहाँ दलालों को ही तरजीह मिलती है ,किसे मालूम कि यहाँ केवल लाइजनर को ही बड़े पद मिले,छोटे कार्यकर्ता शब्दजाल मे ही गुमराह किए जाते रहे, यहाँ दीखावा है ,अंदर कुछ और बाहर कुछ और । सहारा श्री सब जानते है …….. छोटे कर्मचारियों को वेतन नहीं अधिकारियों के यहाँ शादियों में करोड़ों खर्च ,मौज मस्ती में कोई कमी नहीं ……..

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