मांगा था मजीठिया का हक, इसलिए नहीं छापा निधन का समाचार

जिनके साथ 25 साल गुजारा उनका भी मर गया जमीर, नहीं शामिल हुए अंतिम यात्रा में, यह है सहारा परिवार का सच…  वाराणसी : सहारा समूह के हुक्मरान सुब्रत राय सहारा एक तरफ जहां सहारा को एक कंपनी नहीं बल्कि परिवार मानने का दंभ भरते हैं, वहीं इसी सहारा समूह के पत्रकार रह चुके जयप्रकाश श्रीवास्तव के निधन की एक लाईन की खबर इसलिये राष्ट्रीय सहारा अखबार में नहीं लगायी गयी क्योंकि जयप्रकाश ने अखबार प्रबंधन से जस्टिस मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार अपना बकाया मांग लिया था।

राष्ट्रीय सहारा के वरिष्ठ पत्रकार श्री जयप्रकाश श्रीवास्तव का सोमवार को वाराणसी के सिंह मेडिकल एण्ड रिसर्च सेंटर, मलदहिया में निधन हो गया। ६४ वर्षीय श्री जयप्रकाश श्रीवास्तव मधुमेह एवं हृदय रोग से पीड़ित थे। उनके निधन पर समाचार पत्र कर्मचारी यूनियन के अजय मुखर्जी सहित कई पत्रकारों ने शोक जताया है।  स्व॰ जयप्रकाश श्रीवास्तव लम्बे समय से पत्रकारिता से जुड़े रहे।  वे अपने पीछे पत्नी, तीन पुत्रियां और एक पुत्र छोड़ गये हैं।  उनके निधन पर देश भर के मजीठिया क्रांतिकारियों ने शोक जताया है और साफ कहा है कि इस क्रांतिकारी का बलिदान र्ब्यथ नहीं जाने दिया जायेगा।

जयप्रकाश श्रीवास्तव का कसूर बस इतना था कि उन्होंने मजीठिया के लिए श्रम न्यायालय में केस कर रखा था। नतीजा रहा कि उनके निधन का समाचार तक नहीं छापा गया। यह कड़वी हकीकत है,  सच कहने की हिम्मत का नारा देने वाले राष्ट्रीय सहारा अखबार का। इस अखबार की वाराणसी यूनिट में जयप्रकाश श्रीवास्तव लगभग 25 वर्ष रिपोर्टर रहने के बाद एक वर्ष पहले रिटायर हो गये थे। सोमवार की शाम हार्ट अटैक के चलते उनका निधन हो गया। उनके निधन की जानकारी मिलते ही राष्ट्रीय सहारा में शोक सभा की तैयारी शुरू हुई। फोटो ग्राफर ने जयप्रकाश की फाइल फोटो कम्प्यूटर में खोज कर निकाला ताकि वह उनके निधन के समाचार के साथ प्रकाशित हो सके।

निधन का समाचार एक रिपोर्टर ने कम्पोज करना शुरू ही किया कि ऊपर से मौखिक निर्देश आ गया। बताया गया कि जय प्रकाश ने मजीठिया का हक पाने के लिए लेबर कोर्ट में संस्थान के खिलाफ मुकदमा कर रखा है इसलिए उनके निधन का समाचार राष्ट्रीय सहारा में नहीं छपेगा। यह सूचना मिलते रिपोर्टर ने खबर और फोटोग्राफर ने कम्प्यूटर से जयप्रकाश की फोटो डिलीट कर दी। इतना ही नही, इशारों में एक दूसरे को कुछ ऐसे संकेत हुए कि राष्ट्रीय सहारा के पत्रकार साथी न तो संवेदना व्यक्त करने के लिए जयप्रकाश के घर गये और न ही उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हुए। केवल एक स्टाफर और चार-पाच स्ट्रिंगर ही उनके घर गए।

जयप्रकाश ने लगभग 25 साल राष्ट्रीय सहारा में सेवा की। वह ब्यूरो के स्टाफ थे। उनके साथ ही सहारा में नौकरी शुरू करने वाले लगभग डेढ दर्ज़न कर्मचारी आज भी सहारा की वाराणसी यूनिट में है जिनके साथ जयप्रकाश के घरेलू रिश्ते रहे लेकिन ऐसे लोगों ने भी नौकरी जाने के भय में अपना जमीर गिरवी रख दिया। वे भी संवेदना व्यक्त करने के लिए जयप्रकाश के घर जाने की हिम्मत नहीं जुटा सके। सहारा को परिवार बताने वाले सुब्रत राय के इस संस्थान की ओर से एक माला तक नसीब हो सकी जय प्रकाश को।

शशिकांत सिंह
पत्रकार और आरटीआई एक्सपर्ट
९३२२४११३३५

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

Comments on “मांगा था मजीठिया का हक, इसलिए नहीं छापा निधन का समाचार

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *